Overview: हनुमान बाहुक के लाभ
हनुमान बाहुक गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित एक प्रभावशाली स्तोत्र है। इसका नियमित पाठ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। मंगलवार को इसका पाठ विशेष रूप से लाभकारी माना गया है। यह रोग, तनाव और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति दिलाता है।
Hanuman Bahuk: हनुमान जी को कलियुग का महान देवता माना जाता है। उनकी भक्ति करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और शारीरिक व मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है। हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की तरह ही हनुमान बाहुक भी एक प्रभावशाली स्तोत्र है। इसे गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने शारीरिक कष्ट और मानसिक कठिनाइयों के समय रचा था।
हनुमान बाहुक का मुख्य उद्देश्य शारीरिक रोग, मानसिक तनाव, शत्रु बाधाएं और जीवन की परेशानियों से मुक्ति दिलाना है। इसका नियमित पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में अद्भुत लाभ होते हैं और उसके चारों ओर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
हनुमान बाहुक के लाभ
रोगों से मुक्ति
मान्यता है कि तुलसीदास जी को अपने जीवन में वात रोग और अन्य शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ा। इसी समय उन्होंने हनुमान बाहुक की रचना की। कहा जाता है कि इसके नियमित पाठ से उनकी शारीरिक पीड़ा दूर हो गई और स्वास्थ्य में सुधार हुआ। इसी प्रकार, आज भी हनुमान बाहुक का पाठ करने से विभिन्न रोगों और शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।
शारीरिक और मानसिक शक्ति में वृद्धि
हनुमान बाहुक का निरंतर पाठ शरीर और मन दोनों को मजबूत करता है। यह आंतरिक शक्तियों को जागृत करता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और मानसिक तनाव कम करता है। नियमित पाठ करने वाले व्यक्ति में ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है।
शत्रु बाधाओं से सुरक्षा
हनुमान बाहुक का पाठ कोर्ट-कचहरी, विवाद या शत्रुओं से होने वाली परेशानियों से सुरक्षा प्रदान करता है। जो भक्त इसका नियमित रूप से पाठ करता है, उसके चारों ओर हनुमान जी का एक अदृश्य सुरक्षा कवच बन जाता है। यह पाठ जीवन में आने वाली चुनौतियों और कठिनाइयों से निपटने में भी मदद करता है।
नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा
हनुमान बाहुक का पाठ भूत-प्रेत, जादू-टोना या किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्ति से रक्षा करता है। ऐसा कहा जाता है कि इस स्तोत्र का पाठ करने वाले व्यक्ति के आसपास कोई भी बुरी शक्ति प्रभाव नहीं डाल सकती। यह पाठ भक्त के जीवन में सुरक्षा और मानसिक शांति सुनिश्चित करता है।
हनुमान बाहुक का महत्व
हनुमान बाहुक का उल्लेख तुलसीदास जी के हनुमान भक्ति साहित्य में मिलता है। बनारस, अयोध्या और चित्रकूट जैसे क्षेत्रों में यह ग्रंथ अत्यधिक चर्चित है। वैदिक ज्योतिष और आयुर्वेदाचार्य भी इसे मानसिक और शारीरिक मजबूती के लिए लाभकारी मानते हैं। प्रसिद्ध श्लोक “दीनबंधु दुखहारी, हनुमंत रखवारी। बाहुक बनायो तुलसी, संकट मिटाओ सारी।” इसी महत्व को दर्शाता है।
कलियुग में हनुमान जी चिरंजिवी माने जाते हैं। माना जाता है कि उनकी भक्ति करने से सभी कष्ट, रोग और शत्रु बाधाएं दूर हो जाती हैं। इसलिए मंगलवार को हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है और हनुमान चालीसा, हनुमान अष्टक और हनुमान बाहुक का पाठ करना लाभकारी माना गया है।
हनुमान बाहुक का पाठ कैसे करें
तैयारी
हनुमान बाहुक का पाठ करने से पहले शुद्धता बनाए रखना जरूरी है, इसलिए स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
पूजा विधि
हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक प्रज्ज्वलित करें।
पीले या लाल फूल अर्पित करें।
गुड़-चना, सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें।
पाठ की विधि
मंगलवार के दिन तुलसी का पत्ता जल में डालकर हनुमान बाहुक का पाठ करें।
पाठ के बाद उस जल को पीने से शारीरिक कष्ट और रोगों में राहत मिलती है।
प्रत्येक पाठ के बाद “ऊँ हनुमते नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
समय और अवधि
विशेष रूप से जो लोग गठिया, वात रोग, सिर दर्द या जोड़ों के दर्द से पीड़ित हैं, उन्हें 21 या 26 दिनों तक लगातार पाठ करने की सलाह दी जाती है।
