जानिए कहां एक रात में कर दिया था भूतों ने मंदिर का निर्माण
भारत के रहस्यमय मंदिर जिनका निर्माण भूतों ने एक रात में किया था
Mysterious Temples in India: भारत देश एक से एक अद्भुत घटनाओं और रहस्यमय चीजों से भरा हुआ है, जिन्हें आप अगर एक्सप्लोर करने निकलेंगे तो आपकी पूरी जिंदगी भी कम पड़ जाएगी। भारत देश आश्चर्य और चमत्कारी चीजों से भरा पड़ा है। ऐसे ही एक अचरज करने वाले वाक्ये से आप सबको रुबरु करवाते है, जहां एक रात में भूतों ने मंदिर का निर्माण कर दिया था। अगर आपको विश्वास नहीं होता तो चलिए हम बताते है इस मंदिर से जुड़े रोचक किस्से।
भूतेश्वर महादेव मंदिर, उत्तरप्रदेश

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के दत्तियाना गांव में एक मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसे भूतों ने बनवाया है। यह मंदिर भूतेश्वर महादेव मंदिर है। इस मंदिर को लेकर एक और किस्सा है कि जब औरंगजेब राजा था तो उसने सभी मंदिर तुड़वाए, लेकिन जब उसके आदमी इस मंदिर को तोड़ने आए, तो उन्हें चारों धर्मों के प्रतीक चिन्ह मंदिर के मुख्य द्वार पर दिखाई दिए, जिसके देख वो सभी लौट गए। इस मंदिर को लेकर कहते हैं कि एक ही रात में भूतों ने इस पूरे मंदिर को बना डाला था।
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भूतों से जुड़ा हैं दत्तियाना का लाल मंदिर
गांव दत्तियाना के इस शिव मंदिर की एक अलग ही पहचान है, जो लाल ईंटों से बना है और इसकी भव्यता देखते ही बनती है। गांव के लोगों की मानें तो कई सौ साल पुराने इस मंदिर को भूतों ने बनाया तो था, लेकिन फिर दिन होते ही सारे भूत कही गायब हो गए जिसके कारण ये मंदिर आधा अधूरा ही बन पाया। फिर मंदिर की चोटी को एक राजा ने बाद में बनवाया।
ये मंदिर संवत 573 में बना, जिस पर तेज धूप और बरसात के पानी का कोई असर ही नहीं होता। यहां तक कि मंदिर की परिधि में किसी भी तरह के आपदा का प्रभाव नहीं होता। कहते हैं कि मंदिर में जो भी सच्चे मन से जाकर पूजा करता है, उसकी सारी मनोकामना पूरी होती है।
ककनमठ मंदिर का रहस्य

ऐसे ही अजूबे से भरा मंदिर भारत के दिल मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के सिहोनियां कस्बे में भी मौजूद है। इस मंदिर का नाम ककनमठ मंदिर। हज़ार साल से भी प्राचीन इस मंदिर के बारे में कई लोगों का मानना है कि रातों-रात इस मंदिर का निर्माण भी भूतों ने कर दिया था। लेकिन सुबह होते ही भूतों ने मंदिर का कुछ निर्माण करना छोड़ दिया जिसे बाद में रानी ने करवाया था। इसलिए मंदिर का कुछ हिस्सा बाद में बिना चूने और गारे से बना हुआ है।
लोगों का मानना है कि राजा कीर्ति की पत्नी ककनावती भगवान शिव की बड़ी भक्त थी और आसपास एक भी शिव मंदिर नहीं था इसलिए इसका निर्माण करवाया था। उन्हीं के नाम पर इस मंदिर का नाम ककनमठ पड़ा।
तूफान का मंदिर पर नहीं होता असर
इस मंदिर को देखकर ऐसा लगता है कि यह कभी भी गिर सकता है, लेकिन हजारों वर्ष से लेकर आज भी यह मंदिर वैसे ही खड़ा है। आंधी-तूफान में भी मंदिर का कोई भी हिस्सा हिलता-डुलता नहीं है। कई लोगों का मानना है कि वैज्ञानिकों ने भी इस मंदिर का निरीक्षण कर चुके हैं और उन्हें यह मालूम नहीं चल सका कि इसका निर्माण कैसे किया गया है। कहा जाता है कि यहां कई मूर्तियां टूटी हुई अवस्था में हैं। आपको बता दें कि इस मंदिर को मध्य प्रदेश का अजूबा मंदिर माना जाता है।
