Positive Conversation: रिश्ता चाहे कैसा भी हो, हमेशा दोतरफा होता है। खासकर पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते में यू एंड मी की अहम् भूमिका होती है। अच्छे रिश्ते में 3 पक्ष होते हैं मैं, तुम और हमारा रिश्ता । एक रिश्ते को बचाने के लिए बहुत कुछ बदलना जरूरी है। जैसे इमारत मजबूत बनाने के लिए हर ईंट पर सीमेंट लगानी पड़ती है। उसी तरह आपसी रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए आपको हर रोज प्रयास करना पड़ता है। हर रोज प्यार और केयर देकर अपने रिश्ते में मिठास भरनी पड़ती है।
क्यों होती है रंजिश-
पति-पत्नी का रिश्ता ऐसा होता है जिसमें आपस में प्यार के साथ नोंक-झोंक भी होती है। जो व्यक्ति आपके बहुत नजदीक या बहुत खास होते हैं, उनसे आपको ज्यादा उम्मीदें होती हैं। जरूरी नहीं कि उनकी कोई बात ही बुरी लगे, कई बार उनके हाव-भाव, किसी बात पर या स्थिति पर चुप रहना, मुसीबत में साथ न देना जैसे कई पहलू भी बुरे लग सकते हैं। एक-दूसरे की आलोचना या बुराई करना, अपशब्द कहना, हर बात में कमी निकालना, काम में दखलअंदाजी करना, एक-दूसरे की खिंचाई करना जैसा व्यवहार सात जन्मों तक साथ निभाने वाले पति-पत्नी के रिश्ते में भी खटास ला देता है।
क्या होता है असर-
एक रिश्ते में किसी तरह का धोखा होने, विश्वास टूटने पर कई बार व्यक्ति भूल नहीं पाता। उसके अवचेतन मन में बैठ जाता है। प्रभावित व्यक्ति मानसिक रूप से तनावग्रस्त हो सकता है, किसी बात पर अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता । ज्यादा सोचने से अनिद्रा की समस्या हो सकती है जिसका असर उसके रोजमर्रा के कामों पर भी पड़ सकता है।
आपसी रंजिश को कैसे दूर करें-
अगर किसी कारणवश उनका रिश्ता बिगड़ रहा है, तो रिश्ते को बरकरार रखने और मजबूती के लिए पति-पत्नी को पहले दो पक्षों (मै और तुम) को समझना-परखना जरूरी है। व्यक्ति को दूसरे की कमियां निकालने या उस पर फोकस करने के बजाय खुद को परखना जरूरी है कि कहीं गलती दूसरे की न होकर खुद उसकी हो। ऐसा अहसास होने पर उसे अपने को बदलने, अपने को सुधारनेे की जरूरत है।

दोनों में तनाव, मनोग्रंथियां, हीनभावना या असुरक्षा की भावना जितनी दूर होंगी, उतना ही वे रिश्ते में सुरक्षित और आश्वस्त महसूस करेंगे। अगर एक भी व्यक्ति के दिल-ओ-दिमाग़ में किसी भी तरह का तनाव आ जाता है । तो उनमें आपसी प्यार, समझ नहीं रहती और रिश्ता धीरे-धीरे खत्म होने लगता है।
यह भी संभव हैै कि पति-पत्नी के रिश्ते में एक व्यक्ति जो कर रहा है, वह दूसरे को गलत लग रहा हो। हर इंसान अपने मानसिक स्तर, सोच-समझ, स्थिति और पोजिशन के हिसाब से सब कुछ अच्छा ही कर रहा होता है। कई बार उसे समझ नहीं आता कि वो गलत कर रहा है या सही। जबकि दूसरे व्यक्ति को यह महसूस होता है कि वो उसके साथ गलत कर रहा है।
क्या करें-
संभव हो तो लड़ाई होने की स्थिति में बेहतर है कि लड़ाई से पहले ही किसी एक व्यक्ति को अलग हो जाना चाहिए। अलग होकर उस व्यक्ति के साथ बिताए हुए पांच अच्छे पल या अच्छा वक्त याद करना चाहिए। ऐसा करने पर जरूर समझ आ जाएगा कि दूसरा व्यक्ति इतना बुरा नहीं है। गलतफहमी, परस्पर बातचीत न कर पाने की वजह से ऐसी स्थिति आई। वैज्ञानिक सच्चाई है कि जब हम ऐसा सोचते हैं तो हमारा दिमाग भी शांत हो जाता है, तभी वो समाधान यानी रंजिश भूल कर दोबारा मेल-मिलाप की तरफ बढ़ते हैं।
रिश्ते को मजबूत बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी है कि वे सारी रंजिशें परे रखकर एक-दूसरे के साथ हैल्दी और पाॅजिटिव बातचीत करें । किसी भी हाल में एक-दूसरे से बातचीत बंद नहीं करनी चाहिए। इससे उनके रिश्ते में आगे ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ता है। बहस करने के बजाय पूरे संयम और शांति के साथ दूसरे व्यक्ति को थोड़ी देर बाद बात करने के लिए राज़ी करना चाहिए। अपनी मनःस्थिति के बारे में दूसरे को बताएं। स्पष्ट तौर पर दूसरे को बताएं कि उसकी अमुक बात या रवैया क्यों अच्छा नही लगा। उसे ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि वह उससे आहत हुआ है।
रिश्ते में आई कड़वाहट को दूर करने के लिए पति-पत्नी को इसके पीछे के कारण को समझने की कोशिश करनी चाहिए। अगर एक व्यक्ति दूसरे से पाॅजिटिव बातचीत करना चाहता है, तो यह भी जरूरी है कि दूसरे साथी के दिमाग की खिड़की भी खुली होनी चाहिए। यानी सामने वाला साथी उसे समझे या समझने के लिए तैयार हो। अगर दूसरा व्यक्ति अपना वही रवैया जारी रखता है। दूसरे की भावनाओं की कदर नहीं कर रहा है और उसे नजरअंदाज कर रहा हो-तो यह गलत है। आपसी कलह के मूल कारण को समझे बिना केवल एक-दूसरे दोषारोपण का रवैया अपनाना गलत होगा। इससे बात नहीं बनेगी या कोई हल नहीं निकलेगा। उन्हें इससे बचना चाहिए।
यह भी संभव है कि पति-पत्नी में से एक व्यक्ति चाहते हुए भी अपनी बात और भावनाएं अभिव्यक्त न कर पाता हो। ऐसे में उसे लिखकर या कार्ड के जरिये अपनी बात दूसरे तक पहुंचानी चाहिए। जितनी जल्दी हो सके, अपने मन की बात साझा कर आपसी रंजिशें दूर करके नए सिरे से रिश्ते की शुरूआत करनी चाहिए।

साथ ही ध्यान रखना चाहिए कि भविष्य में किसी भी सूरत में पुरानी बातों को याद न किया जाए। ताकि दूसरे साथी को किसी तरह की शर्मिंदगी महसूस न हो। न चाहते हुए भी उनके बीच नकारात्मक सोच विकसित न हो और रिश्ते में किसी तरह की दरार न पड़े।
लें मदद-
आपसी बातचीत के बावजूद उनके रिश्ते में कोई सुधार नही आ रहा हो। तो जरूरी है कि उन्हें परिवार के किसी बड़े व्यक्ति या अपने साझा दोस्त की मदद लेनी चाहिए ताकि आपसी रंजिश जल्द से जल्द खत्म हो और रिश्ता मजबूत हो ।

तमाम कोशिश करने पर भी अगर पति-पत्नी के रिश्ते में सुधार नहीं हो पा रहा हो तो वे बेझिझक मैरिटल काउंसलिंग का सहारा भी ले सकते हैं। जिसमें रिलेशन में आए शंकाओं को मनोवैज्ञानिक तरीकों से भी दूर किया जाता है। व्यक्ति विशेष के व्यक्तित्व और समस्याओं के हिसाब से कई हीलिंग थेरेपी की जाती है जैसे- एनर्जी हीलिंग थेरेपी, हिपनोथेरेपी, पाॅजिटिव कांउसलिंग, क्रिस्टल, रोज़ पाॅट्स क्रिस्टल, साउंड हीलिंग थेरेपी, काॅगनीटिव बिहेवियर थेरेपी ;सीबीटीद्धए रेशनल इमोटिव बिहेवियर थेरेपी, इमोशनल एम्पावरमेंट टैेक्नीक, नेगेटिव थाॅट्स की काॅड कटिंग । इन थेरेपी की मदद से पति-पत्नी दोनो के बीच लविंग एनर्जी बढ़ती है जिससे उनके दिलोदिमाग में एक-दूसरे के लिए मौजूद कड़वाहट खत्म होती है और रिश्ते को मजबूती मिलती है।
(डाॅ पूजा आनंद शर्मा, मनोवैज्ञानिक और हीलिंग थेरेपिस्ट, विश्वास हीलिंग सेंटर, नई दिल्ली से बातचीत के आधार पर)
