Hindi Poem
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Hindi Poem: चालीस के बाद
स्त्रियां थोड़ी जिद्दी हो जाती है
अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के बाद
थोड़ी बेफिक्र सी हो जाती है
अब थोड़ा समय खुद के
लिए निकालने लगती है
अपने शौक अपनी ख्वाहिश जो दब चुके थे
जिम्मेदारियां के तले..
वह भी अब अपनी भावनाएं व्यक्त करना चाहती हैं
उन्हें वह फिर से जीना चाहती है
40 के बाद स्त्रियां
थोड़ी जिद्दी हो जाती है
अब वह थोड़ा अपनी
मनमर्जी की हो जाती है 😍
बिना पूछे शॉपिंग कर आती है
सखियों संग घूमने निकल जाती है
40 से 60 के बीच हो थोड़ा
खुद के लिए जी लेती है..

फिर मां से सास बनने का

सफ़र शुरू होता है …
फिर बंध जाती है जिम्मेदारियां में
शादी की रस्मों से लेकर
बहु को रसोई सीखाने से लेकर
पर आज के #मॉर्डन जमाने में
बहु को रसोई सीखाने से ज्यादा
खुद को ही रसोई संभालना भी पड़ता है😍
बेटी की ससुराल में कब कौन सा तोहफा देना है…
इन्हीं सोच विचार में फिर डूब जाती है
फिर नाती पोते-पोतियों देखभाल में
अपने को फिर बिसरा देती है
सच में अपने को फिर बिसरा देती है
इसलिए 40 के बाद थोड़ा
जिद्दी होना तो बनता है
थोड़ा अपने लिए भी जीना बनता है