Hindi Poem
Hindi Poem

Hindi Poem: थोड़ा नल खुला रह गया
तो ऐसा बतायेंगी
सारा नल का पानी
ऐसे ही बर्बाद हो जाता है
आज समझ आई
टंकी का पानी खाली
कैसे हो जाता है
मैं तो इतना उपयोग नहीं लाती
पानी बचाने का काम करती
पर तुम से कुछ नहीं होगा
इतने सालों से हमने
तुम्हारी इन्हीं हरकतों से
क्या क्या नहीं होगा
और भइया उनको कितनी भी दो सफाई
पर नहीं ये सुन पाती
न जाने पूरे हमारे खानदान को
क्या क्या कह जाती
एक दिन सब्जी मंडी से आलू की जगह ले आया भटा
तब तक सुनाती रही
जब तक वहां से मैं नहीं हटा
मैं अपने कमरे में चला गया
पर पीछा कहां छोड़ा
पीछे पीछे आकर उस बात को
और न जाने कितनी पुरानी
बातों से जोड़ा
जोड़ते जोड़ते न जाने क्या क्या कह गये
हम जिस हाल में बैठे वैसे ही बैठे रह गये
ऐसी होती है पत्नी
ऐसी होती है पत्नी

जय हो पत्नी जी की