Posted inहिंदी कहानियाँ

श्मशान- गृहलक्ष्मी कहानियां

तीन वर्ष बीत गए। इन तीन वर्षों में दोनों एक-दूसरे के कितने निकट आ गए थे, इस बात का अहसास ही उन्हें उस दिन हुआ, जब ललित के विदेश जाने की बात निश्चित हो गई। बड़े जोश के साथ सारा घर तैयारी में जुट गया।

Posted inहिंदी कहानियाँ

गोलमाल – गृहलक्ष्मी लघुकथा

जनगणना करने वाले अधिकारी एक बस्ती में पहुंचते ही अपनी नाक-भौं सिकोड़ने लगे। तभी उनमें से एक अपने सहकर्मी से बोला- ‘सर, यहां तो अभी से ही सांस लेना दुर्लभ हो रहा है, इस बदबूदार बस्ती के अन्दर तक जाकर आगे का काम कैसे कर पाएगें?’ हथेली की जीवन रेखा पर तम्बाकू रगड़ रहे दूसरे […]

Posted inहिंदी कहानियाँ

वर्चस्व – गृहलक्ष्मी लघुकथा

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नगर की प्रख्यात महिला संगीत अकादमी ने महिला सशक्तिकरण विषय पर नगर की विभिन्न महिला संगठनों की प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया।

Posted inहिंदी कहानियाँ

सौदागर व जिन्न – अलिफ़ लैला की कहानियाँ

एक समय की बात है, एक धनी सौदागर था। वह अक्सर व्यापार करने दूसरे शहरों में जाता था। एक दिन वह लंबी यात्रा पर रवाना हुआ। उसने खजूरों से भरा एक थैला लिया क्योंकि उसे एक ऐसे रेगिस्तान से गुजरना था, जहां खाने के लिए आसानी से कुछ नहीं मिलता था। वह तीन दिन के लंबे सफर के बाद चौथे दिन ऐसी जगह पहुंचा, जहां रेगिस्तान में कुछ पानी था और खजूर व ताड़ के पेड़ दिख रहे थे। वह काफी भूखा व थका हुआ था। उसने पेड़ के नीचे सुस्ताने का मन बनाया।

Posted inहिंदी कहानियाँ

नासमझ – गृहलक्ष्मी लघुकथा

डॉ. के क्लीनिक में बहुत भीड़ थी। अचानक सिस्टर ने देखा एक वृद्ध व्यक्ति कांप भी रहा है और हाँफ भी रहा है। वह उसे पहले डॉ. के पास ले गई। डॉ. ने उसकी जांच की तो पाया रोगी का रक्तचाप 300 के आस-पास है। डॉ. बहुत चकित हुआ और उसने उसके साथ आए बेटे से पूछा ‘पिछली बार कब आपने इनके रक्तचाप की जांच कराई थी।’

Posted inहिंदी कहानियाँ

चश्मे – गृहलक्ष्मी कहानियां

बरामदे के दरवाजे के आखिरी ताले को झटका देकर जब मिसेज वर्मा आश्वस्त हुई, तो भीतर ड्राइंग-रूम की घड़ी ने साढ़े ग्यारह बजे का एक घंटा बजाया। बीच में रखी हुई ड्रेसिंग टेबल से उन्होंने दूध का गिलास उठाया तो काली-सी परछाई शीशे में उस समय तक दिखाई देती रही, जब तक वे बरामदे की आखिरी सीढी उतरीं।

Posted inहिंदी कहानियाँ

प्रेम-प्यार- गृहलक्ष्मी लघुकथा

सर्दियों की अलशाम दो जोड़े पाँव समुद्र किनारे रेत पर दौड़े जा रहे थे। लड़की आगे थी और पीछे भाग रहा लड़का उसे पकड़ने का प्रयास कर रहा था।

Posted inहिंदी कहानियाँ

वापसी – गृहलक्ष्मी की कहानियां

रात के 10:00 बज चुके थे ।सड़क छोड़कर रमेश धीरे धीरे पुल की तरफ बढ़ रहा था। सामने पुल नजर आ रहा था। रमेश ने एक बार जी भर कर उस सड़क को देखा, कितनी यादें जुड़ी हैं इस सड़क के साथ। इस सड़क के इस पार कुछ ही दूर पर तो उसका घर था और दूसरी ओर स्कूल ।हालांकि स्कूल भी थोड़ा दूर ही था, लेकिन उस की बिल्डिंग इतनी बड़ी थी, कि दूर से ही नजर आती थी।

Posted inहिंदी कहानियाँ

स्लो प्वाईजन – गृहलक्ष्मी लघुकथा

अस्सी वर्षीय शन्नो देवी चुपचाप अपने कमरे में लेटी लगातार छत पर लगे पंखे को घूर रही है। उसके अंदर, बाहर सब ओर एक सन्नाटा है। कहने को उसके साथ बेटे, बहू, पोते पोतियों का भरा पूरा परिवार है। पति की मृत्यु के पश्चात और अस्वस्थता के कारण उसका बाहर आना-जाना और सखी सहेलियों से मिलना सब बंद हो गया है।

Posted inहिंदी कहानियाँ

रानी माँ का चबूतरा – गृहलक्ष्मी कहानियां

आज रात को जब चबूतरे पर बैठक लगी तो औरतों की चर्चा का विषय पूर्णिमा को होनेवाला आयोजन था। कौन क्या पहनेगी, पूजा की थाली में क्या ले जाएगी, क्या मनौती मानेगी आदि बातों पर चर्चा हो रही थी कि रामी अपनी छोटी बहिन धन्नी को लेकर पहुँची। बूढ़े काका ने अपनी चिलम दूसरे के हाथ में थमाते हुए कहा, ‘बड़ी देर कर दी रामी। शायद बहिन की खातिर में लगी थी।’

Gift this article