मन तो एक बच्चा है, इसको जैसा माहौल मिलेगा, ये वैसे ही ढ़ल जाएगा। इसको सुदृढ़ करना और इसको खुश रखना हमारे अपने हाथों में हैं। कई बार दूसरों के जीवन में इस कदर उलझ कर रह जाते हैं कि अपना जीवन बेमानी लगने लगता है। दरअसल, आज के इस दौर में हम खुद पर नियंत्रण रखने की बजाय दूसरों को नियंत्रित करने की चाह रखते हैं। मन हर वक्त इसी कोशिश में जुटा रहता है कि सामने वाले को कैसे काबू में किया जाए, ताकि वो हमारे हिसाब से व्यवहार करने लगे। मगर ऐसी सोच रखने वाले लोग खुद भी खुश नहीं रह पाते हैं और हर वक्त एक अजीब सी उधेड़बुन में लगे रहते हैं
