सुबह की खिलती धूप चारों तरफ फैली हुई थी। गायत्री खिड़की के पास खामोश बैठी शून्य में कुछ निहार रही थी। तभी उसकी निगाहें सड़क पार गिफ्ट हाउस में आते-जाते ग्राहकों पर पड़ी। गायत्री जब भी डिप्रेशन में होती तो सामने वाली शाॅप की तरफ देखती और सोचती कि इसमें आने-जाने वाले लोग किसी-न-किसी के लिए कोई उपहार खरीद रहे हैं और तब उसे लगता है कि दुनिया में आज भी प्यार भरा हुआ है।
Tag: हिंदी कहानियाँ
कलूटी – गृहलक्ष्मी कहानियां
एक रेलवे प्लेटफार्म जिसमें दूर-दूर तक सिर्फ खामोश दूरियों का अहसास करातीं पटरियां थीं और दिन भर उस सन्नाटे को तोड़ती रेलगाड़ियों की छक-छक की तेज आवाज। दिन भर में उस प्लेटफार्म में कई घण्टों के अंतराल पर मात्र तीन या चार गाड़ियां रुकती थीं, दूसरी सभी सीधी निकल जातीं।
घिसटती जिन्दगी – गृहलक्ष्मी कहानियां
गर्मी, सर्दी और बरसात हमेशा उसी रूप में आते रहे जैसे सदियों से चले आ रहे थे मगर सालों से उस औरत की दशा में दिन-प्रतिदिन आए बदलाव को देखकर मैं हैरान रही। हर तीन माह में उसका पागलपन पहले की अपेक्षा कुछ ज्यादा ही बढ़ जाता मगर यह कैसा पागलपन था जो सिर्फ तभी दिखाई पड़ता था जब उसके घर में कोई पर्व या उत्सव होता या फिर आसपास के किसी घर में खुशियों का माहौल होता।
भरवां बैंगन का साहित्य में योगदान – गृहलक्ष्मी कहानियां
अपने यहां व्यंजन साहित्य की बड़ी मांग है और इसमें स्कोप भी बहुत हैं। भरवां बैंगन में किशमिश, काजू और बादाम डाल दो तो शाही भरवां बैंगन हो जाएगा, यानी कि इसी बैंगन से ढ़ाई सौ और बन जाएंगे।
अगले जन्म मोहे बेटी ही कीजो – गृहलक्ष्मी कहानियां
भला हो सरकार का, सस्ते होने के कारण घर की रजिस्ट्री मेरे नाम, बिजली का मीटर मेरे नाम, बैंक ने गाड़ी के लिए कर्ज दिया तो गाड़ी मेरे नाम।
दादी की दीदीनुमा हसरत और हरकत – गृहलक्ष्मी कहानियां
पड़ोस वाले घर की दादीजी आजकल नेताओं के मिजाज की मानिंद बदली-बदली सी नजर आ रही हैं। यूं तो जब से उन्हें जाना है, उम्र से दस वर्ष पीछे मगर समय से दस साल आगे की वेशभूषा में नजर आती रही हैं। अभी पिछले ही हफ्ते की बात है। वे गोपगप्पे वाले को अपने दरवाजे […]
अमूल्य योग्यता – गृहलक्ष्मी कहानियां
वाराणसी, औरंगाबाद की दस वर्षीय वैष्णवी की कलम से लिखी इस कहानी में हर उम्र के लोगों के लिए एक सीख छुपी है, पढ़िए-
दो चिडिय़ा – गृहलक्ष्मी कहानियां
इस स्तंभ के अंतर्गत 12 वर्ष तक की उम्र के बच्चे अपनी कोई भी कविता, कहानी, पेंटिंग व बचपन की रचनात्मक फोटो या अपने मन की कोई और बात अभिव्यक्त करना चाहते हैं तो हमें लिख भेजें, नाम, उम्र, पता व फोटो के साथ। आपकी कृति कहीं से नकल की गई ना हो, इस बात का खास ख्याल रखें। चुनी गई तीन प्रविष्ठियों को मिलेगा आकर्षक उपहार।
बस, अब और नहीं – गृहलक्ष्मी कहानियां
नटखट और चुलबुली तश्शू कैसे एक राजनेता बनी और कैसे उसने निर्णय लिया अपने पति से अलग होने का… पेश है, भावनाओं के सूत्र में पिरोई गई एक विशेष कहानी।
अथ पति व्यथा कथा – गृहलक्ष्मी कहानियां
पति के दुखों को देखकर तो कई बार पहाड़ तक रोने लगते हैं। पति अगर साधारण बना रहे तो बीबी का नौकर लगता है और बनने ठनने लगे तो पत्नी उस पर शक करने लगती है।
