सावन आया हरियाली लाई,बगिया-बगिया खुशबू छाई।पीपल की शाखों पर झूले,सखियाँ संग हँसी में झूले। काजल-बिंदी, चूड़ी-कंगन,हर नारी में रंग ही रंगन।मेंहदी रचती गहरी बातें,साजन मन की सुनती रातें। घूँघट में वो शर्मीली नजरें,मन में छिपी हसरतें ग़ज़ब हैं।मौसम गाए प्रेम तराने,दिल में जागे नये फ़साने। भोर से ही शुरू तैयारी,व्रत की रस्में, पूजन सारी।शिव-पार्वती को […]
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नारीत्व-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: पौधों में पानी देतींकभी फुलों को सहलातीघर आंगन सुसज्जित करतींदिपक की लौ जलातीकभी फ्रिजतो कभीकूलर के पास होतींआखिर ढूढंती क्या रहतींघर तेरा अधिकार तेराफिर उपेक्षित क्यों रहतीं बातें बड़ा अनोखा साकौन सा रहस्य आखिर थाघर आंगनखुद पे खड़े- खड़ेंबड़े दिनों बाद खिलखिलाएं थेघर के आंगन में खडी़निर्दोष सीढ़ी तब बोलींजमीन और छत को […]
वो गुलाल प्रियतम का-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: गुलाल सा वो रंगाजब गालो को,आत्मा तक रंग गया,मेरे प्यासे अधरों का सावन ,वो छलिया फागुन में बन गया ।निखर गई मैं,बिखर गई मैं,कैसे अब संभालूं खुद को,जबसे उसका चढ़ा गुलाल,एक नशा सा चढ़ गया।देख रही कभी उसको मै,कभी गालों पर गुलाल देखती हूं,छूटे से कभी छूटे ना,ऐसे रंग मे मुझको ,वो सांवरिया […]
