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इंसानियत की खातिर – गृहलक्ष्मी कहानियां

प्लीज मेरी मदद कीजिये भगवान के लिए, प्लीज इंसानियत की खातिर तो मदद कीजिये। कृपा करके आप जाइए, कह कर फटाक की आवाज के साथ दरवाजा बंद हो गया। पाठक जी खोलिए न दरवाजा, क्या करें, कोई हमारी मदद करने को तैयार नहीं है, फिर मिश्रा अंकल आपने तो सब कुछ देखा है कि हमारी बेटी के साथ क्या किया उन लोगों ने, पूरे मोहल्ले वालों ने देखा है, फिर भी कोई मदद के लिए तैयार नहीं है।

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आखिर कभी कहीं तो रुके बलात्कारियों की यह लिस्ट

कभी एकल बलात्कार तो कभी सामूहिक। कभी सड़क चलते तो कभी बस में, कभी चलती कार में तो कभी थाने में। कभी अड़ोस-पड़ोस के चाचा-भैया का दिल डोल जाता है तो कभी अपने ही फिसल जाते हैं।

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शरीर के साथ भावनाओं का भी बलात्कार- मैरिटल रेप

सहमति के बिना पत्नी से बनाया गया जबरन शारीरिक संबंध भी बलात्कार की श्रेणी में आता है। चुप्पी साधे हमारे समाज में मैरिटेल रेप की शिकार महिलाओं की संख्या भी कम नहीं है…

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