‘क्यों बे! बाप का माल समझ कर मिला रहा है क्या?’ गिट्टी में डामर मिलाने वाले लड़के के गाल पर थप्पड़ मारते हुए ठेकेदार चीखा।
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जिजीविषा – गृहलक्ष्मी लघुकथा
‘क्या देख रही हो, माला?’
‘यह कोई नयी बेल है। अपने आप उग आयी है और देखो कितनी जल्दी-जल्दी बढ़ रही है।’
‘अरे, वह तो जंगली है। उखाड़ फेंको उसे।’
गर्माहट – गृहलक्ष्मी लघुकथा
बैठक खाने में बैठकर खाने का मेन्यु बनाने से खाना नहीं बनता, खाना बनाने के लिए तो रसोई घर में काम करना पड़ता है, बुझे बुझे मन से रश्मि बैठक खाने से पास हुये मेन्यु पर जुट गई। उसके लिए तो यह रोज का ही था। ठंड है ठंड है कहकर, सारी ननदे रजाई में या धूप सेकने बैठ जातीं। और वही से खाने में क्या क्या बनेगा डिसाईड करतीं। शाम शुरू होते.
मोक्ष – गृहलक्ष्मी लघुकथा
21.09.2017 आज न जाने ऐसा क्या हुआ जब से उसे पढ़ाने बैठा तो पढ़ाने में मन नहीं लग रहा था। हर क्षण यही मन होता उसके रूप-सौंदर्य का पान करता रहूँ… मेरी यह स्थिति देखकर उसने मुझे टोका, – ‘सर! लगता है आज आपका मूड ठीक नहीं है… तो आज छोड़ दीजिए..,’
सोने के अंडे देने वाली हंसिनी – ईसप की प्रेरक कहानियाँ
एक किसान के खेत के पास ही एक हंसिनी भी रहती थी। एक बार वह किसान घूमता-घूमता हंसिनी का घोंसला देखने गया, तो उसे वहाँ एक अंडा दिखाई दिया, पर वह कोई मामूली अंडा न होकर सोने का था। यह देखकर किसान की खुशी का ठिकाना न रहा। अब तो किसान अक्सर उस हंसिनी के […]
झगड़ा गधे की छाया का – ईसप की रोचक कहानियाँ
एक बार की बात है, एथेंस में एक युवक ने कहीं जाने के लिए एक गधा किराए पर लिया। गधे का मालिक भी साथ-साथ गया। उस दिन बड़ी भीषण गरमी थी। युवक ने सोचा, थोड़ी देर गधे की छाया में लेटकर आराम करना चाहिए। उसने चादर बिछाई और जमीन पर जहाँ गधे की छाया पड़ […]
न्यू इयर गिफ्ट – गृहलक्ष्मी लघुकथा
‘सॉरी! मेडम! इस शर्ट का एक ही पीस है और ये पीस इन मेडम ने पसंद कर लिया।’
‘ओह! वैसे जो भी है बेटर च्वाइस।’
जब पहियों ने मचाया शोर: ईसप की मनोरंजक कहानियाँ
एक बार एक आदमी बैलगाड़ी में बहुत सारा सामान लादकर ले जा रहा था। जब-जब उसकी बैलगाड़ी के पहिए किसी गड्ढे या दलदल में फँसते, तो वे बड़े जोर की आवाज करने लगते। गाड़ीवान बड़ी देर से यह देख रहा था।आखिर उससे रहा न गया। उसने उन पहियों को फटकारते हुए कहा, “अरे, तुम इतनी […]
कब तक? – गृहलक्ष्मी लघुकथा
उसकी सूनी नज़रें कोने में लगे जाले पर टिकी हुई थीं। तभी एक कीट उस जाले की ओर बढ़ता नज़र आया। वह ध्यान से उसे घूरे जा रही थी।
जादुई चिराग – गृहलक्ष्मी लघुकथा
पिछले कई वर्षो से रत्ना और राजेश की तू-तू, मैं-मैं पर अचानक विराम लग गया आये दिन विवाद, राजेश को रत्ना से कुछ न कुछ शिकायत रहती ही थी जिनकी परस्पर आंख-आंख नही बनती वे अब हाथो में हाथ डाले घूमते नजर आ रहे थे।
