‘मेरी बिटिया को कोई दिक्कत होगी ही नहीं…उसके होने वाले पति अकेले हैं, उनका और कोई भाई-बहन है ही नहीं। परेशानी तो कोई है ही नहीं। सबकुछ उसी का तो है।’ मिसेज गुप्ता ने अपनी बेटी की शादी अभी तय की है और उनके होने वाले दामाद अपने माता-पिता की अकेली संतान हैं। इस एक बात की खुशी मिसेज गुप्ता को बहुत है, ये अच्छी बात है। लेकिन उन्हें ये नहीं पता है कि अकेली संतान होने के फायदे हैं तो नुकसान भी भरपूर हैं। इन नुकसानों से बच कर रहने के लिए जरूरी है कि इनके बारे में पता सबकुछ हो। आपको इन्हीं नुकसानों से रूबरू कराने के लिए हम ले आएं हैं कुछ टिप्स, एकलौती संतान से शादी करने वाली हैं तो ये टिप्स आपके लिए ही हैं-

शेयरिंग की आदत– 

एकलौती संतान के साथ एक बात खास होती हैं, उसको शेयरिंग की आदत से कोई वास्ता नहीं होता है। उसे कभी कोई चीज किसी से भी शेयर ही नहीं करनी पड़ी तो फिर इस आदत से वास्ता होता भी कैसे? लेकिन आपको उनकी ये आदत तब ही पता चलेगी, जब आप साथ रहना शुरू करेंगी। फिर हो सकता है कि आपको लगे कि आपके पति तो कभी कोई चीज शेयर करने के बारे में सोचते ही नहीं हैं। जैसे हो सकता है कि वो आपको उनकी अलमारी ही न साझा करने दें। या हो सकता है कि वो बाहर से कुछ खाने के लिए लाएं और खुद ही सब खा लें, आपको पूछें ही न। ये आदत सिर्फ साथ रहते हुए ही आपको पता चलेगी। इसके लिए आपको तैयार रहना होगा और प्यार से इस आदत के नुकसानों से अपने पति को रूबरू कराना होगा। वो जरूर ये बात समझेंगे। 

इंडिपेंडेंट हैं वो

जो बच्चे अकेली संतान होते हैं, वो बहुत बार अपने काम खुद करने के लिए बिलकुल तैयार होते हैं, क्योंकि उनकी मदद करने के लिए कोई भाई-बहन होता ही नहीं है। उनका ख्याल रखने के लिए आपको कोई खास तैयारी करने की जरूरत नहीं होती है। लेकिन मामला ठीक इसके उलट भी हो सकता है। क्योंकि वो अकेले थे इसलिए इतने लाड़-प्यार से पाले गए कि कभी कुछ करना ही नहीं पड़ा। अब ऐसे में हो सकता है आपको पूरा घर मैनेज करना कठिन हो जाए। आप भी ऑफिस जाती हैं तो पति की ये आदत आपको कुछ ज्यादा ही परेशान कर सकती है। क्योंकि हो सकता है सुबह घर के काम निपटाने और ऑफिस के लिए निकलने की कोशिशों में आप खुद को अकेला पाएं। 

हर चीज में पेरेंट्स

अकेली संतान की एक और आदत होती है, वो अपने माता-पिता से कुछ ज्यादा ही जुड़े होते हैं। ये जुड़ाव कुछ ऐसा होता है कि वो छोटे से छोटा काम भी पेरेंट्स से पूछ कर ही करते हैं। ये पूछना जांचना कई बार आपको परेशान कर सकता है। क्योंकि जोड़े के तौर पर निर्णय लेने की जब भी बारी आएगी तो आप खुद को पति के पेरेंट्स पर निर्भर पाएंगी। आपके पति हर निर्णय से पहले अपने पेरेंट्स की तरफ ही देखेंग। भले ही जोड़े के तौर पर आपका वो निर्णय बहुत व्यक्तिगत हो। अब ऐसे में आपको बार-बार सास-ससुर की ओर देखना खराब लग सकता है। 

बड़ा परिवार चाहिए

एकलौती संतान होने की वजह से अक्सर ही ऐसे बच्चे खुद को अकेला महसूस करते हैं। फिर यही बच्चे जब अपना परिवार होता है तो कई बार बड़ा परिवार होने की कामना करते है। उन्हें लगता है कि वो हमेशा अकेले रहें हैं तो फिर उनके बच्चे को अकेला ना रहना पड़े। इसलिए अगर आपकी हमेशा से एक ही बच्चे की चाहत रही है तो इस चाहत को हो सकता है कि बदलना पड़ जाए। आपकी परिवार को लेकर अपेक्षाएं बदलनी पड़ सकती हैं। 

अटेंशन चाहिए उनको

अकेले बच्चों के साथ बचपन से ही एक प्रेक्टिस की जाती है, वो घर के हर काम का ‘सेंटर ऑफ अट्रेक्शन’ होते हैं। उनके हिसाब से चीजें होती हैं, उनके लिए चीजें होती हैं। कुल मिलाकर उन्हें खूब स्पेशल फील कराया जाता है। इतना कि उनकी स्पेशल फ़ील करने और अटेंशन की आदत पड़ जाती है। अब यही सब वो आपके साथ भी अपेक्षा करेंगे। वो आपके मायके जाएंगे, आपके दोस्तों से मिलेंगे, हर बार उन्हें अहमियत चाहिए होगी। आपको इसके लिए तैयार रहना होगा। हर बार उनको अहमियत और अटेंशन दे पाना आपके लिए भी मुश्किल होगा लेकिन ये एकलौती संतान यानि आपके पति के लिए आपको ये सब करना ही होगा। लेकिन आपको कई बार ये कठिन भी लग सकता है, इस वक्त पति से सामने से स्पष्ट बाट करने से ही बात बनेगी। 

उनकी अपनी जगह

एकलौती संतान होते हुए आपके पति कई मौकों पर अकेले रहे होंगे। यकीन मानिए उनको अब इस चीज की आदत लग गई होगी। उनको जब चाहें तब अपनी स्पेस चाहिए ही होगी। मतलब उनको ऐसी लाइफ की चाहत रहेगी, जहां उन्हें कोई टोके न, रोके न। हो सकता है आप शुरू-शुरू में उनके हिसाब से रह लें लेकिन हर बार अपने पार्टनर को उनकी स्पेस में छोड़ देना आपके लिए आसान बिलकुल नहीं होगा। आपको उनके हिसाब से हमेशा रहना कई बार कठिन भी लग सकता है। यहां स्पेस से मतलब पति की इच्छानुसार उन्हें अकेला छोड़ने और टोका टाकी ना करने से है। 

अकेले जिम्मेदार

बचपन से लेकर आजतक या आगे के जीवन में भी। एकलौते बच्चों के साथ होता ये है कि वो अकेले ही माता-पिता या और दूसरी चीजों के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसलिए आगे जब भी कभी उनके पेरेंट्स किसी दिक्कत में होंगे, हर बार वो अकेले ही इसकी ज़िम्मेदारी लेंगे और तनाव भी। एकलौते बच्चों  को कह सकते हैं ये तनाव झेलने की आदत हो जाती है। 

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