Married Life and Parents
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शादीशुदा बच्चों के साथ माता-पिता का सकारात्मक व्यवहार लाएगा रिश्तों में नयापन

कई बार माता-पिता अपने शादीशुदा बच्चों की जिंदगी में जरूरत से ज्यादा रोक-टोक करने लगते हैं।

Married Life and Parents: भारतीय संस्कृति में परिवार के लोगों का रिश्ता भावनाओं, जुड़ाव और जिम्मेदारियों से भरा होता है। माता-पिता अपने बच्चों के जीवन का हर पहलू जानना चाहते हैं,चाहे वो पढ़ाई हो, करियर या फिर शादी। लेकिन जब बच्चे शादी कर लेते हैं, तो उनकी ज़िंदगी में जीवनसाथी के साथ एक नया रिश्ता जुड़ जाता है। यह रिश्ता बेहद नाज़ुक होता है, इसलिए इसमें सामंजस्य, विश्वास और आपसी समझ सबसे ज़्यादा मायने रखती है। बच्चे चाहे जितने भी बड़े हो जाए, यहां तक की शादी के बाद भी माता-पिता कई बार उनसे वैसे ही पेश आते हैं जैसे शादी से पहले आते थे। लेकिन ऐसा करते हुए कई बार माता-पिता अपने शादीशुदा बच्चों की जिंदगी में जरूरत से ज्यादा रोक-टोक करने लगते हैं। अब ये हस्तक्षेप भावनात्मक रूप में हो या व्यवहारिक रूप में। उनका इरादा बेशक गलत नहीं होता है। माता-पिता नहीं समझ पाते हैं उनका ऐसा स्वभाव अनजाने में ही बच्चों के वैवाहिक जीवन में तनाव लाने लगता है।

आइए समझते हैं कि अगर माता-पिता अपने शादीशुदा बच्चों को थोड़ा ‘स्पेस’ दें, तो उनके रिश्तों में कैसे सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं।

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Happy moments

हर पति-पत्नी को एक-दूसरे के साथ समय बिताने और हर तरह के फैसले लेने की स्वतंत्रता होती है, तो ऐसे में बच्चे अपने रिश्ते खुद सँभालना सीख जाते हैं। यह परिपक्वता तब आती है जब उन दोनों के अलावा कोई और उनके किसी भी फैसले में रोक-टोक नहीं करता है। माता-पिता हर बात में राय न दें, तो बच्चे खुद अपने फैसले लेना जल्दी सीखते हैं।

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे उनसे जुड़े रहें। लेकिन बार-बार टोकने या दखल देने से बच्चे परेशां रहने लगते हैं और इसका उल्टा ही असर होता है। शादीशुदा बच्चे ऐसे माहौल में धीरे-धीरे अपने माता-पिता से भावनात्मक रूप से दूर होने लगते हैं। जब माता-पिता उन्हें खुलकर जीने और अपने जीवन को अपने तरीके से सँवारने की बात समझाएंगे , तो वे ज्यादा प्यार और सम्मान के साथ माता-पिता से जुड़े रहते हैं।

अक्सर देखने में आता है कि जब माता-पिता अपने बेटे या बेटी की शादी के बाद भी हर बात में दखल देते हैं, तो बहू या दामाद को यह बात बहुत परेशान करने लगती है। ऐसा करने की जगह अगर सास-ससुर या माता-पिता एक उचित और सम्मानजनक दूरी बनाए रखें, तो नए सदस्य को परिवार में आसानी से घुलने-मिलने का मौका मिलता है और आपसी रिश्ते मजबूत होते हैं।

जब माता-पिता अपने शादीशुदा बच्चों को फैसले लेने की छूट देते हैं, तो उनमें आत्मनिर्भरता बढ़ती है। वे अपने जीवनसाथी के साथ मिलकर निर्णय लेना सीखते हैं, समस्याओं को खुद सुलझाना सीखते हैं। यह आत्मनिर्भरता उनके रिश्ते को और भी मजबूत बनाती है।

sweetness in relationship
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स्पेस देने का मतलब यह नहीं कि आप अपने बच्चों की परवाह नहीं कर रहे हैं। इसका अर्थ सिर्फ इतना है कि आप उनके व्यक्तिगत जीवन में उनका सम्मान कर रहें हैं। जब बच्चे यह महसूस करते हैं कि माता-पिता उन पर भरोसा करते हैं और उन्हें अपनी जिंदगी जीने की आज़ादी दे रहे हैं, तो वे रिश्तों पर और भी ज्यादा भरोसा करने लगते हैं।

अक्सर देखा जाता है कि शादी के बाद बच्चों और माता-पिता के बीच छोटी-छोटी बातों पर मतभेद बढ़ जाता है। माता-पिता के हस्तक्षेप से कई बार छोटी-छोटी बातें झगड़े में बदल जाती हैं। अगर माता-पिता थोड़ा पीछे हट जाएँ और बच्चों को खुद के फैसले लेने दें, तो बहुत से मतभेद आपस में ही सुलझ जाते हैं। इससे घर में शांति बनी रहती है।

उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली तरूणा ने 2020 में यूट्यूब चैनल के ज़रिए अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद इंडिया टीवी के लिए आर्टिकल्स लिखे और नीलेश मिश्रा की वेबसाइट पर कहानियाँ प्रकाशित हुईं। वर्तमान में देश की अग्रणी महिला पत्रिका...