मैं एक लड़के से प्यार करती थी और उससे शादी कर ली। यह एक अरेंज मैरिज थी हालांकि हम एक-दूसरे को जानते थे और शादी होने से पहले ही प्यार हो गया। मैं अपनी सास की राजनीति को नहीं समझती थी। जब से मैं इस घर में आयी हूं, मैंने अपनी सास का बहुत ही दबंग व्यक्तित्व पाया है। वह चाहती है कि सब कुछ ठीक उसी तरह से हो जैसा वह चाहती है। अगर मैं किसी भी चीज में कोई बदलाव लाने की कोशिश करती हूं, तो वह मुझ पर चिल्लाती है और मुझे डांटती है। जब मैं अपने पति के सामने इस मुद्दे पर चर्चा करती हूं, तो वह अपने बयानों को पूरी तरह से बदल देती है। क्योंकि वह ऐसा करती है, मैं अपने पति के सामने अपनी बात साबित नहीं कर पा रही हूं।मैं चाहती हूं कि मेरे पति उस तरह के व्यक्तित्व को देखें जैसी मां वास्तव में है। उन्होंने कभी भी परिवार के साथ ज्यादा समय नहीं बिताया है, इसलिए उन्हें यह महसूस नहीं होता है कि वह घर पर कैसे व्यवहार करती हैं।

मेरे कई रिश्तेदार उनको जानते थे या उनसे कई बार मिल चुके थे। शादी होने के बाद भी, इन सभी रिश्तेदारों ने कहा, “तुम्हारी सास बहुत चालाक है। वह बहुत हावी रहेगी ” लेकिन क्योंकि मैं अपने पति से प्यार करती थी इसलिए मैंने कभी किसी पर विश्वास नहीं किया। लेकिन एक साल से अधिक समय तक उसके साथ रहने के बाद मैंने उनको ध्यान से देखा है।हर नौकर ने या किसी अन्य ने मुझे उसके बारे में बहुत कुछ नकारात्मक बातें कही हैं। वह हमेशा शिकायत करती है कि मेरे परिवार ने शादी में कोई उपहार नहीं दिया है। जब वह यह कहती है, तो मैं उनको  समझाती भी हूं और बताती हूं। 

तब वह बहुत गुस्सा हो जाती है और मुझसे अहंकार से बात करना शुरू कर देती है। मेरे पति कभी भी मुझ पर विश्वास नहीं करते और सोचते हैं कि उनकी माँ कभी ऐसी बातें नहीं कह सकती। अब, जब भी वह कुछ कहती है, तो मैं अपने पति को बताने के बजाय उन बातों को अपने पति के सामने लाने की कोशिश करती हूं लेकिन वह हर बार कोई न कोई पॉलिटिक्स खेलकर बच जाती हैं।

यूं तो हर शख्स के शौक अलग-अलग होते हैं। पर, अक्सर सासों के शौकों में एक समानता नजर आती है। वह है घर के शतरंज में अपने हिसाब से मोहरे बिछाना और उन्हें चलाना। अक्सर जाने-अनजाने ऐसा होता है क्यूंकि बहु के आने के बाद मामला सत्ता और सिंघासन पर केंद्रित हो जाता है। सास को लगता है कि कहीं सत्ता उसके हाथों से सरक न जाए। अपने इस नजरिए के चलते कई बार वह अंग्रेजों की नीति अपना बैठती है। फूट डालो और राज करो। ऐसी परिस्थिति में वह परिणाम की चिंता किए बिना सिर्फ और सिर्फ कर्म करती है। 

सास को जब-जब यह महसूस होता है कि घर में बहू के चलते उसके वट में हृास हो रहा है वह उसे बचाने के लिए साम, दाम, दंड, भेद सब कुछ आजमाती है। वह बहू को सबकी नजर में गलत साबित करने की भरपूर कोशिश करती है। ऐसा करते वक्त वह दोहरे चरित्र में जीती हैं। बहू के सामने वह उसकी भली बनी रहती हैं और पीठ घूमते ही वह बहू की कमियां निकालने में पीछे नहीं रहती। ऐसे में कई बार बहुए सासू मां की चाशनी में लिपटी बातों में आ जाती हैं और खुद का ही नुकसान कर जाती हैं। अक्सर सासे बहू को अपने काबू में रखने के लिए उसके पति को भी उसके खिलाफ भडक़ाती। फिर चाहे पति-पत्नी के बीच मसला कितना भी गम्भीर क्यूं न हो जाए। 

उपाय यूं निकालें 

जब आपके घर में राजनीति की बिसात बिछाई जा रही हो तो सबसे पहले आपको इस बात का ख्याल रखना है कि वह घर आपका है। किसी भी प्रकार की राजनीति घर के माहौल को गंदा कर देगी। ऐसे में जरूरी हो जाता  है कि आप अपनी आंख और कान खुले रखें। आपके लिए बेहतर यही होगा कि आप अपनी जुबान बंद रखें। तुरत-फुरत सूत समेत सास को लौटाने वाली सोच से बचना ही रामबाण है। टिट फॉर टेट के चक्कर में घर का माहौल खराब न करें। यहां याद रखिए न सिर्फ आपको सास के पैतरों से बचना है बल्कि घर के बाकी सदस्यों की नजर में खुद को सही साबित करना है। मुमकिन हो तो समय-समय पर जुगत लगाकर अप्रत्यक्ष तरीके से सास की असली सूरत घर के बाकी सदस्यों के लाती रहिए। और खुद के प्रयासों को भी गुप्त न रखिए। सभी को मालूम होना चाहिए कि आपने घर की बेहतरी की दिशा में कितने प्रयास किए हैं। ऐसा करने से आप घर में अपनी स्थिति बेहतर बनाए रखने में सफल रहेंगी।

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