couple partnership patterns
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एक शोध ने यह साबित कर दिया है कि लोग अपने पार्टनर को सिर्फ लुक्स या आदतों से नहीं, बल्कि मानसिक स्थिति के आधार पर भी चुनते हैं।

Couple Partnership Patterns: जब हम कहते हैं कि प्यार दिल से होता है तो इसमें दिमाग की भी बड़ी भूमिका होती है। एक शोध ने यह साबित कर दिया है कि लोग अपने पार्टनर को सिर्फ लुक्स या आदतों से नहीं, बल्कि मानसिक स्थिति के आधार पर भी चुनते हैं। क्या है दिल से लेकर दिमाग तक का ये कनेक्शन, आइए समझते हैं।

डेढ़ करोड़ लोगों पर किया शोध

लॉरिएट इंस्टीट्यूट फॉर ब्रेन रिसर्च की ओर से किए गए एक शोध में हैरान करने वाली बातें सामने आई हैं।
Surprising things have come to light in a research conducted by the Laureate Institute for Brain Research. Credit: Istock

अमेरिका के लॉरिएट इंस्टीट्यूट फॉर ब्रेन रिसर्च की ओर से किए गए एक शोध में हैरान करने वाली बातें सामने आई हैं। शोध में 1.5 करोड़ से ज्यादा लोगों के आंकड़ों को शामिल किया गया। शोध में पाया गया कि जिन लोगों को किसी तरह का मानसिक स्वास्थ्य विकार होता है, वे अक्सर ऐसे ही मानसिक स्थिति वाले पार्टनर की तरफ आकर्षित होते हैं।

9 मानसिक स्थितियां की शामिल

इस रिसर्च में डिप्रेशन, एंग्जायटी, ऑटिज्म, एडीएचडी, बाइपोलर डिसऑर्डर, ओसीडी, स्किजोफ्रेनिया और मादक द्रव्यों के सेवन जैसी 9 मानसिक स्थितियों को शामिल किया गया। ताइवान, डेनमार्क और स्वीडन जैसे देशों से जुड़े 14.8 मिलियन शादीशुदा जोड़ों के डेटा का विश्लेषण किया गया। रिसर्च के मुताबिक लोगों के बीच ये समान मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां सिर्फ संयोग नहीं है। बल्कि एक आकर्षण की प्रवृत्ति है। यानी यदि किसी व्यक्ति को डिप्रेशन है तो वो अनजाने में उसी तरह की मानसिक स्थिति वाले पार्टनर की तरफ ज्यादा खिंचाव महसूस करता है।

आनुवंशिक असर भी आया नजर

रिसर्च में सामने आया कि जब दोनों माता-पिता एक जैसी मानसिक समस्या से जूझते हैं, तो उनके बच्चों में भी वही समस्या दोगुनी से ज्यादा होने की आशंका रहती है। खासतौर पर यह पैटर्न स्किजोफ्रेनिया, डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर और मादक पदार्थों की लत वाले जोड़ों में ज्यादा देखा गया। इन बीमारियों में आनुवंशिक कारण अहम भूमिका निभाते हैं। शोध के लेखक प्रोफेसर चुन चीह फैन का कहना है कि यह पैटर्न लगभग हर देश, संस्कृति और पीढ़ियों में एक जैसा ही है।

ये तीन हैं प्रमुख कारण

शोधकर्ताओं ने ऐसी स्थिति के तीन संभावित कारण बताए हैं।

1. एक जैसे अनुभव बांटना – जब दो लोग एक जैसी मानसिकता वाले होते हैं तो वे आपस में आसानी से जुड़ पाते हैं। वे अपने अनुभवों से भी जुड़ाव महसूस करते हैं।

2. साथ का असर – शोधकर्ताओं का मानना है कि समय के साथ जो लोग साथ रहते हैं, उनकी सोच और आदतें भी मिलती जाती हैं। ऐसे में अपने आप यह पैटर्न फॉलो होता है।

3.सोशल स्टिग्मा – मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक भेदभाव की वजह से ऐसे लोगों का डेटिंग पूल सीमित हो जाता है। यही कारण है कि एक जैसे लोग आपस में ज्यादा मिलते हैं।

मानसिक सेहत बड़ी चुनौती

पिछले कुछ सालों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। कोरोना लॉकडाउन के बाद से हर आर्थिक स्तर के बच्चों के सामाजिक और भावनात्मक विकास पर असर पड़ा है। इंग्लैंड में हर चौथा बच्चा मानसिक विकार की चपेट में है। एनएचएस के अनुसार 18 साल से कम उम्र के बच्चों का इलाज 55% बढ़ा है।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...