चाहे-ना चाहे विवाह एक ऐसा बंधन है जिसे हर किसी को कभी परिवारवालों की ख़ुशी के लिए तो कभी समाज की संतुष्टि के लिए तो कभी अपने लिए,(कि अब ज़िंदगी में स्थिरता होनी आवश्यक है)स्वीकार करना पड़ता है. प्रेम विवाह हो या अरेंज्ड मैरेज,लड़के-लड़की में उम्र का अंतर आम बात है.

पहले समय में लड़के और लड़की की उम्र में काफ़ी अंतर होता था लेकिन आज के समय में ये अंतर सिर्फ़ एक या दो साल ही देखने को मिल रहा है. बल्कि कभी कभी तो लड़की लड़के से बड़ी भी देखने को मिलती है.लड़के -लड़की की उम्र में अंतर होना चाहिए या नहीं और अगर हां तो कितना होना चाहिए , जिससे उनके आपसी रिश्तों पर कोई बुरा प्रभाव न पड़े एक विवादास्पद इश्यू माना गया है.,आईए देखें लड़के-लड़की की उम्र में फ़र्क़,का उनके वैवाहिक जीवन पर क्या असर पड़ता है-

1-पति पत्नी की उम्र जब छोटी हो और उनके बीच मे 1-2 साल का ही अंतर हो तो उनका जीवन काफ़ी संतुष्ट होता है.छोटी उम्र के कपल अपनी ज़िंदगी का हर पल ख़ूब एंजोय करते हैं.

2-एक शोध के मुताबिक़ जिस व्यक्ति की शादी उससे छोटी उम्र की महिला से हो वो काफ़ी ख़ुश रहता है,वहीं ,जिस व्यक्ति की शादी उससे बड़ी उम्र की महिला से हो वो हमेशा नाख़ुश ही रहता है.

3-वहीं महिलाओं के दृष्टिकोण से देखा जाए तो वे ,अपने से उम्र में बड़े पति के साथ असंतुष्ट रहती हैं क्योंकि वे उसकी भावनाओं को नहीं समझ पाते.यदि पति उनकी उम्र से छोटा हो तो महिलाएँ ख़ुश रहतीं हैं.

4- कुछ पति पत्नी की उम्र में काफ़ी गैप होता है.ज़्यादातर पिछड़े गाँवो में ,जहाँ मर्दों की शादी अपने से छोटी लड़कियों से कर दी जाती है.ऐसे विवाह में लड़कियों को काफ़ी परेशानीयां झेलनी पड़तीं हैं.बड़ी उम्र के कुछ पति ,दबंग प्रवृत्ति के होने के कारण,अपनी पत्नी पर राई रत्ती भी विश्वास नहीं कर पाते.और हर समय अपने अंकुश के चाबुक से अपनी पत्नी को साध कर रखते हैं.

वहीं कुछ बड़ी उम्र के पतियों का व्यवहार पित्र तुल्य होता है. दोनों ही स्थितियों में बड़ी उम्र के पति,हर समय अपनी पत्नी के उठने बैठने,बोल चाल,यहाँ तक कि उसके हर कार्यकलाप पर गिद्ध दृष्टि रखते हैं. ऐसे में क़ई बार लड़कियों को ऐसी घुटन महसूस होने लगती है, कि या तो वो अदालत का दरवाज़ा खटख़टा देती हैं या घुट घुटकर अपनी जान से हाथ धो बैठती हैं (अपवाद हर जगह देखने को मिलते हैं. दिलीप कुमार-सायरा बानो,सैफ़-करीना का विवाह पति के उम्र में बड़े होने के बावजूद सफल विवाह माना जाता है.)

5-उम्र में काफ़ी अंतर होने पर बच्चों पर भी बहुत प्रभाव पड़ता है. इसके अलावा पति-पत्नी में कुछ सालों बाद प्यार में कमी आ जाती है जिससे रिश्तों में दूरियाँ,विवाहोत्तर संबंध पनपते हैं,जिससे गृह कलह और क्लेश बढ़ने से बच्चों के स्वाभाविक विकास की गति धीमी पड़ती जाती है.

अंत में पति पत्नी  के बीच उम्र का अंतर इतना होना चाहिए जिससे उनके बीच दोस्ताना व्यवहार क़ायम रह सके.एक का पलड़ा दूसरे पर भारी न पड़े ,और वैवाहिक जीवन ख़ुशनुमा बना रहे. 

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