Summary:रिश्तों में दूरी लाती हैं ये 5 सेक्स से जुड़ी गलत धारणाएँ
सेक्स केवल शारीरिक सुख नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम भी है। इन झूठी मान्यताओं को छोड़कर रिश्तों को और मजबूत बनाया जा सकता है।
Lies about Sex: आज भी हमारे समाज में सेक्स को लेकर कई तरह की झूठी धारणाएँ और भ्रांतियाँ फैली हुई हैं। जिनपर लोग बिना सोचे-समझें यकीन कर लेते हैं, लेकिन वास्तव में वह बातें सच नहीं होती हैं और इनका रिश्ते पर केवल नकारात्मक प्रभाव ही पड़ता है। इन झूठी धारणाओं को समझना, इन्हें तोड़ना और इनके प्रति जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी है, ताकि लोग अपनी सेक्स लाइफ को खुलकर अच्छे से एन्जॉय कर सकें। आइए जानते हैं सेक्स से जुड़ें 5 झूठ, जिन्हें लोग सच मानते हैं।
सेक्स से केवल शारीरिक सुख मिलता है

अधिकांश लोगों को ऐसा लगता है कि सेक्स से केवल शारीरिक आनंद और सुख की ही प्राप्ति होती है। लेकिन सच्चाई यह है कि सेक्स रिश्तों में भावनात्मक जुड़ाव, प्यार और विश्वास को मजबूत करने के लिए बहुत जरूरी होता है। यह कपल्स के बीच मानसिक शांति बनाने के लिए भी एक अहम् साधन है।
पुरुष हमेशा ही सेक्स के लिए तैयार रहते हैं

अधिकांश लोगों में यह एक आम भ्रांति फैली हुई है कि पुरुष हर समय सेक्स के लिए तैयार रहते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है पुरुष भी तनाव, थकान, चिंता व रिश्तों में खटास के कारण सेक्स में रुचि धीरे-धीरे खो सकते हैं। पुरुषों में भी परिस्थितियों के अनुसार सेक्स की चाहत बदलती रहती है।
पहली बार सेक्स करने पर बहुत दर्द होता है

महिलाओं में यह धारणा खासतौर पर बनी हुई है कि पहली बार सेक्स करने पर बहुत ज्यादा दर्द होता है और यह अनुभव हर महिला के लिए अलग-अलग होता है। अगर पहला अनुभव दर्दनाक होता है तो महिलाओं में सेक्स के प्रति एक डर बैठ जाता है, जिसकी वजह से वे अपने पार्टनर के करीब नहीं जाना चाहती हैं। लेकिन पार्टनर के साथ बातचीत, आराम और फोरप्ले से इस अनुभव को सुखद बनाया जा सकता है और इस दर्द से भी अपने पार्टनर को बचाया जा सकता है।
ज्यादा सेक्स करने से ही रिश्ता मजबूत होता है
कई लोगों का ऐसा मानना है कि कपल्स के बीच जितना ज्यादा सेक्स होगा, उनका रिश्ता उतना ही ज्यादा मजबूत होगा। लेकिन इस बात में बिलकुल भी सच्चाई नहीं है, क्योंकि रिश्तों की मजबूती केवल सेक्स पर ही निर्भर नहीं करती है, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि रिश्ते में कितना प्यार, सम्मान और संवाद हो रहा होता है। सेक्स की गुणवत्ता और संख्या एक-दूसरे के साथ भावनात्मक जुड़ाव के लिए ज्यादा मायने रखता है, न कि रिश्ते की मजबूती के लिए।
उम्र बढ़ने के साथ सेक्स की इच्छा खत्म हो जाती है

लोगों की ऐसी सोच है कि 40 या 50 की उम्र के बाद सेक्स की जरूरत बिलकुल भी नहीं होती है और इस उम्र के लोगों में सेक्स की इच्छा भी खत्म हो जाती है। लेकिन यह सोच बिल्कुल गलत है। सेक्स की इच्छा और जरुरत उम्र के साथ खत्म नहीं होती, बल्कि यह कपल्स के सही स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और भावनात्मक जुड़ाव के ऊपर निर्भर करता है और इसी के आधार पर वे इसे जीवनभर अच्छे से एंजॉय कर सकते हैं।
