यह भी माना जाता है कि पति-पत्नी को तीर्थ यात्रा भी एक साथ ही करनी चाहिए। एकसाथ पूजा-पाठ या कोई यज्ञ आदि करने से पति और पत्नी को कई लाभ प्राप्त होते हैं। आइए आपको बताते हैं पति-पत्नी को एक-साथ पूजा क्यों करनी चाहिए। 

शादी के वचनों में से एक 

ऐसा माना जाता है कि शादी के सात वचनों में से एक वचन यह भी होता है कि पति और पत्नी कोई व्रत-उपवास और किसी धार्मिक स्थान पर जाएं तो एक साथ हजी जाएं। इसके अलावा पूजा भी दोनों साथ मिलकर ही करें।   इसलिए  पति-पत्नी की अकेले पूजा नहीं करनी चाहिए। अकेले पूजा करने से पूजा का महत्व कम हो जाता है। इसके अतिरिक्त  किसी तीर्थ स्थान पर अकेले जाने नहीं जाना चाहिए , ऐसा करने से  तीर्थ यात्रा सफल नहीं मानी जाती है। 

दोनों के बीच  तालमेल बढ़ता है

अगर पति-पत्नी एक साथ पूजा करते हैं तो उन दोनों में आपसी तालमेल बढ़ता है। एक साथ पूजा-पाठ करने से वाद-विवाद और झगड़े कम हो जाते हैं और आपसी समझ बढ़ती है । इसके अतिरिक्त धार्मिक कार्यों में एकसाथ शामिल होने  से पति-पत्नी का एक-दूसरे के प्रति समर्पण भाव भी बढ़ता है। 

मनोकामना पूर्ण होती हैं 

जब पति और पत्नी एक साथ पूजा करते हैं तब उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। और इसके विपरीत ऐसा न करने पर उन्हें पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है। 

घर में सुख समृद्धि आती है 

पुराणों में पत्नी को लक्ष्मी स्वरूपा और पति को विष्णु का रूप माना गया है और दोनों एक दूसरे  के बिना पूर्ण नहीं माने जाते हैं। इसीलिए ऐसा माना जाता है कि पति-पत्नी के साथ में पूजा करने से घर में सूखा और समृद्धि का वास होता है। 

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