fifty shades darker novel in Hindi
fifty shades darker novel in Hindi

fifty shades darker novel in Hindi: जैक की नीली आंखों में वासना सी सुलग उठी और उसने मुझे सिर से पैर तक निहारा।

मैं डर से अधमरी हो गई। ये क्या है? ये चाहता क्या है? अन्दर ही अन्दर मेरा मुंह सूख गया। मैंने अपना बचाव करने के लिहाज से कुछ शब्द मुंह से निकालने की कोशिश की। दिमाग में एक ही बात गूंज रही थी। ऐसे लोगों को बातों में उलझाए रखो।

“जैक, इन बातों के लिए वक्त सही नहीं है। दस मिनट में तुम्हारी कैब आती होगी। मुझे तुम्हारे कागज भी देने हैं।” मैंने थोड़ा कड़ा होकर बोलने की कोशिश की।

वह मुस्कुरया और तीखी भेदती नज़रों के साथ मेरी ओर बढ़ा। वह लगातार मुझे देख रहा है। उसकी आंखों की पुतलियां तक स्थिर हैं। हाय! मैं क्या करूं!

“जानती हो कि तुम्हें ये नौकरी देने के लिए मुझे एलिजाबेथ से उलझना पड़ा।” उसकी आवाज कांपी और वह आगे बढ़ा…। मैं अलमारी की ओर पीछे खिसकती गई। उसे बातों में लगाए रख! उसे बातों में लगाए रख! उसे बातों में लगाए रख!

“जैक, तुम्हारी परेशानी क्या है? अगर तुम शिकायत ही करना चाहते हो तो हम एचआर को बीच में ला सकते हैं। हम एलिजाबेथ के साथ मीटिंग में भी यह बातें कर सकते हैं।”

“सिक्योरिटी कहां है? क्या वे अब भी इमारत में हैं?”

“हमें इस मामले के लिए एचआर की जरूरत नहीं है। एना। जब मैंने तुम्हें रखा तो सोचा था कि तुम कड़ी मेहनत करोगी। मुझे लगा था कि तुममें काबलियत है पर पता नहीं क्यों अब तुम बिलकुल ही आलसी और काम के लिए लापरवाह हो गई हो। मैं सोच रहा था कि क्या तुम्हारा दोस्त तुम्हें भटका रहा है? मैंने तय किया कि शायद तुम्हारे ई-मेल से कुछ पता चल जाए। एना! उसमें सिर्फ तुम्हारे ई-मेल थे, जो तुमने उसे भेजे। जो उसने भेजे थे, वे मेल कहां गए? वह तो एक भी नहीं है। एना! ये हो क्या रहा है? उसके मेल तुम्हारे सिस्टम से कहां गए? क्या तुम ग्रे की कंपनी की ओर से कोई जासूस रखी गई हो? क्या यही सब चल रहा है?”

ओह ई-मेल! मैं क्या कहती?

“जैक! तुम क्या बात कर रहे हो?” मैंने अनजान बनने की कोशिश की। वह बहुत गुस्से में दिखा।

“तुमने अभी कहा कि तुमने एलिजाबेथ को मुश्किल से मना कर मुझे काम पर रखा तो मैं किसी की जासूस कैसे हो सकती हूं? जैक! जरा दिमाग से काम लो।”

“पर ग्रे ने न्यूयार्क ट्रिप का कबाड़ा किया, बोलो सच है न?”

ओह शिट!

“एना! उसने यह कैसे किया? तुम्हारा पैसे वाला दोस्त और क्या-क्या कर सकता है?”

मेरे चेहरे का रहा-सहा लहू भी सूख गया और ऐसा लगा कि मैं बेहोश होने वाली हूं।

“जैक! मैं नहीं जानती कि तुम क्या कह रहे हो? तुम्हारी कैब आती होगी। क्या तुम्हारा सामान ला दूं? मुझे जाने दो। ये बातें बस भी करो।”

जैक बोला, “……और उसे लगता है कि मैं तुम पर लाइन मार रहा हूं। वैसे मैं चाहता हूं कि जब मैं जाऊं तो तुम इस बारे में थोड़ा-सोच लो। तुम्हें भी तो अपनी ओर से थोड़ा एहसान मानना चाहिए। मैं इसका हकदार हूं। मैंने तुम्हें पाने के लिए झगड़ा किया है। एलिजाबेथ किसी और पढ़े-लिखे बंदे को रखना चाहती थी पर मुझे तुममें कुछ दिखा इसलिए तुम्हें काम दिया। हमें एक डील करनी होगी। इस डील के हिसाब से तुम मुझे खुश रखोगी। एना! क्या तुम मेरी बात का मतलब समझ गईं?”

ओह! यह क्या..

“मान लो यह तुम्हारे काम का ही एक हिस्सा होगा। अगर मुझे खुश रखा तो मैं यह जानने की कोशिश नहीं करूंगा कि तुम्हारा दोस्त किस तरह अपने रुतबे और दौलत का फायदा उठाकर यह हरकतें कर रहा है।”

मेरा मुंह खुला का खुला रह गया। वह मुझे ब्लैकमेल कर रहा है। सेक्स के लिए ब्लैकमेल! मैं क्या कह सकती हूं? क्रिस्टियन के कंपनी लेने की बात अभी तीन हफ्ते और छिपानी होगी। मैं तो यकीन नहीं कर सकती। मेरे साथ सेक्स!

जैक मेरे और पास आ गया। उसके कोलोन की खूशबु से जी मिचला रहा है- अगर मैं गलत नहीं हूं तो इसने पी भी रखी है। बड़ी तीखी गंध आ रही है। वह पी रहा था। कब…?

“एना! मैंने आज तक तुम्हारे जैसी दिलरूबा नहीं देखी, जिसकी अदाएं इतनी कातिलाना हों।”

हैं! ये क्या बक रहा है।

“जैक! क्या बोले जा रहे हो?” मेरा पूरा शरीर खुद को आने वाले खतरे के लिए तैयार कर रहा है। वह और पास आ गया। मैं अपना दांव खेलने की तैयारी करने लगी। रे ने मुझे सिखा रखा है कि हमें अपना बचाव कैसे करना चाहिए। अगर जैक ने मुझे हाथ भी लगाया तो उसे कच्चा चबा जाऊंगी। मेरी सांसें उथली हो गई हैं। मैं बेहोश न हो जाऊं!

“देखा! तुम भी मुझे देखकर ललचा रही हो। तुम भी मुझे पाना चाहती हो। दरअसल तुम भी मुझे चाहती हो। तुम पहले से यह सब चाहती थीं, मैं सब जानता हूं।”

ये बंदा पगला गया है। मेरा डर मुझ पर हावी होने लगा। “नहीं जैक! मैंने ऐसा कभी सोचा तक नहीं।”

“मैं तुम्हारे हाव-भाव देखकर समझ गया था।” उसने अपनी हथेली का पिछला हिस्से को मेरे गाल पर हाथ फेरा। उसकी तर्जनी मेरे गले से टकराई और मेरा कलेजा उछल कर मुंह को आ गया। उसका हाथ मेरे गले के उस हिस्से तक आ गया, जहां से ब्लाउज के बटन शुरू हो रहे थे। उसने मेरी छाती के पास ले जा कर अपना हाथ दबाया।

“एना! तुम भी मुझे चाहती हो, कबूल लो।” उसने एक विजयी मुस्कान दी। मैंने अचानक उसकी छोटी अंगुली पकड़ी और उसे मोड़ते हुए, उसके पीछे नितंब तक ले गई।

“आह!” वह दर्द से कराह उठा और साथ ही उसके चेहरे पर हैरानी की लहर दिखाई दी। जो भी हो, मैं उसका संतुलन बिगाड़ने में कामयाब रही। मैंने उसकी टांगों के बीच खींचकर एक लात दे मारी और वह घुटनों के बल दोहरा होता चला गया। अब उसके दोनों हाथ टांगों के बीच दबे थे।

“आज के बाद मुझे छूने की हिम्मत भी मत करना।” मैं फुुंफकारी। तुम्हारा सामान मेज पर बंधा रखा है। मैं घर जा रही हूं। तुम्हारा सफर अच्छा रहे और आज के बाद अपनी कॉफी खुद ले लिया करना।

“कमीनी…कुत्तिया कहीं की…” उसने चिल्लाने की कोशिश की पर मैं दरवाजे से बाहर आ चुकी थी।

मैंने भागकर अपनी मेज से पर्स और जैकेट लिए और रसोई के फर्श पर लुढ़के जैक की आहों और कराहों को अनुसना करते हुए बाहर की ओर लपकी। बाहर निकल कर मैंने ताजी हवा को अपने भीतर लिया और खुद को संभालने की कोशिश की पर मैंने सुबह से कुछ खाया नहीं था इसलिए एक अजीब-सी कमजोरी का एहसास हो रहा था। टांगें पिछले कुछ मिनटों की घटना के असर से थरथरा रही थीं।

अचानक ही मुझे टेलर और क्रिस्टियन, सामने पार्क गाड़ी से निकलकर भागते हुए आते दिखाई दिए। मैं वहीं ढेर हो गई, क्रिस्टियन मेरे पास घुटनों के बल झुका और मेरे मन यही तसल्ली दी। वह आ गया। मेरा महबूब आ गया। अब मैं सुरक्षित हूं।

“एना! एना! क्या हुआ?”

उसने मुझे गोद में खींचा और मेरे हाथ-पांव टटोलकर देखने लगा कि मुझे हुआ क्या है? उसने मेरा सिर अपने दोनों हाथों में थामा और देखने लगा कि कहीं चोट तो नहीं है। मैं उसे देखते ही थकान और चैन दोनों से ही निढाल हो गई। ओह, क्रिस्टियन की बांहों से बढ़ कर तो दुनिया की कोई जगह हो ही नहीं सकती।

“एना! उसने मुझे हौले से हिलाया, क्या हुआ? तुम्हारी तबीयत खराब है?”

मैंने सिर हिलाया और ऐसा लगा कि कुछ तो बोलना ही होगा।

“जैक!” मैंने हौले से कहा और क्रिस्टियन ने झट से टेलर को ताका, जो उछलकर इमारत की ओर चल दिया।

“हरामी……!” क्रिस्टियन ने मुझे बांहों से घेर लिया। उसने क्या किया तुम्हारे साथ? क्रिस्टियन के मुंह से एक भद्दी गाली निकली।

और जाने कहां से मेरे गले से हंसी फूट पड़ी। मुझे जैक का हैरानी से भरा चेहरा याद आ गया, जब मैंने उसकी अंगुली मरोड़ी थी।

“मैंने उसके साथ ये किया।” मैंने उसे बमुश्किल हंसी रोक कर बताया।

“क्या उसने तुम्हें हाथ लगाया?”

“एक बार।”

क्रिस्टियन की मांसपेशियां तन गईं और पूरे शरीर में गुस्से की तेज़ लहर दौड़ गई। ओह! वह किसी चट्टान की तरह मेरे साथ है पर इस वक्त उसका पूरा शरीर गुस्से से कांप रहा है। वह बुरी तरह से सुलग उठा है। नहीं!

“वह कमीना है कहां?”

हमें अचानक ही इमारत के अन्दर से जैक की कराहें सुनाई दीं और मैं झट से उठ बैठी।

“क्या तुम खड़ी हो सकती हो?”

मैंने हामी दी।

“अन्दर मत जाओ। मत जाओ क्रिस्टियन।” अचानक ही मुझे डर लगने लगा कि क्रिस्टियन जैक की कितनी बुरी हालत कर सकता है।

“कार में जाओ।” वह चिल्लाया।

“क्रिस्टियन नहीं!” मैंने उसकी बाजू पकड़ ली।

“एना! एक बार में सुनना सीख। कार में जा।” उसने मुझे झझकोर दिया।

“नहीं प्लीज! मैंने विनती की। मुझे अकेला मत छोड़ो।” मैंने अपना आखिरी हथियार चलाया।

क्रिस्टियन ने बेबस होकर बालों में हाथ फेरे और बेचैन हो उठा। अन्दर से आने वाली आवाजें तेज होने के बाद शांत हो गईं।

“अरे नहीं!” टेलर ने उसके साथ क्या किया होगा।

क्रिस्टियन का फोन बजा।

“क्रिस्टियन! उसके पास मेरे मेल हैं।”

“क्या?”

“वही जो मैंने तुम्हें भेजे थे। वह जानना चाहता था कि वे मेल कहां गए, जो तुमने मुझे भेजे थे। वह मुझे ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा था।”

“ओह शिट्!”

उसने मुझे देखकर आंखें सिकोड़ीं और एक नंबर लगाया।

अरे नहीं! मैं मुश्किल में पड़ने वाली हूं। वह किसे फोन कर रहा है?

“बार्नी! ग्रे। मैं चाहता हूं कि तुम एसआईपी का मेन सर्वर खोलो मेरे नाम एनेस्टेसिया स्टील के सारे मेल डिलीट कर दो। फिर जैक हाइड की पर्सनल फाइल में देखो। अगर उसने वहां भी स्टोर किए हुए हैं तो सबको हटा दो। फिर मुझे रिपोर्ट करो।”

उसने दूसरा नंबर लगाया।

“रॉक, ग्रे! हाइड- उसे बाहर निकाल फेंको इसी वक्त। इसी समय। सिक्योरिटी को फोन करो। उसका मेज खाली करवाओ वरना मैं सुबह उठते ही सबसे पहले इस कंपनी को बंद कर दूंगा। तुम्हारे पास उसे बाहर निकालने के लिए पहले ही बहुत से कारण हैं। समझ गए?” इसके बाद क्रिस्टियन के चेहरे पर कुछ राहत दिखी।

“ब्लैकबेरी!” वह भिंचे दांतों से बोला।

“मुझसे नाराज मत हो।” मैंने पलकें झपकाईं।

“इस वक्त तो तुम पर भी गुस्सा आ रहा है। चलो कार में बैठो।”

“क्रिस्टियन प्लीज!”

“कार में जाओ एनेस्टेसिया वरना मैं तुम्हें अन्दर फेंक दूंगा। उसकी आंखों में गुस्सा झलक रहा था।

“ओह! प्लीज जरा संभालकर।”

“बकवास मत करो। मैंने कहा था कि सिस्टम से मेल मत भेजना। तुमने वही किया और अब मुझे संभलने को कह रही हो? अब एक सेकेंड में कार में नहीं गईं तो…” ओह इसका ये रूप तो मेरे लिए बिल्कुल ही नया है। वह बिल्कुल आपे से बाहर दिखा।

उसने अपनी होंठ जोर से भींचे।

जीसस! ओह अच्छा एक बात सूझ गई।

“क्रिस्टियन संभलकर रहना। मैं नहीं चाहती कि तुम्हें कुछ हो। अगर तुम्हें कुछ हो गया तो मैं भी नहीं बचूंगी।” मैंने हौले से कहा। उसने पलकें झपकाईं और गहरी सांस ली।

“मैं ख़याल रखूंगा।”

ओह शुक्र है जीसस! जैसे ही मैं ऑडी में आगे जाकर बैठी। वह झट से अन्दर चला गया।

मैं वहीं इंतजार करती रही। पांच मिनट बाद, वहां से जैक की कैब आती दिखी पर पंद्रह मिनट तक अन्दर से कोई हलचल नहीं हुई। वे ठीक तो हैं? टेलर क्या कर रहा है?

करीब पच्चीस मिनट बाद अन्दर से जैक निकलता दिखा। हाथ में एक गत्ते का डिब्बा था और पीछे सिक्योरिटी वाला आ रहा था। वह कैब की ओर बढ़ा। मैं ऑडी के अन्दर थी इसलिए उसकी नजर नहीं पड़ी। कैब चल दी पर शायद वह एयरपोर्ट की ओर नहीं गया।

क्रिस्टियन ने आकर गाड़ी संभाली और टेलर पीछे बैठ गया। शायद इसलिए क्योंकि मैं आगे बैठी थी।

दोनों में से कोई भी कुछ नहीं बोला और गाड़ी भीड़ के बीच रास्ता बनाकर चलती रही। मैंने फिफ्टी को देखा, चेहरे की रेखाएं गंभीर थीं। तभी उसका फोन बजा।

“ग्रे!” वह बोला।

“मि. ग्रे! बर्नी बोल रहा हूं।”

“बार्नी! मैं स्पीकरफोन पर हूं और कार में दूसरे लोग भी हैं।” उसने चेतावनी दी।

“सर! काम हो गया पर मैंने मि. हाइड के कंप्यूटर पर और जो कुछ देखा, वह भी आपको बताना था।”

“मैं पहुंचकर फोन करता हूं। थैंक्स!”

“ठीक है। मि. ग्रे।”

बार्नी ने फोन रख दिया। आवाज से तो कम उम्र का ही लगता है।”

अब जैक के कंप्यूटर पर और क्या दिख गया?

“क्या तुम कुछ कह रहे हो?” मैंने पूछा

क्रिस्टियन ने एक पल के लिए मुझे देखने के बाद अपनी नजरें आगे गड़ा दीं और हौले से बोला, “नहीं!”

हाय! ये तो अब भी नाराज है।

उ फ! मैं चुपचाप खिड़की से बाहर ताकने लगी। मैं उसे कह दूं कि मुझे मेरे घर छोड़ दे और इस तरह हमारी लड़ाई होने से बच जाएगी पर मुझे यह भी पता है कि कल वाली घटनाओं के बाद तो मैं इसे ऐसा करने को भी नहीं कह सकती।

क्रिस्टियन ने घर पहुंच कर मेरी ओर का दरवाजा खोला।

“आओ!” उसने कहा और टेलर ने गाड़ी संभाल ली। हम हाथ थामकर बरामदे की ओर चल दिए।

“क्रिस्टियन! तुम मुझसे नाराज क्यों हो?” मैंने हौले से पूछा।

“तुम जानती हो, क्यों। अगर तुम्हें कुछ हो जाता तो वह कमीना भी आज जिंदा न बचता। क्रिस्टियन की आवाज ने मेरे पूरे शरीर में कंपकंपी पैदा कर दी। लिफ्ट के दरवाजे बंद हो गए।

“मैं उसका कैरियर तबाह कर रहा हूं ताकि वह आज के बाद फिर किसी लड़की का नाजायज फायदा न ले सके। ऐसे आदमी के लिए तो इससे भी बुरी सजा होनी चाहिए।

“जीसस… एना!” उसने अचानक मुझे बांहों में जकड़ लिया।

उसके हाथ मेरे बालों में थे और उसका मुंह मेरे मुंह से आ मिला। यह एक आवेग से भरा चुंबन था। मैं हैरान रह गई। शायद उसके गुस्से या तनाव को निकालने का यही एक रास्ता था। उसने मुझे बेदम कर दिया और मैं सहारे के लिए उसके साथ चिपक कर खड़ी रही।

“अगर तुम्हें कुछ हो जाता तो… वह तुम्हें कोई नुकसान पहुंचा देता तो… मैं उसके बदन की कंपकपी महसूस कर सकती थी। आज के बाद हमेशा फोन का इस्तेमाल करना। समझ गईं?” उसने फिर से कहा।

“हां।” मैं अब भी उसके चुंबन की तीव्रता से थरथरा रही हूं।

“ठीक है।”

“रे सेना मे रह चुके हैं। उन्होंने मुझे अच्छी तरह बचाव करना सिखाया है।”

“मुझे खुशी है कि उन्होंने ऐसा किया।” उसने उसांस भरी और भौं उठाई। मुझे भी यह बात याद रखनी होगी। वह मुझे लिफ्ट से बाहर ले गया। शुक्र है कि उसका मूड तो संभला।

“मुझे बार्नी से बात करनी है। बस दो मिनट में आया।” वह स्टडी में ओझल हो गया। मिसेज जोंस ने हमारा खाना तैयार कर रखा है। मुझे एहसास हुआ कि जोरों की भूख लगी है पर मुझे कुछ करना भी होगा।

“क्या मैं मदद कर सकती हूं?” मैंने पूछा।

वे हंसीं, “नहीं एना! क्या मैं एक ड्रिंक बना दूं। तुम थकी दिख रही हो?”

“हां, मैं एक गिलास वाइन लेना चाहूंगी।”

“व्हाइट?”

“हां प्लीज!”

मैं वही बारस्टूल पर बैठ गई और उन्होंने चिल्ड वाइन थमा दी। उस समय उसकी सख्त ज़रूरत थी। ओह क्रिस्टियन से मिलने के बाद जिंदगी में कुछ ज्यादा ही रोमांच नहीं आ गया।

अगर मैं उससे न मिली होती तो इस समय घर में बैठी, ईथन को जैक से हुई मुठभेड़ के बारे में बता रही होती और मुझे पता होता कि अगले दिन फिर उसका सामना करना होगा। बेशक वह अब दोबारा नहीं दिखेगा पर मैं किसके लिए काम करूंगी। मेरा बॉस कौन होगा? यह तो मैंने सोचा ही नहीं। मेरी नौकरी है या गई?

“ईवनिंग गेल!” क्रिस्टियन की आवाज मुझे मेरे ख्यालों की दुनिया से बाहर ले आई।

“गुड ईवनिंग सर! खाना दस मिनट में लग जाएगा।”

“बढ़िया!”

क्रिस्टियन ने अपना गिलास उठाकर चीयर्स कहा।

“उस एक्स आर्मी मैन के नाम जिसने अपनी बेटी को अपनी सुरक्षा करना सिखाया है।”

“चीयर्स!”

“क्या हुआ?” उसने पूछा।

“पता नहीं, मेरी नौकरी तो नहीं चली गई?”

उसने एक ओर सिर झुकाया, “क्या अब भी वह काम चाहती हो?”

“बेशक।”

“तो नौकरी बची हुई है।”

देखा। कितना आसान है। वह तो जैसे मेरी दुनिया का बादशाह है। सब कुछ उसके हाथ में है। मैंने आंखें नचाईं और वह मुस्कुराने लगा।

मिसेज जोंस ने चिकन पॉटपाई बनाया है। वे हमें खाना परोसकर चली गईं और मैं अपने भूखे पेट के लिए कुछ पा कर निहाल हो गई। बेशक! बहुत स्वादिष्ट बना है। क्रिस्टियन लाख पूछने पर भी नहीं बताने वाला कि जैक के कंप्यूटर में और क्या मिला है इसलिए मैंने सोचा कि क्यों न जोंस वाली बात ही कर लूं।

“जोंस का फोन आया था।” मैंने बेलाग भाव से कहा।

’’ओह!’’

“वह चाहता है कि शुक्रवार को तुम्हें फोटो दे दे।”

“अच्छा जी! खुद देने आ रहा है।”

“वह चाहता है कि हम दोनों कहीं शाम को बाहर जाएं।”

“अच्छा?”

“तब तक केट और इलियट भी आ जाएंगे।”

क्रिस्टियन ने कांटा नीचे रखकर अपनी भवेें सिकोड़ीं।

“तुम पूछना क्या चाहती हो?”

“मैं कुछ पूछ नहीं रही। तुम्हें अपने प्रोग्राम के बारे में बता रही हूं। मैं जोंस से मिलना चाहती हूं और वह यहां रहना चाहता है। वह हमारे यहां या मेरे घर में रह सकता है पर अगर वह रुकना चाहता है तो मैं चाहूंगी कि वह यहीं रुक जाए।”

क्रिस्टियन की आंखें फैल गईं।

“उसने तुम्हारे साथ बदतमीजी करने की कोशिश की थी।”

“क्रिस्टियन वह तो पुरानी बात है। हम दोनों नशे में थे। तुमने सब संभाल लिया। दोबारा

ऐसा कभी नहीं होगा। वह कोई जैक नहीं है, मेरा दोस्त है।”

“ईथन यहीं है। वह उसे कंपनी दे देगा।”

“वह ईथन से नहीं मुझसे मिलना चाहता है।”

क्रिस्टियन ने बुरा सा मुंह बनाया।

“वह एक दोस्त ही तो है।”

“मुझे यह पसंद नहीं है।”

“तो क्या हुआ? यह कई बार कितना अजीब-सा बर्ताव करता है।”

“क्रिस्टियन! वह मेरा दोस्त है। हम शो के बाद से मिले नहीं हैं। मुझे पता है कि तुम्हारे पास भी उस औरत के सिवा कोई दोस्त नहीं है पर मैंने कभी उससे मिलने पर ऐतराज किया?” मैंने झट से कहा और क्रिस्टियन ने हैरानी से पलकें झपकाईं।

ग्रेे की आंखें सुलग उठीं, “तुम ऐसा सोचती हो?”

“क्या सोचती हूं?”

“तुम चाहती थीं कि मैं उससे न मिलूं।”

“हां, चाहती तो यही थी पर यह तुम्हारा घर है। तुम जो जी में आए, कर सकते हो।”

“हमारी बात उस औरत पर कहां से आ गई। मैं उसके बारे में सोचना नहीं चाहती।”

“मुझसे जोंस के बारे में बात करो। क्या वह यहां एक रात हमारे साथ रह सकता है?”

“हां! रह सकता है। इस तरह मैं उस पर नजर भी रख सकता हूं।”

तौबा! यह बंदा भी न..

“अच्छा मि. ग्रे!” मैंने प्लेटें डिशवाशर में लगा दीं।

“छोड़ दो। गेल देख लेगी।”

“मैंने कर दिया है।”

“मुझे थोड़ा काम है।” उसने कहा।

“कोई बात नहीं। मैं अपने आपको बिज़ी कर लूंगी।”

“यहां आओ।” उसने मुझे पास बुलाया।

मैं झट से उसकी बांहों में जा पहुंची।

“तुम ठीक तो हो न?” वह धीरे से बुदबुदाया।

“आज उसके साथ जो भी हुआ या कल जो भी हुआ, क्या तुम इन घटनाओं के बाद भी ठीक हो?” मैंने उसकी गहरी और गंभीर आंखों में ताकते हुए सोचा कि क्या मैं ठीक हूं।

“हां।”

उसने मुझे कसकर गले से लगा लिया और मैं सब भूल गई। मैं इस इंसान को चाहती हूं। मैं इसकी मदहोश कर देने वाली गंध, इसकी ताकत और उसके हर तौर-तरीके की दीवानी हूं। ये मेरा है।

“अब हम लड़ेंगे नहीं। एना! तुम्हारे बदन की महक कितनी मीठी है।”

“ऐसे ही तुम्हारी भी!” मैंने कहा और उसकी गर्दन चूम ली।

उसने मुझे छोड़ दिया।

“मैं करीब दो घंटे में आ जाऊंगा।”

मैं अपार्टमेंट में यहां-वहां भटकने लगी। क्रिस्टियन अब भी काम कर रहा है। मैंने नहाकर अपनी एक पैंट और टी-शर्ट पहन ली है। और मन अब रहा है। कुछ पढ़ने का मूड नहीं है। अगर यूं ही बैठी रही तो जैक वाली बात याद आती रहेगी।

मैंने अपना पुराना बेडरूम देखा। जोंस यहां सो सकता है। उसे जगह पसंद आएगी। सवा आठ बजे हैं और सूरज डूबने को है। नज़ारा कितना प्यारा है। फिर मैं सोचने लगी कि क्रिस्टियन वे तस्वीरें कहां लगाएगा।

अचानक मैं टहलते-टहलते प्लेरूम के आगे से निकली। उसका हैंडल घुमाया तो दरवाजा खुला मिला। अक्सर वहां ताला रहता है। ऐसा लगा कि कोई बच्चा जानबूझकर ऐसी जगह जा रहा हो, जहां उसे जाने के लिए मना किया गया होगा। मैंने दबे पांव अन्दर कदम रखा। बत्ती जलाते ही याद आ गया कि कमरा मां की कोख जैसा दिखता है।

पिछली बार की यादें ताजा हो गईं… अब वह बेल्ट बड़ी मासूमियत से कोने में टंगी है।मैंने यूं ही सारे अ लॉगर्स, बेल्टों, पैडलों व कोड़ों पर हाथ फिराया। मुझे डॉ. से इनके बारे में ही तो बात करनी है। क्या ऐसी जीवनशैली जीने वाले को यह सब करने से रोका जा सकता है? यह सोचने में तो असंभव ही लगता है। पलंग के पास भटकते हुए, मेरी नज़र लाल चादर पर पड़ी।

मेरे पास बैंच पर कई तरह की छड़ियां पड़ी थीं। पर इनमें से तो एक ही काफी नहीं होती? वहीं एक बड़ा-सा मेज भी धरा था। वह किस काम आता होगा। मैं वहां जा कर काउच पर बैठ गई। तभी मेरी नज़र एक अलमारी पर गई जिसमें कई सारे दराज थे।

इनमें क्या रखा होगा?

जैसे ही पहला दराज खोला तो मेरा लहू नसों में उबाले खाने लगा। मैं इतनी घबराई क्यों पड़ी हूं? यह सब ऐसा लग रहा है मानो मैं किसी के वर्जित इलाके में चोरी से आ गई हूं। पर अगर वह मुझसे शादी करना चाहता है तो मुझे……।

ये सब है क्या? उसमें तरह-तरह की औजार टाइप चीज़ें थीं जो मेरी समझ से तो बाहर थीं। पता नहीं इनका क्या इस्तेमाल होता होगा। मैंने उठाया। गोलीनुमा वस्तु में एक हैंडल लगा था। हम्म……ये किस काम आता है? मेरा दिमाग चकराने लगा हालांकि अलग-अलग चार साइज देखते ही मुझे कुछ अंदाजा तो हो ही गया था।

क्रिस्टियन वहीं दरवाजे के पास खड़ा मुझे घूर रहा था। उसके चेहरे के भाव समझ नहीं आ रहे। पता नहीं वह कब से वहां खड़ा है? मुझे लगा मानो मैं रंगे हाथों पकड़ी गई हूं।

“हाय।” मैंने थोड़ी घबराहट के साथ कहा।

“यहां क्या कर रही हो?” उसके सुर में कौतूहल छिपा था।

ओह! कहीं नाराज़ ही न हो गया हो।

“मैं बोर हो रही थी इसलिए सोचा…”

वह कमरे में आया और दरवाजा बंद कर दिया। उसकी आंखें गहराई से सुलग रही हैं।

“तो मिस स्टील! आप क्या जानना चाहती हैं?”

“दरअसल…दरवाज……दरवाजा खुला था और मैं यूं ही अन्दर आ गई।”

“मैं आज सुबह यहां आया था। मैं सोच रहा था कि इस सामान का क्या करूं। शायद मैं ही ताला लगाना भूल गया था।” उसने मेरे दोनों हाथ जकड़ लिए।

“पर अब तुम यहां हमेशा की तरह कुछ जानने की इच्छा लिए सामने खड़ी हो।”

“तुम नाराज़ तो नहीं हो।” मैंने आश्चर्य से पूछा।

“क्यों, मैं नाराज़ क्यों होने लगा?”

“मुझे लगा कि तुम्हें मेरी ये घुसपैठ बुरी लगेगी।”

“हां, तुमने घुसपैठ तो की है पर मैं नाराज़ नहीं हूं। उम्मीद करता हूं कि तुम एक दिन मेरे साथ यहां रहोगी और ये सब… तुम्हारा भी होगा।”

“मेरा प्लेरूम!” मैंने उसे देखकर अपना थूक निगला।

“तभी तो आज यहां आया था। यही तय कर रहा था कि सामान का क्या करूं? क्या मैं तुमसे हमेशा नाराज़ ही रहता हूं? आज सुबह तो कोई नाराज़ नहीं था।”

ओह! यह तो सच है। मुझे याद आया कि सुबह कितनी प्यारी थी

“आज तुम अच्छे मूड में थे। मुझे तुम इस रूप में बहुत प्यारे लगते हो।”

“क्या अब भी लग रहा हूं?”

मैंने एक सिल्वर गोलीनुमा चीज़ को इशारा करके पूछा, “यह क्या है?”

“मिस स्टील! हमेशा की तरह जानकारी पाने के लिए अधीर! ये एक ‘बट्ट प्लग’ है यानी इसे नितंबों में लगाया जाता है।”

ओह!

“तुम्हारे लिए लिया था।”

“क्या? मेरे लिए?”

“क्या तुम हर सेक्स गुलाम के लिए नए सेक्स खिलौने……?”

“हां, कुछ तो लेता ही हूं।”

“बट्ट प्लग्स?”

“हां।”

हां। ये तो ठोस धातु से बना है। इससे बहुत तकलीफ होती होगी। मुझे याद है कि हमने सेक्स खिलौनों के बारे में पहले बात की थी मुझे लगता है कि उस समय मैंने इसे आज़माने की बात भी की थी पर अब देखकर लगता है कि क्या मैं ऐसा करना चाहूंगी? मैंने उसे उलटा-पुलटा और दराज में वापिस रख दिया।

“और यह?” मैंने एक लंबी, काली रबड़नुमा वस्तु निकाली, जिसमें गोलाकार बुलबुले से आपस में जुड़े थे, उनमें से पहला सबसे बड़ा और आखिरी सबसे छोटा था। कुल मिला कर आठ रहे होंगे।

“एनल बीड्स!” क्रिस्टियन ने मुझे ध्यान से देखते हुए कहा।

ओह! ये भीतर ले जाने के लिए हैं। मैं तो देखकर ही सिहर गई।

“अगर तुम चरम सुख के बीच इन्हें बाहर खींचो तो बहुत अच्छा असर डालते हैं।” उसने उनका उद्देश्य बताया।

“ये मेरे लिए है।” मैं बुदबुदाई।

“तुम्हारे लिए है।” वह बोला।

“ये बट्ट दराज है।”

हां, अगर तुम यही कहना चाहो तो।”

मैंने उसे बंद किया और झट से घूम गई।

“क्या तुम्हें ये पसंद नहीं आया?” उसने बेलाग होते हुए पूछा।

“नहीं, ये सब मेरी पसंद की लिस्ट में नहीं आते। मैंने यूं ही दूसरा दराज खोल दिया।

अगले दराज में कई तरह के वाईब्रेटर थे।

मैंने झट से उसे बंद कर दिया।

“और अगला? इस बार मेरे सुर में थोड़ी शर्मिंदगी भी थी।

ओह! वहां तो कई तरह की धातु की चीज़ें और कपड़े सुखाने की चिमटियां सी दिखीं। मैंने बड़ी-सी धातु की क्लिप जैसी चीज़ उठा ली।

“जेनीटल क्लैंप, इसे गुप्तांगों……।” वह उठ कर मेरे पास आया और मैंने उन्हें रख कर एक और चीज़ उठा ली।

दो छोटे क्लिप एक चेन में बांधे थे।

“इनमें से कुछ तो हल्की पीड़ा देने के लिए हैं पर तकरीबन आनंद देने के लिए ही हैं।” वह बोला

“ये क्या है?”

“निप्पल क्लैंप्स हैं। ये पीड़ा और आंनद दोनों ही देते हैं।”

“दोनों? कैसे?”

“बेबी! अपनी छोटी अंगुली दिखाओ।”

उसने एक क्लिप को उस पर लगा दिया। कोई ज्यादा दबाव नहीं महसूस हुआ।

“इनसे संवेदना गहरा जाती है पर जब इन्हें उतारा जाता है तो पीड़ा व आनंद दोनों ही अधिक होते हैं।” उसने उस क्लैंप को उतारा। हम्म! ये अच्छा हो सकता है।

“ये देखने में अच्छे लग रहे हैं।”

“हां, वह तो तुम्हारे चेहरे से ही देखकर बताया जा सकता है।”

उसने दो और क्लैंप निकाले।

“इन्हें एडजस्ट किया जा सकता है।”

“कैसे?”

“चाहो तो इन्हें टाइट करके पहनो या ढीला करके। तुम्हारे मूड पर निर्भर करता है।”

ओह! ये हर बात को इतना मादक बनाकर कैसे पेश कर देता है। मैंने बात बदलने के लिहाज़ से एक और चीज निकाली। जो हल्की कांटेदार पेस्ट्री कटर जैसी दिखी।

ये क्या है। प्लेरूम में बेकिंग?

“इसे वार्टनबर्ग पिनव्हील कहते हैं।”

“ये किस काम आता है?”

उसने मेरा हाथ थामा और अपना अंगूठा उस पर फेरा, पूरे बदन में सुरसुरी सी दौड़ गई। फिर उसने चकरीनुमा चीज़ को मेरे हाथ पर फिराया।

आह! त्वचा पर हल्का खिंचाव आया।

“ये तुम्हारे वक्षस्थल पर फिराने के लिए है।”

ओह! अब तो मेरा दिल अपने होशो हवास खोता जा रहा है

“एना! पीड़ा व आनंद के बीच की विभाजक रेखा बहुत छोटी होती है।”

“कपड़ों पर लगने वाली चिमटियां?”

“इन्हें कई तरह से इस्तेमाल में ला सकते हैं।

मैंने आगे आकर दराज बंद कर दिया।

“बस हो गया?”

“नहीं!” मैंने कहा और चौथा दराज खोल दिया जिसमें कई तरह के चमड़े व पट्टे से पड़े थे। मैंने एक स्ट्रेप निकाला, जिसके एक छोर पर गेंदनुमा चीज़ बंधी थी।

“बॉल गैग! ताकि तुम्हारा मुंह बंद रखा जा सके।” उसने कहा।

“यह तो कठोर सीमा है।”

“मुझे याद है। पर इसे लगाने के बाद भी सांस तो आराम से ली जा सकती है।”

“क्या तुमने कभी इन्हें पहना है?” मैंने पूछा।

“हां”

“अपनी चीखें छिपाने के लिए?”

उसने आंखें बंद कर ली। “नहीं ये उससे संबंध नहीं रखते।”

ओह..

“एना! इनका संबंध नियंत्रण से है। अगर तुम्हें बांध दिया जाए और तुम बोल न सको तो तुम खुद को कितना असहाय महसूस करोगी। मैं तुम्हें पूरी तरह से वश में रखूंगा और तुम्हें मुझे अपना पूरा भरोसा देना होगा। तब मैं तुम्हारे शब्द सुनने की बजाए, तुम्हारे संकेतों व भावों से प्रतिक्रिया जानूंगा। इस तरह तुम मुझ पर और भी निर्भर हो जाओगी, पूरी तरह से मेरे वश में हो जाओगी।”

मैंने थूक निगला।

“ऐसा लग रहा है कि तुम इसे करना चाहती हो।”

“यह मैं जानती हूं।”

“मैं जानती हूं कि मैं पूरी तरह से तुम्हारे वश में हूं।”

“तुम मुझे बेबस कर देती हो।”

“नहीं फिफ्टी! ये बात नहीं है।”

“क्यों?”

“क्योंकि केवल तुम ही ऐसी इंसान हो, जो मुझे चोट पहुंचा सकती है ।” वह आगे बढ़ा और मेरे बालों की लट कानों के पीछे कर दी।

“ओह क्रिस्टियन…” यह बात दोनों ही तरह से अपना असर रखती है। अगर तुम मुझे नहीं चाहते…। ये मेरे अपने मन का डर है। अगर वह इतना टूटा और बिखरा न होता तो क्या वह मुझे चाहता? मैंने गर्दन झटकी और खुद को याद दिलाया कि मुझे यह सब नहीं सोचना चाहिए।

“मैं तुम्हें चोट पहुंचाने या दिल दुखाने के बारे में सोच तक नहीं सकती। मैं तुमसे प्यार करती हूं।” उसने मेरे हाथ में पकड़ी चीज़ें दराज में रखीं और मुझे अपने पास खींच लिया।

“क्या सब देखने-दिखाने का कार्यक्रम हो गया?” उसने हल्के नशीले सुर में पूछा। उसके हाथ मेरी पीठ से गर्दन तक रेंग रहे हैं।

“क्यों? तुम क्या करना चाहते हो?”

वह आगे झुका और मुझे चूम लिया। मैं उसकी बांहों में पिघल गई।

“एना! आज वह तुम पर लगभग हमला ही करने वाला था।”

“तो?”

“तो, इस बात से तुम्हारा क्या मतलब है?” उसने फटकारा।

मैं उसके प्यार और दुलार से भरे रंग से रंग गई हूं।

“क्रिस्टियन, मैं बिल्कुल ठीक हूं।”

उसने मुझे बांहों में भरा और पास खींच लिया।

“जब मैं सोचता हूं कि क्या हो सकता था…।” उसने अपना मुुंह मेरे बालों में छिपा लिया।

“तुम ये कब सीखोगे कि मैं जैसी दिखती हूं, उससे कहीं ज्यादा मजबूत हूं।” मैंने उसे दिलासा दिया। सच! उसकी बांहों से बेहतर तो पूरी दुनिया में कोई जगह नहीं हो सकती।

“मैं जानता हूं कि तुम दिलेर और ताकतवर हो।” उसने मुझे बांहों से आजाद किया तो मैंने एक और दराज खोल दिया जिसमें से बहुत सारी हथकड़ियां और बेड़ियां निकल आईं, जो एक बार से जुड़ी थीं।

“ये एक स्प्रेडर बार है, जिसमें हाथों और पैरों में लगाने के लिए बेड़ियां लगी हैं।”

“ये कैसे काम करता है?”

“तुम चाहती हो कि मैं तुम्हें इस बारे में बताऊं?”

“हां! मैं तुम्हारे हाथों बंधना पसंद करूंगी।” मैंने हौले से कहा और भीतर बैठी लड़की को कलाबाज़ी खाने का एक मौका मिल गया।

“ओह एना!” अचानक उसकी आंखों में दर्द के साए लहरा उठे।

“क्या हुआ?”

“यहां नहीं?”

“क्या मतलब”

“मैं तुम्हें अपने साथ पलंग पर ले जाना चाहता हूं।”

उसने मेरा हाथ थामा और हम कमरे की ओर चल दिए।

“हम यहां से क्यों जा रहे हैं?” मैंने पूछा।

क्रिस्टियन ने सीढ़ियों के पास रुककर मुझे देखा और बोला, “एना! हो सकता है कि तुम वहां जाने को तैयार हो पर मैं नहीं हूं। पिछली बार जब हम वहां थे तो तुम मुझे छोड़ गई थीं। मेरी बात समझने की कोशिश करो।”

“मैं बता चुका हूं कि उस रात तुमने जिंदगी के लिए मेरा पूरा नजरिया बदल दिया था। बस मैंने यह नहीं बताया कि मैं उन नशेड़ियों में से हूं, जो नशा छोड़ने की कोशिश में हैं और थोड़ी हमदर्दी की उम्मीद रखते हैं। मैं अब अपनी लालसा को इस कमरे से नहीं जोड़ना चाहता। तुम्हें चोट नहीं पहुंचाना चाहता।”

उसके चेहरे पर पछतावे के भाव थे। ओह! मैंने इस आदमी को कर क्या दिया है? क्या मैंने इसकी जिंदगी सुधारी है? क्या यह मुझसे मिलने से पहले खुश नहीं था?

“मैं तुम्हें चोट नहीं पहुंचा सकता क्योंकि मैं तुम्हें प्यार करता हूं।” उसने एक भोले बच्चे की तरह सच्ची बात कही तो मेरा मन भर आया।

मैं इस इंसान को नि:स्वार्थ भाव से प्यार करती हूं।

मैंने उसे दीवार की ओर धकेला और उसे हैरानी में डालते हुए, आवेग से भरा एक गहरा चुंबन दिया। मैं उससे ऊपर वाली सीढ़ी पर खड़ी हूं इसलिए हमारी लंबाई एक जैसी हो गई है। मैंने खुद को विजेता महसूस किया और उसके बालों में अंगुलियां घुमाते हुए फिर से चूम लिया। मेरी वासना सुलगते-सुलगते भड़क उठी है। उसने एक सिसकारी के साथ, मुझे कंधों से धकेल कर पीछे कर दिया।

“क्या तुम चाहती हो कि हम सीढ़ियों पर शारीरिक संबंध बनाएं।” उसने पूछा और उसकी सांसें उथली हो गईं।

“क्योंकि मैं अभी यही करने जा रहा हूं।”

उस वक्त शायद मेरी आंखों में भी उसे वासना की वही लहर दिख रही है।

“नहीं! यह सब हमारे पलंग पर होगा।”

उसने मुझे अपने कंधों पर उठा लिया और हाथ में स्प्रेडर बार लेकर अपने कमरे की ओर चला। रास्ते में मुझे मिसेज जोंस की झलक दिखी। मैं तो शर्म से वहीं मर गई। शायद क्रिस्टियन ने उन्हें नहीं देखा था।

उसने मुझे कमरे में उतारा और स्प्रेडर को पलंग पर रख दिया।

“मुझे नहीं लगता कि तुम मुझे कोई चोट पहुंचाओगे?”

“नहीं! मुझे भी नहीं लगता। उसने मेरा सिर अपने हाथों में थामकर चूम लिया

“मैं तुम्हें कितना चाहता हूं। हम जो भी करने जा रहे हैं, क्या तुम उसके लिए सहमत हो?”

“हां, मैं भी तुम्हें पाना चाहती हूं। तुम्हारे ये कपड़े उतारना चाहती हूं।”

उसने मेरी बात सुनी और भवें सिकोड़ीं। वह अक्सर ऐसी बातें पसंद नहीं करता।

“अच्छा!” उसने सावधानी से कहा

मैंने उसकी शर्ट के दूसरे बटन पर हाथ रखा तो उसकी सांस उथली हो गई।

“अगर तुम नहीं चाहते तो मैं तुम्हें हाथ नहीं लगाऊंगी।”

“नहीं-नहीं! तुम ऐसा कर सकती हो।”

मैंने हौले से अगला बटन खोला। ओह! वह अपने इस डर के बीच भी कितना खूबसूरत दिख रहा है। तीसरा बटन खोलते ही छाती के बाल झांकने लगे।

“मैं यहां चूमना चाहती हूं।” मैंने कहा।

उसने गहरी सांस ली। “मुझे चूमना चाहती हो?”

“हां”

वह अगला बटन खुलते ही आगे की ओर झुक आया ताकि मेरी इच्छा पूरी हो सके। उसने सांस रोक रखी है। मैंने आखिरी बटन खोल कर उसे देखा। वह शांत और संतुष्ट भाव के साथ मुझे ही देख रहा है। ओह उसकी वे आंखें!

“ये आसान होता जा रहा है, है न?”

उसने अपनी कमीज कंधों से नीचे धकेल दी।

“एना! तुमने मुझे क्या कर दिया है। जो भी किया है, इसे कभी बंद मत करना।” उसने मेरे सिर को अपने हाथों से पीछे की ओर धकेल दिया ताकि उसके होंठ मेरी गर्दन तक पहुंच सकें।

उसने धीरे से मेरे जबड़े तक अपने होठों से छुअन दी। ओह! मैं इसे पाना चाहती हूं। मैंने लरजते हाथों से उसकी जिप और पैंट का हुक भी खोल दिया।

उसने मेरे कान के पास चूमा और मैं अपने-आप को मुख मैथुन के लालच से रोक नहीं सकी। मैं जानती हूं कि उसे भी यह पसंद है। मैं वहीं घुटनों के बल बैठ गई। उसने अपनी आंखें मूंद लीं और खुद को इस आनंद के हवाले कर दिया। यह ताकत अपने-आप में बहुत शक्तिशाली है।

“एना!” उसने मुझे रोकना चाहा।

“नहीं ग्रे! मैं तुम्हें इसी तरह पाना चाह रही हूं।” मैंने अपनी कोशिश और भी तेज कर दी।

“प्लीज! एना!! ये शब्द कहते-कहते ही…”

मैंने मुस्कुराते हुए अपने होंठ चाटे तो उसने हैरानी से मुझे देखा।

“मिस स्टील! आप यह कैसा खेल खेल रही हैं?” उसने मुझे दोनों हाथों से उठाया और मेरे सुलगते मुंह पर अपना मुंह रख दिया।

उसने एक ही झटके में मेरे कपड़े उतार फेंके। फिर वह धीरे-धीरे अपने बाकी कपड़े उतारने लगा पर उसकी आंखें एक पल के लिए भी मुझसे दूर नहीं हुईं।

“एना! मैंने आज तक तुमसे सुंदर युवती नहीं देखी।”

“क्रिस्टियन! मैंने आज तक
तुमसे खूबसूरत युवक नहीं देखा।”

उसने दुष्टता से मुस्कुराते हुए स्प्रेडर बार की ओर हाथ बढ़ाए। उसने मेरे बाएं टखने को जकड़ा और बेड़ी लगा दी। फिर उसने बेड़ी के पट्टे में अपनी अंगुली डाल कर देखी कि कहीं वह मेरी चमड़ी पर ज्यादा तो नहीं कसा गया। उसे कुछ भी बताने की जरूरत नहीं कि वह क्या कर रहा है। वह पहले भी ऐसा कर चुका है।

“मिस स्टील! अब आप देखें कि मैं क्या करने वाला हूं।”

उसने मेरे पांव बेड़ियों में इस तरह जकड़ दिए कि वे करीब दो फीट खुल गए।

“इस स्प्रेडर की एक खूबी यह भी है कि यह फैल जाता है।” उसने बार में कुछ दबा कर खींचा, मेरी टांगें और भी फैल गईं। ओह! तीन फीट चौड़ी। मेरा मुंह खुला का खुला रह गया और मैंने गहरी सांस ली। ये सब कितना हॉट है। मैं तो जैसे अन्दर ही अन्दर सुलग रही हूं…..

क्रिस्टियन ने निचला होंठ चाटा।

“एना! हम इसके साथ बहुत सा मज़ा ले सकते हैं।” उसने बार को पकड़कर मोड़ा तो मैं अचानक अपने आगे की ओर पलट गई। इस बात ने मुझे हैरानी में डाल दिया।

“देखा, मैं तुम्हारे साथ क्या कर सकता हूं।” उसने एक बार फिर मुझे मेरी पीठ के बल लिटा दिया और मैं बेदम होकर उसे ही ताक रही हूं।

“ये दूसरी हथकड़ियां तुम्हारी कलाईयों के लिए हैं। मैं इनके बारे में सोचूंगा। ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि तुम अच्छी तरह से पेश आओगी या नहीं?”

“मैं अच्छी तरह से पेश कब नहीं आई?”

“मैं कुछ घटनाएं तो याद कर ही सकता हूं। उसने मेरे पैर के तलवों पर अंगुलियां चलाते हुए कहा।” हल्की-सी गुदगुदी हुई पर मैं पैर नहीं हिला सकती।

“जैसे तुम्हारा ब्लैकबेरी!”

“ओह! तुम क्या करने जा रहे हो?”

“मैं कभी अपनी योजनाएं नहीं बताता” उसने शरारत से एक आंख दबाई।

ये तो हद दर्जे का सेक्सी इंसान है। वह पलंग पर रेंगता हुआ, मेरे घुटनों के पास आ गया।

“हम्म! मिस स्टील! आपको इस तरह देखने का भी अपना ही आनंद है।” वह मेरी टांगों के बीच हौले-हौले अंगुलियां फिराने लगा। हम लगातार एक-दूसरे की आंखों में देख रहे हैं।

“एना! यही तो खूबी है। तुम जान नहीं पातीं कि इसके बाद क्या होने वाला है। मैं तुम्हारे साथ क्या करूंगा?” उसके इन शब्दों ने बदन के सबसे कोमल हिस्से पर सीधा वार किया। मैं पलंग पर सिकुड़ कर कराही। उसकी अंगुलियां मेरी टांगों पर कसमसाती रहीं। बेशक मैं टांगें भींच लेना चाहती हूं पर चाह कर भी ऐसा नहीं कर सकती।

“याद रखना। अगर तुम्हें कुछ पसंद न आए तो तुम मुझे रुकने के लिए कह सकती हो।” उसने आगे आकर मेरे पेट पर छोटा-सा चुंबन दिया और उसके हाथों की हरकत जारी रही।

“ओह प्लीज क्रिस्टियन!” मैं गिड़गिड़ाई।

“ओह मिस स्टील। आप भी तो मुझ पर बहुत सख्ती दिखाती हैं तो मुझे बदला लेने का मौका मिलना चाहिए न?”

मैं कुछ न कर सकी और खुद को उसके और उसकी रेंगती अंगुलियों के हवाले कर दिया जो बदन के हर हिस्से पर लगातार रेंग रही थीं।

उसने अपना मुंह आगे किया और मुझे चूमने लगा। मैं उसके चुंबन का आंनद ले रही हूं पर साथ ही पूरा ध्यान अंगुलियों की हरकतों पर भी टिका है। बड़े ही अजीब से पल हैं, टांगें मोड़ न पाने के कारण, संवेदना और भी गहरी होती जा रही है। पूरे बदन में जैसे आग सी सुलग उठी है।

“ओह क्रिस्टियन!” मैं चिल्लाई।

“मैं जानता हूं बेबी!” उसने कहा।

“पहले मेरा नाम लो।”

“क्रिस्टियन!” मैं अपनी ही आवाज नहीं पहचान पा रही।

“फिर से एक बार कहो।”

“क्रिस्टियन!!!”

“फिर से।”

“क्रिस्टियन, क्रिस्टियन, क्रिस्टियन ग्रे!” मैं जोर से चिल्लाई।

“तुम मेरी हो।” उसने अपनी जीभ को मेरे होठों पर फिराया और और मैं चरम सुख की उस सुरंग के बीच गोल-गोल घूमती चली गई। अपनी सुध ही नहीं रही।

“बस इतना सा एहसास बाकी रहा कि उसने मुझे पेट के बल लिटा दिया है।”

“बेबी! हम इसे आज़माने जा रहे हैं। अगर तुम्हें बेचैनी महसूस हो या अच्छा न लगे तो हम इसे वहीं रोक देंगे।”

“क्या! मैं तो अपने ही मन में चल रहे विचारों में खोई हूं। मैं क्रिस्टियन की गोद में हूं। ये सब कब हुआ?”

“बेबी! नीचे झुको। वह मेरे कान में बोला। छाती और सिर पलंग पर रखो।”

मैंने बेसुधी में वही किया। उसने मेरे हाथ पीछे किए और उन्हें टखनों के पास बेड़ियों से जकड़ दिया। ओह! ये इसने कैसी अलग सी मुद्रा बना दी है?

“एना! तुम कितनी सुंदर दिख रही हो।”

मैंने फॉयल पैकेट खुलने की आवाज़ सुनी। उसने अपनी एक अंगुली मेरी पीठ से घुमाते हुए नितंबों के पास ले जाकर रोक दी।

“अगर तुम अपने-आप को तैयार कर सकीं तो मैं तुम्हारे साथ यह भी करना चाहूंगा।”

ओह! मुझे अचानक उसके दराजों में रखे वे प्लग याद आ गए।

अगले ही पल मैं एक नई मुद्रा में, उसके साथ अपनी जानी-पहचानी गलियों में जा पहुंची। जहां हम दोनों के सिवा किसी का कोई अस्तित्व नहीं था। वह लगातार मुझे ऐसे अनजान अँधेरे कोनों में ले जाता, जहां उसका साथ, उन कोनों को रोशन कर देता। मैंने खुद को पूरी तरह से उसके हवाले कर दिया। मैं जानती हूं कि मैं ऐसा कर सकती हूं। और फिर हम दोनों एक साथ ही…।

फिर उसने वे स्ट्रेप खोल दिए और मैं पूरी तरह से आजाद हो कर, उसकी गोद में ही सिमट गई। वह बड़े ही दुलार से मेरे हाथ-पैर सहलाने लगा। शायद इसी दौरान मेरी आंख लग गई होगी।

जब दोबारा मुंह उठाया तो मैं उसकी गोद में गोल-मोल हुई पड़ी थी और वह मुझे ही ताक रहा था।

“एना! मैं तो तुम्हें इस तरह सारी जिंदगी सोते देख सकता हूं।” उसने मेरा माथा चूम लिया।

“मैं चाहता हूं कि तुम हमेशा मेरे साथ रहो।” उसने अपनेपन से मुझे गलबांही दी।

“हम्म! मैं कभी नहीं जाना चाहती। मुझे कभी अपने से अलग मत करना।” मैंने नींद-नींद में ही कहा।

मुझे तुम्हारी ज़रूरत है। मुझे उसके शब्द सुनाई दिए। मैं इन्हीं शब्दों की गूंज के बीच गहरी नींद में समा गई। उस रात मुझे नींद में भी तांबई बालों वाला मैला-कुचला बच्चा दिखता रहा, जो मुझे देखकर शरमाते हुए मुस्कुरा रहा था।