Neem Karoli Baba: उत्तराखंड की शांत वादियों में बसे कैंची धाम की मिट्टी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। श्रद्धालु इसे घर ले जाकर अपने दुख-दर्द दूर करने की उम्मीद रखते हैं। ऐसा क्यों है कि इस धाम की साधारण सी मिट्टी भी लोगों के लिए चमत्कारी बन जाती है? इसके पीछे की आस्था और नीम करोली बाबा से जुड़ी कहानी बेहद रोचक और अद्भुत है।
नीम करोली बाबा कौन थे? क्यों है चमत्कारी संत?
नीम करोली बाबा 20वीं सदी के एक ऐसे संत थे जिनकी लोकप्रियता भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी फैली। बाबा को एक सच्चे योगी और सिद्ध महापुरुष माना जाता है। उनके जीवन से जुड़े कई ऐसे प्रसंग हैं जिन्हें लोग आज भी चमत्कार के रूप में याद करते हैं। चाहे ट्रेन को रुकवा देना हो या बिना कहे किसी के मन की बात जान लेना, ऐसे अनेक किस्से बाबा की दिव्यता को दर्शाते हैं। उनके भक्तों का मानना है कि बाबा की आत्मा आज भी कैंची धाम में विद्यमान है और वहीं से लोगों की मुरादें पूरी होती हैं।
कैंची धाम की मिट्टी क्यों मानी जाती है चमत्कारी?
कैंची धाम की मिट्टी को लेकर मान्यता है कि इसमें बाबा की तपस्या और ऊर्जा समाई हुई है। जो भी इस मिट्टी को श्रद्धा से घर लाता है, उसे मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और स्वास्थ्य लाभ मिलने लगता है। कुछ भक्त इसे बीमार बच्चों के तकिए के नीचे रखते हैं, तो कुछ अपने नए व्यापारिक स्थल पर सफलता की कामना के साथ स्थापित करते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि बाबा ने इसी भूमि पर वर्षों तक साधना की थी, जिससे ये स्थान और इसकी मिट्टी आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गई। आज भी जो यहां आता है, वो खाली हाथ नहीं लौटता, यह एक विश्वास नहीं, जीवन का अनुभव है।
विदेशों तक फैला है बाबा का प्रभाव
नीम करोली बाबा की प्रसिद्धि सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही। अमेरिका के एप्पल कंपनी के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने जब अपने जीवन में दिशा की तलाश शुरू की, तो वे भारत आए और बाबा के कैंची धाम में रुके। जॉब्स के बाद फेसबुक के संस्थापक मार्क ज़ुकरबर्ग भी बाबा की शिक्षाओं से प्रभावित हुए और भारत आकर कैंची धाम पहुंचे। इन बड़े नामों के ज़रिए बाबा की आध्यात्मिक शक्ति और कैंची धाम की पहचान पूरी दुनिया में फैल गई। अब तो कई विदेशी नागरिक हर साल इस पावन भूमि पर आकर आशीर्वाद लेते हैं और मिट्टी को घर ले जाकर पूजा में रखते हैं।
अब सरकार भी दे रही है कैंची धाम को तवज्जो
उत्तराखंड सरकार कैंची धाम को एक बड़े धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है, इसलिए अब सुविधाओं को बेहतर करने का काम भी तेज़ हो गया है। राज्य सरकार की योजना है कि धाम तक पहुंचने वाले रास्ते को चौड़ा किया जाए, ठहरने के लिए धर्मशालाएं बनाई जाएं और एक आध्यात्मिक कॉरिडोर तैयार किया जाए ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन में कोई कठिनाई ना हो। यह सिर्फ पर्यटन नहीं, बल्कि देश की आध्यात्मिक विरासत को संजोने और प्रचारित करने की दिशा में एक अहम कदम है।
