नवरात्रि में कोई अष्टमी और कोई नवमी क्यों पूजते हैं?: Ashtami and Navami Puja
Ashtami and Navami 2024 Puja

नवरात्रि में कोई अष्टमी और कोई नवमी क्यों पूजते हैं?

Ashtami and navami 2024 : नवरात्रि में कुछ लोग अष्टमी और कुछ लोग नवमी पूजते हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह क्या है?

Ashtami and Navami Puja: नवरात्रि में कुछ लोग अष्टमी और कुछ लोग नवमी को पूजते हैं, जिसके पीछे की अलग-अलग मान्यताएं हो सकती हैं। दरअसल, नवरात्रि में अष्टमी और नवमी, दोनों अलग-अलग दिन बनाई जाती है, क्योंकि दोनों ही दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप में की पूजा होती है। ऐसे में अलग-अलग लोग इसे अलग-अलग तरह से पूजते हैं। नवरात्रि में कुछ लोग अष्टमी और कुछ लोग नवमी पूजने के पीछे न सिर्फ धार्मिक मान्यताएं हैं, बल्कि क्षेत्रिय और व्यक्तिगत आस्था की वजह से भी लोग अलग-अलग पूजते हैं। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से-

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Ashtami and Navami Puja
Asthami Puja

अष्टमी के दिन महागौरी की पूजा होती है। महागौरी को समर्पित यह दिन विशेष रूप से शक्ति, शांति और समृद्धि की कामना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। जिन लोगों को महागौरी के प्रति आस्था होती है, वे इस दिन को पूजना अच्छा मानते हैं।

वहीं, कई अलग-अलग स्थानों पर अष्टमी के दिन कन्या पूजन होता है, जहां नौ कन्याओं और एक बालक (कुमार) को देवी के रूप में पूजकर भोजन कराया जाता है। यह व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है। वहीं, कई अगर किसी की कुल देवी महागौरी होती है, तो उन लोगों के यहां भी इस दिन को विशेष रूप से पूजते हैं।

नवमी को देवी दुर्गा के सिद्धिदात्री रूप की पूजा की जाती है, जो सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली मानी जाती हैं। यह दिन पूर्णता का प्रतीक है और इसके साथ नवरात्रि का समापन होता है। कुछ स्थानों पर नवमी के दिन भी कन्या पूजन किया जाता है, जो पूरे नवरात्रि के उपवास और पूजा का समापन माना जाता है। मुख्य रूप से जो लोग नौ दिनों का व्रत रखते हैं, वे इस दिन विशेष रूप से कन्या पूजन करते हैं। वहीं, आस्था भी निर्भर करती है।

Navami Kanya Puja
Navami Kanya Puja

पारंपरिक मतभेद: भारत के विभिन्न क्षेत्रों में नवरात्रि के दौरान पूजा के दिनों में भिन्नता हो सकती है। कुछ लोग अष्टमी को प्रमुख दिन मानते हैं, तो कुछ नवमी को।

वैश्विक कारण: इसके अलावा, कई लोग अपनी व्यक्तिगत सुविधाओं या पारिवारिक परंपराओं के आधार पर अष्टमी या नवमी के दिन पूजा करते हैं।

इसलिए, यह भिन्नता धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक परंपराओं पर आधारित होती है। ऐसे में आप कन्या पूजन को लेकर कंफ्यूज न हों। आपकी जिस दिन पूजन करने की आस्था हो, आप उस दिन कन्या पूजन कर सकते हैं।

निक्की मिश्रा पिछले 8 सालों से हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लिख रही हैं। उन्होंने ग्वालियर के जीवाजी यूनिवर्सिटी से इकनॉमिक्स में एमए और भारतीय विद्या भवन से जर्नलिज़्म की पढ़ाई की है। लिखना उनके लिए सिर्फ एक प्रोफेशन...