Overview:नाखून चबाना सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि दिमाग की गहराई से जुड़ा व्यवहार है
नाखून चबाना सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि यह आपकी मानसिक स्थिति का आईना हो सकता है। चाहे आप खुद ये आदत अपनाते हों या किसी और को ऐसा करते देखें, इसे नजरअंदाज़ न करें। सही समझ, समय पर जागरूकता और थोड़े से प्रयास से इस आदत से छुटकारा पाया जा सकता है।
Nail Biting Habit: आपने कई लोगों को बैठे-बैठे या सोचते हुए नाखून चबाते देखा होगा — और हो सकता है कि आप खुद भी ऐसा करते हों। ये आदत देखने में भले ही मामूली लगे, लेकिन इसके पीछे का मनोविज्ञान काफी दिलचस्प और कभी-कभी चिंताजनक भी हो सकता है। नाखून चबाना (Nail Biting), जिसे मेडिकल भाषा में ‘ऑनिकोफेजिया’ कहा जाता है, कई बार तनाव, बोरियत या अनजाने डर का संकेत हो सकता है। बच्चे हों या वयस्क, ये आदत किसी को भी लग सकती है। तो आखिर क्यों करते हैं लोग ऐसा? क्या ये सिर्फ एक बुरी आदत है या इसके पीछे दिमाग की कोई गहरी बात छिपी होती है?
तनाव और चिंता से राहत पाने की कोशिश
जब हम तनाव में होते हैं या परेशान होते हैं, तो शरीर किसी न किसी रूप में उस दबाव को कम करने की कोशिश करता है। नाखून चबाना उसी तनाव को “चैनलाइज” करने का एक तरीका हो सकता है, जो अस्थायी राहत देता है।
बोरियत और खालीपन में बढ़ती है ये आदत
कई लोग तब नाखून चबाते हैं जब उन्हें करने को कुछ खास नहीं होता। बोरियत में ये आदत एक तरह से “टाइम पास” का काम करती है, खासकर तब जब दिमाग एक जगह स्थिर नहीं हो पाता।
परफेक्शनिज्म की निशानी हो सकती है ये आदत
कई बार अत्यधिक परफेक्शनिस्ट लोग भी अपने नाखूनों की छोटी-छोटी कमियों से परेशान होकर उन्हें चबाना शुरू कर देते हैं। ये एक मानसिक असंतुलन का संकेत भी हो सकता है, जिसमें व्यक्ति खुद पर अत्यधिक दबाव बनाता है।
बचपन से बनी आदत जो उम्र के साथ छूटती नहीं
अगर किसी व्यक्ति ने बचपन में नाखून चबाना शुरू किया है, तो यह आदत इतनी गहरी बैठ जाती है कि बड़े होने के बाद भी वह अनजाने में ऐसा करता रहता है। यह एक तरह की ‘कंपल्सिव हैबिट’ बन जाती है।
आत्मविश्वास की कमी का भी हो सकता है संकेत
कुछ मामलों में, नाखून चबाने की आदत आत्मविश्वास की कमी या सामाजिक असहजता से जुड़ी होती है। खासकर जब व्यक्ति किसी सामाजिक स्थिति में खुद को असहज महसूस करता है, तो यह आदत उभर सकती है।
शरीर और दिमाग को मिलती है अस्थायी राहत
नाखून चबाने से दिमाग को हल्की सेंसरी उत्तेजना मिलती है जो कुछ लोगों को अंदर से सुकून देती है। यह ‘सेल्फ-सूथिंग’ आदत बन जाती है, खासकर उन लोगों में जो बार-बार भावनात्मक असंतुलन से गुजरते हैं।
कैसे छुड़ाएं ये आदत
इस आदत से छुटकारा पाने के लिए खुद को जागरूक बनाना सबसे जरूरी है। नाखूनों पर कड़वा नेल पेंट लगाना, स्ट्रेस बॉल का इस्तेमाल करना या फिर थैरेपी लेना कुछ ऐसे उपाय हैं, जो असरदार हो सकते हैं।
