Hand holding a smartphone displaying the WhatsApp app screen.
Government to introduce SIM Binding rules for Whatsapp users from February

Summary: क्या बंद हो जाएगा बिना सिम वाला WhatsApp? सरकार के आदेश से मचा हलचल

फरवरी 2026 से WhatsApp, Telegram और Signal जैसे मैसेजिंग ऐप्स पर सिम बाइंडिंग लागू हो सकती है, जिससे इस्तेमाल का तरीका बदल जाएगा।

WhatsApp Sim Binding Feature: फरवरी 2026 से भारत में WhatsApp समेत कई मैसेजिंग ऐप्स को इस्तेमाल करने का तरीका बदल सकता है। दरअसल, नवंबर 2025 में सरकार ने Telegram और Signal जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को सिम बाइंडिंग लागू करने का निर्देश दिया था। इस आदेश को लागू करने के लिए कंपनियों को 90 दिन का समय दिया गया था, जिसकी समयसीमा फरवरी 2026 में पूरी हो रही है। अगर सरकार की ओर से आखिरी समय में कोई राहत या बदलाव नहीं किया जाता, तो आने वाले कुछ ही दिनों में यूजर्स को WhatsApp चलाने के लिए नए नियमों का पालन करना होगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या आम यूजर्स का WhatsApp इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाएगा?

क्या है सिम बाइंडिंग?

सिम बाइंडिंग का सीधा मतलब है कि जिस मोबाइल नंबर से आपने ह्वाट्सऐप या किसी अन्य मैसेजिंग ऐप पर अकाउंट बनाया है, वही सिम कार्ड आपके फोन में लगा होना जरूरी होगा। अगर आप वह सिम निकाल देते हैं या किसी दूसरे फोन में डाल देते हैं, तो उस डिवाइस पर WhatsApp काम करना बंद कर सकता है।

अब तक WhatsApp जैसे ऐप्स में सिर्फ एक बार मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन करना होता था, जिसके बाद यूजर्स बिना सिम लगे भी ऐप को अलग-अलग डिवाइसेज पर इस्तेमाल कर सकते थे। लेकिन सिम बाइंडिंग लागू होने के बाद ऐसा संभव नहीं रहेगा।

मल्टी-डिवाइस, डेस्कटॉप यूज पर क्या पड़ेगा असर?

सिम बाइंडिंग लागू होने की स्थिति में मल्टी-डिवाइस फीचर काफी हद तक सीमित हो सकता है। यानी एक ही WhatsApp अकाउंट को कई फोन में बिना बार-बार वेरिफिकेशन के चलाना मुश्किल हो जाएगा।

इसके अलावा, जो मैसेजिंग ऐप्स डेस्कटॉप या लैपटॉप वर्जन को सपोर्ट करती हैं, उन्हें हर 6 घंटे में ऑटोमैटिक लॉग-आउट करना होगा। इसका मतलब यह है कि अगर आप ऑफिस या काम के सिलसिले में कंप्यूटर पर WhatsApp इस्तेमाल करते हैं, तो हर कुछ घंटों में आपको फिर से QR कोड स्कैन कर अकाउंट लिंक करना पड़ सकता है।

क्यों लिया गया यह फ़ैसला?

Whatsapp new rules
Soon, users wouldn’t be able to use Whasapp on phone without SIM

इस फैसले के पीछे मुख्य वजह ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर अपराधों पर लगाम लगाना बताई जा रही है। टेलीकम्युनिकेशन विभाग (DoT) के अनुसार, कई साइबर अपराधी भारतीय मोबाइल नंबर वाली सिम को विदेश में इस्तेमाल कर या इंटरनेट कॉलिंग के जरिए लोगों को ठगते हैं।

एक बार नंबर वेरिफाई होने के बाद WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म्स को कई डिवाइसेज पर इस्तेमाल किया जा सकता था, जिससे अपराधियों को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था। सिम बाइंडिंग से यह सुनिश्चित होगा कि अकाउंट और सिम एक ही डिवाइस से जुड़े रहें, जिससे जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों तक पहुंच आसान हो सके।

आम यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?

अगर सुरक्षा के नजरिए से देखा जाए, तो सिम बाइंडिंग से ऑनलाइन धोखाधड़ी और फर्जी अकाउंट्स पर कुछ हद तक लगाम लग सकती है। साथ ही यूजर्स की प्राइवेसी को भी बेहतर तरीके से सुरक्षित करने का दावा किया जा रहा है।

हालांकि, सुविधा के मामले में यह नियम कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। एक ही फोन में अलग-अलग WhatsApp अकाउंट चलाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। इसके अलावा, जो लोग अपने सेकेंडरी फोन या टैबलेट में बिना सिम डाले WhatsApp इस्तेमाल करते हैं, उन्हें भी दिक्कत हो सकती है।

डेस्कटॉप वर्जन का बार-बार लॉग-आउट होना प्रोफेशनल्स, फ्रीलांसर्स और बिजनेस यूजर्स के लिए समय और कामकाज में बाधा पैदा कर सकता है।

अभिलाषा सक्सेना चक्रवर्ती पिछले 15 वर्षों से प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में दक्षता रखने वाली अभिलाषा ने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान टाइम्स, भोपाल से की थी। डीएनए, नईदुनिया, फर्स्ट इंडिया,...