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काउंसिलिंग के जरिए एक दूजे को समझें विवाह-पूर्व काउंसिलिंग से जीवनसाथी के बीच संवाद स्तर सुधारने और शादी के लिए वास्तविक लक्ष्य तैयार करने में मदद मिलती है। काउंसिलिंग से दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक विचार पैदा होते हैं। साथ-साथ ट्रांस फैट भी होता है, जो अधिक सेवन करने से आपका वजन बढ़ा सकता है।

विवाह किसी दंपती की जिंदगी में सबसे महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम होता है। यह उनके लिए अनजान रास्ता होता है। हालांकि विवाह से ऐसे विभिन्न पहलू जुड़े होते हैं, जिनसे लोग तब तक वाकिफ नहीं होते, जब तक कि वे इसका वास्तविक तौर पर अनुभव नहीं कर लेते। पुरुष और महिला, दोनों की शारीरिक, भावनात्मक और यौन संबंध जैसी जरूरतें अलग-अलग होती हैं।

यहां तक कि सोचने और समझने का तरीका भी एक-दूसरे से भिन्न होता है। खासकर, आधुनिक समय में सभी लोग अपने मौलिक अधिकारों से अच्छी तरह से अवगत होते हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए विवाह टूटने की संभावनाएं ज्यादा हैं। दरअसल, यह मायने नहीं रखता कि वह लव मैरिज है या अरेंज्ड, आपको मुहैया कराई जाने वाली काउंसिलिंग दोनों तरह की शादियों में समान रूप से महत्त्वपूर्ण होती हैं। विवाह-पूर्व काउंसिलिंग से दंपती को शादी से पहले संबंध सुधारने में मदद मिलती है। नीचे ऐसे सुझाव दिए जा रहे हैं, जिनमें विवाह-पूर्व काउंसिलिंग के दौरान निम्नलिखित विषयों पर चर्चा की जाती है

आॢथक स्थिति बर्ताव एक दूसरे पर भरोसा वैवाहिक जिम्मेदारियां शारीरिक संबंध बच्चे और पालन पोषण निर्णय लेने की क्षमता गुस्से पर नियंत्रण एक साथ समय बिताना

अपनी शादी से पहले इन सब पर चर्चा करने से दोनों पक्षों को शादी की उम्मीदों के संबंध में संतुष्ट होने में मदद मिलेगी। इससे आपको समस्याओं (यदि कोई हो तो) को अच्छी तरह से समझने में मदद मिलेगी, और उनके समाधान में आसानी होगी।

विवाह-पूर्व काउंसिलिंग का मुख्य उद्देश्य

दूल्हा और दुलहन को शादी की महत्ता समझने के लिए तैयार करना विवाह-पूर्व काउंसिलिंग का मुख्य उद्देश्य है। ऐसे परामर्श से उन्हें स्वयं में बदलाव लाने और अपने जीवनसाथी के साथ समायोजित होने की मानसिकता विकसित करने में मदद मिलती है।

जब दूल्हा या दुलहन शादी के लिए मानसिक तौर पर तैयार हो जाते हैं, तो अगला कदम होता है उपयुक्त जीवनसाथी का चयन करना। व्यक्तिगत गुणों के बजाय दोनों पार्टनर के बीच अनुकूलन या संगतता का आकलन जरूरी होता है। यह कठिन कार्य होता है, क्योंकि उस समय प्रत्येक पार्टनर अपने नकारात्मक विचारों को छिपाने और अच्छे विचारों को सामने लाने की कोशिश करता है।

एक-दूसरे के साथ कैसा संबंध रखा जाएगा, इसका अनुमान लगाना भी कठिन होता है, चाहे लव मैरिज हो या अरेंज्ड, या अरेंज्ड- कम-लव मैरिज। इंटर-कास्ट, इंटररिलीजियस, या विदेशी के साथ शादी कुछ ऐसी महत्त्वपूर्ण स्थितियां हैं, जो शादी से पहले उपयुक्त ध्यान नहीं दिए जाने पर भविष्य में समस्या पैदा कर सकती हैं।

काउंसिलिंग के दौरान, दोनों से एक-दूसरे और अपने स्वयं के विवाह संबंधों के बारे में उनका नजरिया जानने के लिए लिखित तौर पर जवाब देने के लिए अलग-अलग सवाल पूछे जाते हैं। इस तरह के सत्रों में जिन मुद्दों पर खास चर्चा होती है, उनमें शामिल हैं- लिंग समानता, उदारीकरण और समाज की स्वायत्तता, महिलाओं द्वारा पालनकर्ता के तौर पर समान जिम्मेदारी संभालना, छोटे परिवार, लाइफस्टाइल और दैनिक जीवन के तनाव मुख्य हैं। इस तरह के परामर्श से आपको उन कमजोरियों का पता लगाने में भी मदद मिल सकती है जो शादी के बाद समस्याएं पैदा कर सकती हैं।

ध्यान रखें कि आप अपने मूल्यों, राय और बीते समय को रिश्ते में उजागर करते हैं और वे हमेशा आपके जीवनसाथी के अनुरूप नहीं हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, पारिवारिक व्यवस्थाएं और धार्मिक मान्यताएं अलग होती हैं। कई लोग इस भरोसे के साथ शादी करते हैं कि इससे उनकी सामाजिक, वित्तीय, यौन सुख और भावनात्मक जरूरतें पूरी होंगी लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता है। शादी से पहले इस तरह के मौजूदा मतभेदों और उम्मीदों पर चर्चा कर, आप और आपके जीवनसाथी को अपनी वैवाहिक जिंदगी में एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझने और सहायक होने में मदद मिल सकती है

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