Overview: भगवान को ताजे फूल ही क्यों प्रिय होते हैं
भगवान को चढ़ाई गई माला को रात में हटाना शुभ माना जाता है। मुरझाए फूल नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकते हैं, इसलिए सुबह-सुबह पुराने फूल हटाकर ताजे फूल अर्पित करना सबसे बेहतर है।
Vastu Shastra: भारत में पूजा-पाठ की परंपराओं का अपना एक अलग महत्व है। हमारे घरों और मंदिरों में भगवान को फूल अर्पित करना और उनके गले में सुंदर फूलों की माला पहनाना भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। यह न केवल भगवान के प्रति प्रेम और सम्मान दर्शाता है, बल्कि घर के वातावरण में भी सकारात्मक ऊर्जा फैलाता है।
लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या भगवान को चढ़ाई गई फूलों की माला रातभर वैसे ही रहने दी जाए या इसे रात में हटा लेना चाहिए। यह सवाल धार्मिक मान्यताओं, सफाई और पूजा की शुद्धता तीनों से जुड़ा हुआ है। आइए शास्त्रों और वास्तु के अनुसार जानते हैं इसका सही उत्तर।
भगवान को ताजे फूल ही क्यों प्रिय होते हैं
शास्त्रों में वर्णन है कि भगवान को गंध, रंग और ताजगी से भरपूर फूल अत्यंत प्रिय होते हैं। ताजे फूल पूजा में शुभता और पवित्रता का प्रतीक माने जाते हैं। लेकिन जैसे ही फूल मुरझाने लगते हैं, वे अपवित्र हो जाते हैं।
इसलिए मुरझाए हुए फूल या माला को भगवान पर लंबे समय तक रखना उचित नहीं माना गया है। अगर फूल सूख जाएं या उनमें से खुशबू खत्म हो जाए, तो तुरंत उन्हें हटा देना चाहिए। इससे पूजा की पवित्रता बनी रहती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।
रात्रि में भगवान का विश्राम और माला हटाने का कारण
शास्त्रों के अनुसार, जैसे मनुष्य दिनभर काम करने के बाद रात में विश्राम करता है, वैसे ही देवताओं का भी विश्राम का समय होता है। रात का समय भगवान के आराम का समय माना गया है।
यदि रात में भगवान के ऊपर माला, फूल, आभूषण या वस्त्रों का भार अधिक समय तक रहे, तो यह उन्हें कष्टकारी हो सकता है। इसलिए पंडितों की सलाह है कि रात को सोने से पहले भगवान को चढ़ाई गई माला हटा लेनी चाहिए। इससे न केवल शास्त्रीय नियमों का पालन होता है बल्कि पूजा स्थल स्वच्छ और ऊर्जावान बना रहता है।
अगर रात में माला हटाना भूल जाएं तो क्या करें
कई बार ऐसा होता है कि व्यस्तता या भूलवश रात को माला नहीं हट पाती। ऐसे में सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि कर लें और फिर आदरपूर्वक भगवान के गले से फूलों की माला हटा दें।
मुरझाए हुए फूलों को सीधे कूड़े में फेंकना उचित नहीं है। इन्हें या तो तुलसी के पौधे के पास मिट्टी में दबा दें या फिर किसी पवित्र नदी या तालाब में प्रवाहित करें। यह तरीका शुद्ध और धार्मिक दृष्टि से सही माना जाता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार फूलों की माला का महत्व
वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा स्थल में ताजे फूल अर्पित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। लेकिन अगर वही फूल लंबे समय तक वैसे ही रखे रहें और सूख जाएं, तो वे नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने लगते हैं। इससे घर का वातावरण भारी हो सकता है और परिवार के सदस्यों के बीच तनाव बढ़ सकता है।
इसलिए वास्तु विशेषज्ञों की सलाह है कि सुबह अर्पित किए गए फूलों को शाम को सूर्यास्त के बाद हटा देना चाहिए। अगले दिन ताजे और सुगंधित फूलों से भगवान का श्रृंगार करना शुभ माना जाता है।
फूलों की देखभाल के सही नियम
हमेशा ताजे और सुगंधित फूल ही भगवान को अर्पित करें।
मुरझाए या सूख चुके फूल कभी भी भगवान को न चढ़ाएं।
पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखें और वहां से पुराने फूल समय पर हटा दें।
फूल हटाते समय भगवान के प्रति आदर और भाव बनाए रखें।
पुराने फूलों को पवित्र स्थान पर ही विसर्जित करें।
