मंदिर में भगवान पूजे जाते हैं… हैं न। लेकिन अगर कोई कहे कि एक ऐसा मंदिर भी है, जहां भगवान के साथ आज की दुनिया को आधुनिक बनाने वाले वैज्ञानिकों को भी पूजा जाता है तो जरूर आप ताज्जुब करेंगे। लेकिन ये बिलकुल सच है। राजस्थान के पिलानी में एक ऐसा मंदिर 1959 में ही बनवा दिया गया था। राज्य के दुनियाभर में प्रसिद्ध संस्थान बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, पिलानी के कैम्पस में बना ये शारदा पीठ पिलानी मंदिर भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहता है। इस मंदिर के आस-पास तो इसकी अहमियत है ही इसको देखने दूर-दूर से भी लोग आते हैं। ये मंदिर अपने आप में अनोखा है और आपको इसकी अलहदा खासियतें जरूर देखनी चाहिए। इस मंदिर की सभी खासियतों पर नजर डालिए-
मां सरस्वती का मंदिर-
मंदिर शारदा पीठ, पिलानी करीब 60 साल पहले प्रसिद्ध बिजनेसमैन जीडी बिरला ने बनवाया था। ये मंदिर खासतौर पर मां सरस्वती को समर्पित है। ये मंदिर संस्थान के विद्या विहार कैम्पस के अंदर बना है और बेहद सुंदर भी है। 
खजुराहो से है कनेक्शन-
मकराना से लाए सुंदर मार्बल से बना ये मंदिर इंडो-आर्यन स्टाइल में बनाया गया है। असल में मंदिर खजुराहो के कंदरिया महादेव मंदिर से प्रेरित है। मध्य प्रदेश के खजुराहो में बना ये मंदिर, खजुराहो के एक मंदिर समूह में सबसे बड़ा है। कंदरिया महादेव मंदिर का निर्माण तो 1050 ईंसवीं में महमूद गजनवी पर अपनी जीत के बाद चंदेल राजा विद्याधर ने बनवाया था। ये मंदिर करीब 107 फुट ऊंचा है। 
पांच भाग में बंटा-
इस खास मंदिर को पांच भागों में बांटा गया है। गर्भगृह, प्रदक्षिणापथ, अतराल, मंडपम और अर्ध मंडपम। इन सभी पांच स्थानों को घूमते हुए आप शायद थक जाएं लेकिन आपका मन बिलकुल भी नहीं भरेगा। इन सभी भागों की सुंदरता आपका दिल जरूर जीत लेगी। 
भगवान के साथ वैज्ञानिक-
आपने कभी सुना है साइंटिस्ट आइंस्टीन की पूजा की हो किसी ने। बड़ी से बड़ी खोज करने वाले वैज्ञानिक हों या पूजा करने वाले भक्त किसी को भी अगर आपने आइंस्टीन या इन जैसे किसी किसी जानकार की पूजा करते नहीं देखा है तो आपको पिलानी के इस मंदिर में जरूर आना चाहिए। इस मंदिर में भगवानों के साथ कई वैज्ञानिकों की पूजा भी की जाती है। यहां आइंस्टीन के साथ कई दूसरे धुरंधरों की कलाकृतियां देखी जा सकती हैं। 
बड़ा नहीं बहुत बड़ा-
ये मंदिर सिर्फ बड़ा नहीं है बल्कि बहुत बड़ा है। इसमें 70 खंभे हैं तो सिर्फ शिखर ही 110 फीट का है। मंदिर का पूरा ढांचा एक 7 फीट ऊंचे बेसमेंट पर बना है जबकि मंदिर इसका आकार 25000 स्क्वायर फीट के क्षेत्र में बना है। इसके साथ ही सभी शिखर पर एक-एक कलश रखा है, जो कि कि तांबे पर सोने की पोलिश से बने हैं।