Tokophobia
Tokophobia

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इंडियन जर्नल ऑफ साइकेट्री के अनुसार कुछ महिलाएं बच्चे को जन्म देने की बात सुनकर ही डरने लगती हैं। उन्हें गर्भधारण करने से घबराहट होती है। इस डिसऑर्डर को टोकोफोबिया कहा जाता है।

Tokophobia: अंजलि और सुरभि बचपन की दोस्त हैं। अंजलि ने जब पहले बच्चे को जन्म दिया तो सुरभि उससे मिलने गई। बातचीत के दौरान सुरभि का पूरा फोकस यह जानने पर था कि प्रसव के दौरान अंजलि को कितना दर्द हुआ और उसका अनुभव कितना डरावना था। जब अंजलि ने सुरभि से मां बनने के बारे में पूरा तो उसने इससे साफ इंकार कर दिया। सुरभि का तर्क था कि वह प्रसव का दर्द सहन ही नहीं कर सकती। सुरभि ही नहीं, आज के समय में ऐसी हजारों-लाखों महिलाएं हैं जो प्रसव के दर्द की कल्पना मात्र से परेशान हो जाती हैं। असल में वे ‘टोकोफोबिया’ का शिकार होती हैं। पिछले कुछ सालों में दुनियाभर में टोकोफोबिया से पीड़ित महिलाओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। क्या है टोकोफोबिया और कैसे करें इसे डील, आइए जानते हैं।

Some women start getting scared just by hearing about giving birth to a child.
Pregnant Working Women

इंडियन जर्नल ऑफ साइकेट्री के अनुसार कुछ महिलाएं बच्चे को जन्म देने की बात सुनकर ही डरने लगती हैं। उन्हें गर्भधारण करने से घबराहट होती है। इस डिसऑर्डर को टोकोफोबिया कहा जाता है। इसे पार्ट्यूरिफोबिया और मैसियोफोबिया भी कहते हैं। टोकोफोबिया ग्रीक भाषा से बना शब्द है। टोको का मतलब है ‘बच्चे को जन्म देना’ और फोबिया का अर्थ है ‘डर’। ऐसे में बच्चे को जन्म देने का डर टोकोफोबिया है। यह डर उन महिलाओं को भी होता है, जो प्रेगनेंट नहीं हैं। चिंता की बात यह है कि दुनियाभर की महिलाओं में टोकोफोबिया तेजी से फैल रहा है।    

चिंताजनक बात यह है कि भारत सहित दुनियाभर में टोकोफोबिया के मामले बढ़ रहे हैं। साल 2017 में सामने आए एक मेटा-विश्लेषण के अनुसार  दुनियाभर में करीब 14% गर्भवती महिलाएं टोकोफोबिया का शिकार थीं। साल 2023 में अमेरिका में हुए एक सर्वे में सामने आया कि वहां 62% गर्भवती महिलाएं बच्चे को जन्म देने से डरती हैं। भारत में भी यह आंकड़ा काफी ज्यादा है। बेंगलुरु के सप्तगिरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस की ओर से की गई एक रिसर्च में सामने आया कि 55.3% महिलाएं टोको​फोबिया का शिकार हैं। करीब 30.7% महिलाओं में यह डर बहुत ही गंभीर स्तर पर मिला। हैरानी की बात यह है कि इनमें से 38% महिलाएं दूसरी बार मां बनने जा रही थीं। वहीं 62% महिलाएं पहली बार गर्भवती हुई थीं। टोको​फोबिया के कारण महिलाएं नॉर्मल डिलीवरी से डरती हैं। 15.3% महिलाओं ने ऑपरेशन से बच्चे को जन्म देने की इच्छा जताई। 

टोकोफोबिया दो प्रकार के होते हैं। प्राइमरी टोकोफोबिया, जिसमें महिला बिना गर्भवती हुए ही बच्चे को जन्म देने से डरती है। वह कभी गर्भवती नहीं होना चाहती। दूसरा, सेकेंडरी टोकोफोबिया, इसमें महिला पहले गर्भवती हो चुकी होती है। लेकिन गर्भपात, अबॉर्शन या नॉर्मल डिलीवरी के दर्द के कारण डर जाती है। टोकोफोबिया को कुछ कोशिशों से कंट्रोल किया जा सकता है।

1. टोकोफोबिया का डर कम पढ़ी-लिखी महिलाओं में ज्यादा होता है। उन्हें नई तकनीक जैसे पेनलेस डिलीवरी की जानकारी देकर उनका डर कम किया जा सकता है। इससे प्रसव पीड़ा को 70 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

2. अगर महिला टोकोफोबिया का शिकार है तो उसपर गर्भधारण का दबाव बनाने से बेहतर है कि उसकी काउंसलिंग करवाएं। इससे काफी हद तक इस स्थिति पर काबू पाया जा सकता है।

3. आजकल ऐसी कई थेरेपीज हैं जो टोकोफोबिया को दूर करने में मददगार हैं। इन्हीं में शामिल है हिप्नोबर्थिंग थेरेपी। इसमें महिला को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान शांत रहना और सांसों को कंट्रोल करना सिखाया जाता है। इससे वह डर पर काबू कर लेती हैं। बिहेवियर थेरेपी भी काफी कारगर है।  

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...