टीनएजर की पर्सनेलिटी ग्रूमिंग: Grooming for Teenager
Grooming for Teenager

Grooming for Teenager: एक बच्चे का व्यवहार उसके पूरे परिवार की आदतों, संस्कारों का आईना होता है। आप क्या चाहते हैं, इस आईने में देखना, तय कीजिए कुछ इसी बारे में, इन टिप्स के द्वारा-

अगर आप भी टीनएजर बच्चे के माता पिता हैं या फिर आपका बच्चा किशोरावस्था की तरफ बढ़ रहा है तो यह अवस्था न केवल टीनएजर बच्चों के लिए, बल्कि आपके लिए भी सुखद अहसास होती हैं। ऐसे में पेरेंटस होने के नाते आपकी जिम्मेवारियां भी बढ़ जाती हैं। जैसे ही बच्चे टीनएज में पहुंचते हैं उनमें शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्तर पर बहुत से बदलाव होते हैं। भविष्य में वे जो भी होते हैं उसकी रूपरेखा इसी उम्र में बन जाती हैं, इसलिए उनकी पर्सनेलिटी गूमिंग कुछ ऐसी होनी चाहिए कि जो सभी को प्रभावित कर दें। एक प्लैजेंट पर्सनेलिटी के टीनएजर में वेलनेस, पॉजिटिविटी, भरपूर आत्मविश्वास, एटिकेट्स, उसके बोलने, उठने बैठने यहां तक कि खाना खाने का अंदाज, जिसे हम टेबल मैनर्स कहते हैं, वह भी शामिल होता है। इसके बिना बेइंतहा खूबसूरती भी बेकार है। ऐसी बहुत सारी प्रतियोगिताएं हैं, जिसमें सिर्फ आपकी खूबसूरती ही नहीं, बल्कि आपकी र्स्माटनेस, वेलनेस, कान्फिडेंस और पर्सनेलिटी को भी आंका जाता है। टीनएजर बच्चों की पर्सनेलिटी ग्रूमिंग करने की जिम्मेवारी पेरेंटस की भी होती हैं। ‘उन्नति पर्सनेलिटी डेवलपमेंट क्लासेज की हेड ‘गीता जी बता रही हैं कि कैसे अपने बच्चे की पर्सनेलिटी को निखारें।

Also read: पर्सनेलिटी केयर: स्ट्रॉन्ग पर्सनैलिटी पाइए पर्सनल हाइजीन से

अपने टीनएजर बच्चों में हेल्दी हैबिटस डालें। उन्हें रात में समय से सोने और सुबह जल्दी उठने की आदत डालें। उन्हें सोशल मीडिया के इस्तेमाल का सेफ तरीका पता होना चाहिए और वह एक सीमा और समय के तहत उसका इस्तेमाल करें।

सेफ ड्राइविंग के सारे रूल उन्हें पता होना चाहिए और वह उसी को फॉलो करें। शराब और सिगरेट पीना उनके लिए किस तरह से हानिकारक है, ये उन्हें पता होना चाहिए। इसके अलावा सेफ सेक्सुअल बिहेवियर पर भी उनसे बात करें। सच तो यह है कि पेरेंटस का एक महत्पवूर्ण रोल होता है बच्चों को एजुकेट करने में और उस भूमिका को आपको भली भांति निभाना है और उन्हें उनकी सुरक्षा से संबंधित हर बात सिखानी है। उन्हें बाहर अकेले जाने से रोके नहीं, बल्कि बाहर जाने पर वह अपना ध्यान कैसे रखें यह बताएं और सिखाएं, तभी उनकी पर्सनेलिटी निखर कर आएगी।

Grooming for Teenager
Update yourself

टीनएजर बच्चों को सिर्फ खुद पर ही ध्यान नहीं देना है, बल्कि देश-दुनियां में क्या हो रहा है। इस बात का पता होना भी जरूरी है। खुद भी अपडेट रहें और बच्चों को भी अपडेट रखें। अपने घर में नियम बनाएं कि दिन में आधा घंटा न्यूज चैनल जरूर चलेगा। इसके अलावा बच्चों को न्यूजपेपर पढ़ने की आदत भी डालें और समसामयिक विषयों पर मिलने वाली पत्रिकाओं में खुद भी रुचि लें, ताकि बच्चों का इंटरेस्ट भी उसमें बने।

जिंदगी हमारे सामने हर रोज कई चुनौतियां पेश करती है। जिंदगी कोई खेल नहीं है, जो सिर्फ सेफ जोन में ही खेला जाए। अपने बच्चों को परेशानियों से बचाएं नहीं, बल्कि उनका सामना करना सिखाएं। यहां हर दिन आपको कुछ नया टास्क मिलेगा। यही टास्क चुनौतियां होती हैं। इनसे घबराकर बच्चों को पीछे मत हटाइए, बल्कि इनका सामना करना सिखाएं। इस तरह छोटी-छोटी चुनौतियों का सामना करते-करते उनकी पर्सनेलिटी पूरी तरह चेंज हो जाएगी और उन्हें हर सिचुएशन को सही से हैंडल करना आ जाएगा।

अगर टीनएजर अपनी पढाई की वजह से या अन्य बातों की वजह से बहुत जल्दी गुस्से में आ जाते हैं, तनाव में रहते हैं या फिर पेशेंस लूज कर जाते हें तो इसके लिए मेडिटेशन करना बहुत अच्छा रहता है। आप चाहें तो सपरिवार सुबह के समय मेडिटेशन कर सकते हैं या फिर बच्चों को इसका महत्व समझाते हुए चाहें तो हफ्ते में एक बार ही सही, पर मेडिटेशन की शुरुआत अवश्य करें।

टीनएजर बच्चे को अपने इशारे पर ना चलाएं बच्चा आज कौन से कपड़े पहनेगा, उसके बाल कैसे कटवाने है, वह कौन सा प्रोग्राम देखेगा, वह क्या खाएगा, ये सब कुछ हद तक तो ठीक है, लेकिन हर वक्त अपनी मर्जी बच्चे पर ना थोपें बल्कि कई बार उससे खुद अपने बारे में फैसला लेने को कहें. उसे उसकी पसंद के कपड़े पहनाएं, उसकी पसंद के दोस्त बनाने दें, ताकि बच्चे को अपनी पसंद और नापसंद के बारे में पता हो और वह अपने हिसाब से बिना किसी की मदद के कुछ काम करना सीखें।

कई बार ऐसे मौके आते हैं जब हम किसी की मदद कर सकते हैं, लेकिन मदद करने में हम हिचकिचाते हैं। इसकी कई वजह होती हैं लगता है कि इसमें हमारा क्या फायदा है या फिर हम क्यों अपना समय और पैसा बर्बाद करें। सच तो यह है कि दूसरों की मदद न सिर्फ आपको दूसरों की नजरों में ऊंचा उठाएगी, बल्कि अपनी नजरों में भी आपको फील होगा कि आप ने कुछ अच्छा किया है। अपने बच्चों को छोटी-छोटी हेल्प करने के लिए कहें, ताकि उन्हें दूसरों की मदद करने की आदत हो जाएं। इसका मतलब यह भी नहीं है कि वह सारे काम छोड़कर बस दूसरों की मदद ही करते रहें। अगर थोड़ा वक्त देने पर वह किसी के काम आ सकें तो इसे उनकी पर्सनेलिटी का हिस्सा जरूर बनाएं। इससे सभी उनकी पर्सनेलिटी की इन बातों के कायल हो जाएंगे।

भले ही आप बहुत अमीर हों या फिर किसी प्रभावशाली परिवार से संबंध रखते हों, लेकिन अगर आपके जीवन में विनम्रता नहीं है तो आपका व्यक्तित्व कभी अच्छा नहीं हो सकता। अहंकार करने वाले व्यक्तियों को कोई पसंद नहीं करता। अगर आप घमंडी हैं तो आपके बच्चे भी वहीं बनेंगे, इसलिए अपने व्यवहार को बदलें। अगर आप चाहते हें कि आपके बच्चे विनम्र बनें तो पहले आपको विनम्र बनना होगा।

कभी भी किसी को धोखा ना दें और ना ही किसी का भरोसा तोड़ें। जीवन में विश्वास बहुत बड़ी चीज है। अगर एक बार विश्वास टूटा तो लोग आप पर भरोसा करना छोड़ देंगे, इसलिए बच्चों के विश्वास को कभी ना तोड़ें, उनसे जो प्रॉमिस किया जरूर पूरा करें और उन्हें भी ऐसा ही करना सिखाएं।

आजकल टीनएजर बच्चों के लिए भी पर्सनेलिटी ग्रूमिंग की क्लासेज होती है, जिसमें बच्चों को उनके हाव भाव, उठने बैठने, खाने का तरीका, इंटरव्यू की पर्सनेलिटी और बहुत सी बातें सिखाई जाती हैं। इससे बच्चों की पर्सनेलिटी में बहुत चेंज आता है और उनमें कॉन्फिडेंस भी बढ़ता है इसलिए छुट्टियों में बच्चे को इस तरह की क्लासेज में अवश्य डालें यहां उन्हें सीखने को बहुत कुछ मिलेगा।

अपने बच्चों को आम जिंदगी के छोटे मोटे डिसीजन खुद लेने दें, अगर आप हर बात में उनकी स्पून फीडिंग करते रहेंगे तो उन्हें खुद से कोई फैसला लेना नहीं आएगा और वे जिंदगी में हर छोटी बड़ी बात के सही और गलत के लिए आपका मुंह देखेंगे, इसलिए उन्हें फैसले लेने दें भले ही वह गलत हों, लेकिन उन्हें अपनी गलतियों से सीखने का मौका दें।

अपने बच्चों के दोस्त बनें और उनकी हर बात को काटे नहीं, बल्कि एक दोस्त की तरह समझें अगर बच्चे आप से अपने पहले क्रश के बारे में भी बात कर रहा है तो खुलकर उस पर अपनी राय दें एक दोस्त की तरह, ना कि पेरेंटस की तरह उसे डांटे। उसे दोस्त की तरह अच्छा बुरा समझाएं और रिश्तों की मर्यादा बातों ही बातों में सिखा जाएं।

आई से पहले यू को रखिए- हर बात में केवल खुद के बारे में ना सोचिए। मैं ऐसा हूं, मुझे ये अच्छा लगता है, मैं ये करता हूं कि बजाय आप कैसे हैं, आपको क्या अच्छा लगता है, आप क्या करते हैं। इन शब्दों का इस्तेमाल भी करें। इससे लोग आपके करीब आएंगे और आपको पसंद करेंगे। आई में अहम की भावना होती है, जो किसी को अच्छी नहीं लगती, इसलिए सभी को भी महत्व दें, ताकि लोग आप से जुड़ सके।

अपने डेली रुटीन में एक बात पर हमेशा ध्यान दें कि कभी भी अपना समय ऐसी फिजूल की बातों में खर्च न करें, जिससे आपको कुछ भी सीखने को न मिल रहा हो। अनावश्यक बातों पर ध्यान देने से समय तो बर्बाद होगा ही साथ में हमारा फोकस भी लूज हो जाता है। सही बातों को सुनें व अनावश्यक बातों से दूर रहें।