Teaching kids to handle rejection
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Overview:

शर्मीलापन एक ऐसी भावना है, जो किसी बच्चे को सामाजिक परिस्थितियों में असहज और संकोचित महसूस कराती है। यह लक्षण किसी बच्चे के व्यक्तित्व का हिस्सा हो सकते हैं। कभी-कभी यह जेनेटिक भी होते हैं।

Shyness in Children: कुछ बच्चे इतने शर्मीले होते हैं कि वे किसी से बात करना तो दूर, किसी के सामने आने से भी डरने लगते हैं। ऐसे बच्चों के पेरेंट्स अक्सर उनकी ​इस झिझक से काफी परेशान रहते हैं। पेरेंट्स को लगता है कि ऐसे बच्चों का मानसिक और सामाजिक विकास ठीक से नहीं हो पाता। उनका यह डर काफी हद तक सही भी है। क्योंकि शर्मीला स्वभाव बच्चों के आत्मविश्वास को कम कर सकता है। जिसका सीधा असर उनके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास पर पड़ता है। बच्चों की इस आदत को समय पर पहचान कर और सही कदम उठाकर आप इसको दूर कर सकते हैं।

सबसे पहले जानें क्या है शर्मीलापन

First of all know what is shyness
First of all know what is shyness

शर्मीलापन एक ऐसी भावना है, जो किसी बच्चे को सामाजिक परिस्थितियों में असहज और संकोचित महसूस कराती है। यह लक्षण किसी बच्चे के व्यक्तित्व का हिस्सा हो सकते हैं। कभी-कभी यह जेनेटिक भी होते हैं। शर्मीले बच्चे अक्सर खुद को दूसरों से कमतर महसूस करते हैं और नए काम को करने से डरते हैं। इसके कारण वे अक्सर सामाजिक गतिविधियों से बचने की कोशिश करते हैं। लोगों से दूरी बनाकर रखते हैं।

ओवर प्रोटेक्टिव पेरेंटिंग हो सकता है कारण

बच्चे के शर्मीलेपन की वजह​ पेरेंटिंग भी हो सकती है। जो पेरेंट्स बच्चों को लेकर ओवर प्रोटेक्टिव होते हैं, उनके बच्चे अक्सर शर्मीले हो जाते हैं। अगर पेरेंट्स अपने बच्चों को बहुत ज्यादा सुरक्षा या सीमाओं में रखते हैं, तो बच्चों का बाहर की दुनिया से सामना कम होता है, जिससे उनका आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है। धीरे-धीरे यह उसकी पर्सनालिटी का हिस्सा बन जाता है।

ऐसे जानें, शर्मीला है बच्चा

पेरेंट्स के लिए यह जानना जरूरी है कि उनके बच्चे शर्मीले हैं या नहीं, ताकि वे सही कदम उठा सकें। कुछ संकेतों से आप इसका पता लगा सकते हैं। अगर बच्चा हमेशा गुमसुम रहता है और किसी भी बातचीत का हिस्सा नहीं बनता। वह आपसे बातें शेयर नहीं करता। नई जगह पर जाने से डरते हैं। पेरेंट्स के बिना किसी नई जगह पर नहीं जाता। स्कूल के कार्यक्रमों या अन्य एक्टिविटी का हिस्सा नहीं बनना। घर पर अगर कोई रिश्तेदार या मेहमान आए तो बाहर आने से बचता है। दूसरों से घुलमिल नहीं पाता। अगर कोई कुछ पूछे तो बहुत देर में जवाब देता है या आई कॉन्टैक्ट से बचता है। यदि आपको भी अपने बच्चे में ये बातें नजर आ रही हैं तो इसका मतलब है कि वह शर्मीला है।

पेरेंट्स ही बन सकते हैं मददगार

बच्चे के शर्मीले स्वभाव को समझना और सही राह देना हर पेरेंट्स की जिम्मेदारी है। यदि पेरेंट्स समय रहते इस पर ध्यान दें और बच्चे को सपोर्ट करें, तो शर्मीला स्वभाव कम किया जा सकता है। इसके लिए पेरेंट्स को चाहिए कि वे अपने बच्चे के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए उनकी छोटी-छोटी सफलताओं पर तारीफ करें और खुद भी आत्मविश्वासी बने। अगर बच्चा लंबे समय तक शर्मीला रहता है तो इसका असर उसकी मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है। ऐसे बच्चे समय के साथ अकेलापन, तनाव, चिंता और डिप्रेशन महसूस कर सकते हैं।

कुछ आसान कदम आएंगे काम

बच्चों का शर्मीलापन दूर करने के लिए पेरेंट्स को कुछ आसान कदम उठाने चाहिए। सबसे पहले उनकी दूसरों से तुलना बंद करें। दरअसल, पेरेंट्स अक्सर अपने बच्चों की तुलना दूसरों से करते हैं, जिससे बच्चे का आत्मविश्वास कम हो सकता है। इसलिए बच्चे को अपनी पहचान पर गर्व महसूस कराएं। उनको हमेशा प्रोत्साहित करें। उसकी सफलता का सम्मान करें। इससे उन्हें आत्मविश्वास मिलेगा और वह अपनी शर्म को छोड़ पाएंगे। बच्चों को धीरे-धीरे नई परिस्थितियों का सामना करने के लिए प्रेरित करें। शुरू में छोटे कदम लें, जैसे कि किसी नए दोस्त से मिलवाना या किसी नए कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना। अगर बच्चा किसी बात को लेकर झिझक महसूस करता है तो उसे दूर करने की भी कोशिश करें।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...