शर्मीले बच्चे को ऐसे बनाएं कॉन्फिडेंट, हर कोई करेगा तारीफ: Parenting Tips For Shy Children
आइए जानें बच्चों के अंदर कैसे सेल्फ कॉन्फिडेंस डेवलप कर सकते हैं।
Parenting Tips For Shy Children: हर बच्चे का व्यवहार अलग होता है। कई बच्चे शर्मीले होते हैं जबकि कई बेहद बातूनी होते हैं। वहीं शर्मिले बच्चों को लोगों से बात करने या इंटरेक्ट करने में दिक्कत आती है और इसका असर उनके सोशल स्किल्स डेवलेपमेंट पर पड़ता है। ऐसे बच्चों को लोगों के बीच बहुत ज्यादा असहज महसूस होता है और कई बार तो वो खुद को लोगों से दूर कर लेते हैं । आइए जानें बच्चों के अंदर कैसे सेल्फ कॉन्फिडेंस डेवलप कर सकते हैं।
Also read: बच्चों के लिए बनाएं ये 3 हेल्दी चाट, नोट करें रेसिपी: Healthy Chaat Recipes
सकारात्मक रवैया

शर्मीले बच्चों को हमेशा सकारात्मक प्रतिक्रिया और प्रोत्साहन देना महत्वपूर्ण है। छोटे प्रयासों की भी सराहना करें, जैसे स्कूल में अच्छा काम करना या किसी नई चीज़ को करने की कोशिश करना। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा क्योंकि वे महसूस करेंगे कि उनकी कोशिशों को सराहा जा रहा है।
सोशलाइज करवाएं
शर्मीले बच्चों को सामाजिक स्थितियों में धीरे-धीरे शामिल करना चाहिए। छोटे समूहों में बातचीत करने से शुरुआत करें, ताकि वे सहज महसूस करें। इससे बच्चों को यह समझने में मदद मिलती है कि दूसरों के साथ संवाद करना सहज और सुरक्षित है।
सुने और बोलने दें

शर्मीले बच्चों को सुनने और उनके विचारों को समझने का अवसर दें। कभी-कभी बच्चों को अपनी भावनाओं और विचारों को व्यक्त करने में संकोच होता है। जब उन्हें एक ऐसा वातावरण मिलेगा जहां वे खुलकर अपनी बात कह सकते हैं, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा।
रोल मॉडल पेश करें
बच्चों को आत्मविश्वास से भरे लोगों से प्रेरणा लेने के लिए प्रेरित करें। अगर वे किसी ऐसे व्यक्ति को देखते हैं जो खुद को व्यक्त करने में सक्षम है, तो यह उन्हें भी आत्मविश्वास देने में मदद करेगा।
हैप्पी माहौल

शर्मीले बच्चे एक ऐसे माहौल में बेहतर प्रदर्शन करते हैं जहां वे सुरक्षित और समर्थ महसूस करते हैं। घर और स्कूल में ऐसा वातावरण बनाएं जहां बच्चे बिना डर के अपनी भावनाओं और विचारों को साझा कर सकें।
धैर्य रखें
आत्मविश्वास बढ़ाने में समय लगता है, खासकर यदि बच्चा स्वाभाविक रूप से शर्मीला है। इसलिए, धैर्य रखना बहुत महत्वपूर्ण है। बच्चे को किसी भी स्थिति में तुरंत परिणाम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। धीरे-धीरे, छोटी-छोटी सफलताओं के साथ, उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा।
