मुझे कोई पसंद नहीं करता, आखिर बच्चे क्यों करते हैं ऐसे शब्दों का इस्तेमाल: Negative Thoughts in Kids
Negative Thoughts in Kids

बच्चों के मन में आने वाले नकारात्मक विचारों के लिए जिम्मेदार हैं ये 6 कारण, माता पिता की मदद से मिलेगी बच्चों को राहत

माता-पिता का बच्चों पर अत्यधिक दबाव भी इस भावना का कारण बन सकता है। यदि माता-पिता बच्चों से बहुत अधिक उम्मीदें रखते हैं और उनके प्रयासों को महत्व नहीं देते

Negative Thoughts in Kids: एक बहुत ही आम चीज जो आजकल बच्चों में देखने को मिलती है, वह है अपने बारे में निराशाजनक शब्दों का उपयोग करना। ये शब्द केवल उनके आत्म-सम्मान को नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि उनकी मानसिक स्थिति को भी प्रभावित करते हैं। बच्चों की मानसिकता और भावना बहुत संवेदनशील होती है। वे छोटे होते हुए भी अपनी भावनाओं को गहरे से महसूस करते हैं और किसी भी छोटी सी घटना या परिस्थिति को अपनी दुनिया के बड़े हिस्से के रूप में लेते हैं। कभी-कभी बच्चों को यह महसूस होता है कि कोई उन्हें प्यार नहीं करता या कोई उन्हें पसंद नहीं करता।

यह भावना उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकती है।

बच्चों को अपने परिवार से सबसे पहले प्यार और समर्थन की उम्मीद होती है। यदि परिवार में आपसी संबंधों में तनाव होता है या बच्चा किसी कारण अकेलापन महसूस करता है, तो वह यह सोचने लगता है कि उसे कोई नहीं चाहता। इसके अलावा, यदि बच्चे को स्कूल या समाज में दोस्त नहीं मिलते या वे सामाजिक रूप से अलग महसूस करते हैं, तो भी उनके मन में यह विचार आ सकता है कि उन्हें कोई नहीं पसंद करता।

कभी-कभी बच्चे अपने आप को नकारात्मक रूप में देखने लगते हैं। वे खुद को दूसरों से कम या अयोग्य महसूस करते हैं। यह स्थिति तब जन्म लेती होती है जब बच्चे अपनी असफलताओं, कमियों या कमजोरियों पर बहुत ज्यादा ध्यान देने लगते हैं। माता पिता के ज्यादा टोकने या गुस्से में कहे गए शब्द भी बच्चों को ऐसा सोचने पर मजबूर कर देते हैं।

माता-पिता का बच्चों पर अत्यधिक दबाव भी इस भावना का कारण बन सकता है। यदि माता-पिता बच्चों से बहुत अधिक उम्मीदें रखते हैं और उनके प्रयासों को महत्व नहीं देते, तो बच्चे यह महसूस करने लगते हैं कि वे कभी भी अपने माता-पिता या परिवार के सदस्यों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सकते।

बच्चों के बीच स्कूल में अक्सर तुलना की जाती है। वे अपनी क्षमताओं, स्कोर और उपलब्धियों के आधार पर एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ करते हैं। अगर बच्चा अपनी क्लास  में दूसरों से पीछे है या उसे कभी प्रशंसा नहीं मिलती, तो वह यह सोचने लगता है कि शायद वह दूसरों से कम है।

कभी-कभी बच्चे मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, जैसे अवसाद या चिंता का सामना कर रहे होते हैं, जो उन्हें इस प्रकार की नकारात्मक सोच की ओर ले जाता है। अवसाद के दौरान बच्चे खुद को नकारात्मक तरीके से देखने लगते हैं और यह महसूस करते हैं कि किसी को भी उनसे प्यार या स्नेह नहीं है।

बच्चों से कहीं भी रंग रूप या शारीरिक बनावट के आधार पर भेदभाव किया जाता है तब भी बच्चों में अपने लिए नकारात्मकता की भावना आने लगती है। ऐसे बच्चे समाज से दूरी बनाना शुरू कर देते हैं। ऐसे में माता पिता और परिवार के सदस्यों को बच्चों को प्यार से समझाना चाहिए और उन्हें पूरी तरह प्रोत्साहित करना चाहिए।

उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली तरूणा ने 2020 में यूट्यूब चैनल के ज़रिए अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद इंडिया टीवी के लिए आर्टिकल्स लिखे और नीलेश मिश्रा की वेबसाइट पर कहानियाँ प्रकाशित हुईं। वर्तमान में देश की अग्रणी महिला पत्रिका...