रामचरित मानस से मिलती है जीवन की 12 अहम सीख: Ramcharit Manas Lessons
Ramcharit Manas Lessons

भगवान राम के जीवन से मिलने वाली सीख

रामचरित मानस को एक आदर्श जीवन शास्त्र भी कहा जाता है। यूं तो यह पूरा ग्रंथ ही आदर्श जीवन की राह दिखाता है, लेकिन आज हम आपको इसकी 12 अहम सीख बता रहे हैं।

Ramcharit Manas Lessons: रामचरित मानस को एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं आदर्श जीवन शास्त्र भी कहा जाता है। जिसके हर पात्र व प्रसंग हमें जीने की सही दिशा दिखाते हैं। यही वजह है कि बड़े-बुजुर्ग व साधु- संत इसे पढ़ने की सलाह जरूर देते हैं। यूं तो इस ग्रंथ में भगवान राम का पूरा चरित्र ही अनुकरणीय है, पर कई वाकये भी ऐसे हैं जो हमें आदर्श जीवन की राह सुझाते हैं। आज हम आपको उन्हीं प्रसंगों के अनुसार 12 सीख बताने जा रहे हैं, जो हमें रामचरित मानस से मिलती है।

1.माता- पिता की आज्ञा अहम

Ramcharit Manas Lessons
obey your elders

भगवान राम ने माता कैकयी की मंशा और उसके अनुसार पिता दशरथ द्वारा दिए गए वचन को पूरा करने के लिए अयोध्या के राजा का पद छोड़ दिया। वन भेजने पर भी उन्होंने मां कैकयी का सम्मान ही किया। उनका ये भाव हमें भी ये सीख देता है कि हर ​परिस्थिति में अपने माता-पिता का आज्ञाकारी रहते हुए हमें हमेशा उनका सम्मान करना चाहिए।

2. जल्दबाजी नही, सही समय पर करें काम

punctuality
punctuality


सीता को खोजते हुए भगवान राम ने जब सुग्रीव से मित्रता कर उसे किष्किंधा का राजा बनाया तो बारिश का मौसम शुरू हो गया था। ऐसे में श्रीराम ने सीता के रावण की कैद में होने की जानकारी पर भी जल्दबाजी नहीं की। उन्होंने बारिश के चार महीने बीतने के बाद सही समय जानते हुए ही सीता की खोज करवाकर लंका पर विजय प्राप्त की। यह बात हमें सीख देती है कि हमें भी जल्दबाजी नहीं कर किसी काम को सही समय आने पर करना चाहिए।

3. मरीज का तुरंत उपचार

hospitality
hospitality


रामायण हमें सीख देती है कि मरीज के उपचार में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। रावण सेना से युद्ध में लक्ष्मण के मूर्छित होने पर राम दल ने ऐसा ही किया था। हनुमानजी तुरंत वैद्य सुषेण को ले आए। इसके बाद वैद्य के कहे अनुसार सूर्योदय से पहले ही हिमालय से संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण की मूर्छा दूर की।

4. जरूरतमंद की मदद

रामायण जरुरतमंदों की मदद की सीख भी देती है। किष्किंधा का राज्य व अपनी पत्नी को बाली से वापस पाने में सुग्रीव सक्षम नहीं था। ऐसे में भगवान राम ने जरुरतमंद सुग्रीव से मित्रता कर उसकी मदद की। राम के वनवास के चयन के पीछे भी एक वजह ऋषि मुनियों के यज्ञ में राक्षसों की बाधा दूर कर उनकी आवश्यकता को पूरा करना था।

5. हक छीनें नहीं, वापस लौटाएं

भगवान राम ने बालि को मारकर किष्किंधा का राज्य उसके भाई सुग्रीव और रावण को मारकर लंका का राज्य ​भी उसके छोटे भाई सुग्रीव को लौटाया। श्रीराम का ये कार्य यही सीख देता है कि दूसरे की संपति पर बूरी नजर नहीं रखनी चाहिए। संपति पर जिसका हक है उसे ही लौटा देना चाहिए। वरना भाई का हक छीनने वाले बाली की तरह ही ​हश्र होगा।

6. भावनाओं पर काबू

वनवास में भाई भरत पूरे परिवार व प्रजा के साथ राम को लेने वन में पहुंचे। जहां सबने उनसे वापस अयोध्या लौट चलने का आग्रह किया। लेकिन, राम भावनाओं में नहीं बहे। भविष्य में रावण की मृत्यु की दूरदर्शिता को देख उन्होंने परिवार व राज्य का मोह खुद पर हावी नहीं होने दिया। हमें भी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए अच्छे भविष्य आधारित दूरदर्शी सोच रखनी चाहिए। तभी हम सफलता हासिल कर सकेंगे।

7. पहले समझाइश, फिर कार्रवाई

रावण से युद्ध के लिए लंका पर चढ़ाई करने से पहले भगवान श्रीराम ने समुद्र से रास्ता देने की प्रार्थना की। तीन दिन तक प्रार्थना का असर नहीं हुआ तो उन्होंने समुद्र को दंड देने के लिए धनुष उठाया। उनका ये व्यवहार सीख देता ​है कि हमें भी हमेशा पहले दंड देने की लिए तैयार नहीं रहना चाहिए। अपने छोटों के प्रति किसी भी कार्रवाई से पहले उन्हें समझाना चाहिए। सुधरने का समय भी देना चाहिए। यदि फिर भी नहीं माने तो अंत में दंड का सहारा लेना चाहिए।

8. डॉक्टर निभाए सेवा धर्म

Ramcharit Manas

राम- रावण युद्ध के समय लक्ष्मण के शक्ति लगने पर हनुमानजी लंका के वैद्य सुषेण को घर सहित उठा लाए। शत्रु पक्ष का होने पर भी वैद्य सुषेण ने लक्ष्मण का उपचार करने से इन्कार नहीं किया। बल्कि, अपने सेवा धर्म को निभाते हुए उनका इलाज कर मूर्छा दूर की। ये प्रसंग सबक देता है कि चिकित्सक के लिए कोई दोस्त या दुश्मन नहीं होता। उपचार के लिए आये हर रोगी का उपचार उसे रिश्ते-नाते, जाति, धर्म व वर्ग की सोच से उपर उठकर करना चाहिए। तभी वह सही मायने में अपने चिकित्सक धर्म को निभाने वाले कहलाएंगे।

9. बुराई व अहंकार की हार, अच्छाई की जीत

Ramcharit Manas


रामायण को हमेशा से बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप मेें जाना जाता है। रावण अहंकारी और बुराई का प्रतीक था, जिसने बल पर शासन और सीता का हरण किया। जबकि भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में आदर्श पुरुष थे। जिन्होंने रावण को मारकर सीता को रावण की कैद से आजाद करावाया। राम चरित मानस की एक सीख ये भी है कि बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों ना हो अंत में जीत अच्छाई व सच्चाई की ही होती है। बुराई का हमेशा अंत ही होता है।

10.संपत्ति से बढ़कर संबंध

family

भगवान राम ने माता कैकयी की इच्छा पर भाई भरत के लिए अयोध्या का राजपद छोड़कर वन को चुना। उन्होंने संबंधों के सामने राजा के पद का कोई लालच नहीं रखा। बल्कि, संबंधों को निभाने के लिए हंसते हुए इतना बड़ा त्याग कर दिया। इसी तरह भाई भरत भी अयोध्या के राज्य को श्रीराम का समझ कभी राजगद्दी पर नहीं बैठे। भाइयों के इस प्रेम से सीख मिलती है कि संबंधों के सामने संपत्ति को महत्व नहीं देना चाहिए।

11. ऊँच-नीच का भेदभाव खत्म

Ramcharit Manas


रामचरित मानस हमें ऊँच-नीच का भेद खत्म कर हर जाति, वर्ण व वर्ग के प्रति समभाव रखने की प्रेरणा भी देता है। श्रीराम ने निषाद जैसे वनवासी को गले लगाकर मित्र का दर्जा दिया तो भीलनी शबरी की कुटिया में जाकर झूठे फल भी खाए। उनकी ये भावना समाजवाद का पथ प्रदर्शन करती है।

12. बुरी संगत व बहकावे से बचें

relationship
relationship


रामचरित मानस से यह भी सीख मिलती है कि बुरी संगत व बहकावे से हमेशा बचना चाहिए। दासी मंथरा की संगत व बहकावे में आकर कैकयी ने श्रीराम को वन भेजकर दुख व अपयश ही प्राप्त किया। इसी तरह सुर्पणखा के उकसावे में आकर रावण ने सीता का अपहरण कर अपना ही अंत करवा लिया। ऐसे में जरूरी है कि हम हमेशा अच्छी संगत में ही रहें।

Read Also: होलिका दहन में ऐसे करें पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और विधि

Leave a comment