उस दिन कॉलेज की एलुमनाई पार्टी में अपनी सहेली प्रभा से भेंट हुई.कुशल क्षेम के बाद वही घिसा पिटा सा प्रश्न सबके होंठों पर था.”आजकल कौन क्या कर रहा है?”

कोई डॉक्टर,कोई इंजिनीयर,कोई बैंक में वरिष्ठ पद पर आसीत था.तो किसी ने टीचिंग के साथ जुड़ने का निर्णय लिया था.तभी प्रभा चहकते हुए बोली,”भई मै तो हाउस वाइफ़ हूँ”

“लगता है तुम्हारे पति काफ़ी पुराने विचारों के है वरना इस ज़माने में तो हर पुरुष वर्किंग पत्नी ही चाहता है”

“नहीं ,मैंने स्वेच्छा से यह निर्णय लिया है”

आज महिलाएँ जब मैनेजिंग डायरेक्टर,सीईओ,प्रिन्सिपल,के पद का कार्यभार संभाल रही हैं यहाँ तक की,अंतरिक्ष तक पहुँच गई है तो,प्रभा के कॉन्फिडेंस को देखकर हैरत सी हुई.एमएससी बी एड करने के बाद ये कैसा निर्णय ले लिया इसने?

क्योंकि,घरेलू महिलाएँ स्वयं को दबी,कुचली और असहाय महसूस करती हैं.घर वालों की नज़रों में उनके सहयोग को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है,यहाँ तक,हाउस वाइफ़ शब्द को हेय दृष्टि से देखा जाता है.थोड़ी कुरेदन बढ़ी तो बोली,

“मेरे पति का बेहद डिमांडिंग जॉब है.घर गृहस्थी और बच्चों की तो छोड़ो उन्हें तो अपनी चिंता भी नहीं रहती.सुबह कैसे होती है शाम कैसे ढल जाती है,उन्हें कोई ख़बर ही  नहीं रहती.अब अगर दोनों ही काम पर जाने लगते तो बच्चों की देखभाल,स्कूलिंग ,घर गृहस्थी के छोटे बड़े काम, कौन संभालता?आज मेरे बच्चे या पति अपने अचीवमेंट्स को पूरा कर पा रहे हैं तो वह सिर्फ़ मेरे नौकरी न करने के निर्णय के कारण ही संभव हो पाया है”

एक रिपोर्ट के अनुसार एक गृहणी जितना कार्य करती है वो विश्व की जानी पहचानी कंपनी के सालाना कारोबार का कई गुना है.इतना ही नहीं भारतीय महिलाएँ घर में बच्चों,और बुज़ुर्गों की देखभाल जैसे कार्य बिना सेलरी,बिना छुट्टी के सुबह 6बजे से रात 12 बजे तक लगातार करती हैं,जो कि किसी देश की अर्थव्यवस्था की जीडीपी के 3-1 फ़ीसदी के बराबर है.

दिल्ली की एक कोर्ट ने एक मामले में फ़ैसला सुनते हुए अपना निर्णय सुनाया कि “एक हाउस वाइफ़ भी एक कुशल कामगार की तरह ही सेवाएँ प्रदान करती है.”

“जब बच्चे आत्म निर्भर हो जाएँगे तब क्या करोगी?”मीटिंग बर्खास्त होने के बाद मैंने उससे एक निजी सवाल किया

“अपना अस्तित्व बनाकर रखूँगी”

“कैसे”

“बहुत कुछ है करने के लिए .आज कल घर बैठे बैठे ही मेरी कुछ मित्र कैटेरिंग का काम कर रही हैं.कोई पेंटिंग कर के प्रदर्शनी लगा रहा है,किसी ने अपनी कोचिंग क्लासेज़ शुरू की हैं. अगर इरादे पक्के हैं तो आयामों की कमी नहीं. फ़िलहाल तो घर और बच्चे,और परिवार के बुज़ुर्गों की देखभाल मेरी पहली प्राथमिकता है.मै हाउस वाइफ़ नहीं होम मेकर हूँ”

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