पौधों के लिए सही मिट्टी का चुनाव बहुत ही ज़रूरी होता है
अच्छा परिणाम पाने के लिए कई चीज़ों का ख़्याल रखना होता है जिसमें से एक बहुत ही महत्वपूर्ण चरण है पौधों के लिए गुणवत्तापूर्ण मिट्टी तैयार करना।
Gardening Tips: गार्डनिंग को लेकर क्रेज़ बहुत ही तेज़ी से बढ़ा है। यही वजह है कि हर कोई अपने घर में गार्डेन बनाना चाहता है। लोग बना भी रहे हैं लेकिन शिकायत रहती है कि हमारे पौधे की पत्तियाँ पीली पड़ गईं, हमारे पौधे सूख गए। जिसकी वजह से उनको सही परिणाम नहीं मिल पाता है। आपको बता दें कि अच्छा परिणाम पाने के लिए कई चीज़ों का ख़्याल रखना होता है जिसमें से एक बहुत ही महत्वपूर्ण चरण है पौधों के लिए गुणवत्तापूर्ण मिट्टी तैयार करना। पौधों के सही विकास के लिए पोषक तत्वों से भरपूर और कीटाणु रहित मिट्टी तैयार करनी होगी। इस लेख के माध्यम से आप गार्डनिंग के लिए सबसे अच्छी मिट्टी से जुड़ी तमाम तरह की ज़रूरी बातों को जान और समझ पायेंगे।
गार्डनिंग के लिए अच्छी मिट्टी कौन सी है?

गार्डनिंग के लिए अच्छी मिट्टी वह मानी जाती है जो नमी को बनाए रखे, हवा और पानी को अच्छी तरह से अवशोषित कर सके, जिसमें पौधों के लिए सभी ज़रूरी पोषक तत्व उपलब्ध हो। देश के कई ऐसे हिस्से हैं जहां पर इस तरह की मिट्टी का मिलना मुश्किल है लेकिन अच्छी बात यह कि इस मिट्टी को हम अपने घर पर खुदसे भी तैयार कर सकते हैं। इसके लिए कई अन्य चीज़ों को जोड़कर एक सही मिश्रण बनाना होता है। गार्डनिंग के लिए सामान्यतौर पर दोमट मिट्टी को सबसे बेहतर माना जाता है। दोमट मिट्टी में चिकनी मिट्टी के साथ रेत और गाद की सही मात्रा होती है। जिसकी वजह से यह मिट्टी नमी को बनाये रखने में सहायक होने के साथ उचित जल निकासी में सहायक होती है। यह कई तरह के पोषक तत्वों और कार्बनिक पदार्थ से भरपूर होती है।
पौधा रोपण के लिए मिट्टी तैयार कैसे करें

नाइट्रोजन युक्त खाद डालें – मिट्टी तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वह सही गुणवत्ता की हो जिसके लिए जैविक खाद का उपयोग किया जाता है जोकि नाइट्रोजन का अच्छा स्रोत होती है। मिट्टी में जैविक खाद के प्रयोग से मिट्टी में एक तरह ह्यूमस की मात्रा बढ़ती है तो दूसरी तरफ मिट्टी की जल धारण क्षमता में वृद्धि होती है। यह पौधों की एनपीके की आवश्यक मात्रा को भी पूरी करती है। इसके लिए आप अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर खाद का उपयोग कर सकते हैं। मिट्टी के साथ आप अलसी खली पाउडर, बोन मील और नीम केक पाउडर को भी मिला सकते हैं। ये नाइट्रोजन के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।
जैविक खाद मिलाएं – गार्डनिंग के लिए जैविक खादों की बहुत ही ज़्यादा उपयोगिता होती है। यही कारण है कि काम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट खाद बहुत ज़्यादा उपयोग होता है। यह मिट्टी को उपजाऊ बनाने में सहायक होती है। वर्मी कम्पोस्ट में पौधों के लिए सभी उपयोगी पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह मिट्टी को हल्का करती है जिससे पौधों की जड़ों तक हवा का आदान प्रदान होता है। आप मिट्टी को उपजाऊ बनाने और अच्छे परिणाम के लिए इस खाद का उपयोग कर सकते हैं। यह पौधों को किसी भी प्रकार से नुक़सान नहीं पहुँचाती है।
जैविक उर्वरक का उपयोग – मिट्टी तैयार करते समय आप कुछ मात्रा में जैविक उर्वरक का प्रयोग कर सकते हैं। जैविक उर्वरक की ख़ास बात यह कि ये एनपीके के अच्छे स्रोत होते हैं। यह रासायनिक खादों की तुलना में पौधों को बहुत धीमी गति से पोषक तत्व प्रदान करते हैं। जिसकी वजह से पौधों को जरुरत के हिसाब से पोषक तत्व मिलते जाते हैं और इनके ओवरडोज़ का डर नहीं रहता है। मिट्टी तैयार करते समय आप सरसों की खली, बोन मील, नीम खली, कोकोपीट का समुचित मात्रा में उपयोग कर सकते हैं।
मिट्टी तैयार करने के बाद

मिट्टी तैयार ही उसमें पौधा रोपण करना सही नहीं माना जाता है। मिट्टी को तैयार करने के बाद कुछ सप्ताह के लिए उसे गीली घास से ढक कर रख देना चाहिए। जिससे मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीव जैसे कि केंचुए आदि अच्छी तरह से विकसित हो जाते हैं। मिट्टी में सभी तत्व पूरी तरह से मिश्रित हो जाते हैं, मिट्टी पोषक तत्वों से भरपूर हो जाती है। जिसका उपयोग आप पौधारोपण के लिए कर सकते हैं।
