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Parenting Credit: Istock

Overview: डिनर टेबल पर बच्चा नहीं करेगा आनाकानी, जब पेरेंट्स फॉलो करेंगे ये रूल्स

डिनर टेबल पर बच्‍चे के टेंट्रम को कम करने के लिए रूल्‍स जरूरी हैं। ये नियम न केवल भोजन के समय को सुखद बनाते हैं, बल्कि उनके व्यक्तित्व को निखारते हैं।

Dinner Table Rules for Parents: परिवार के साथ बैठकर भोजन करना व क्‍वालिटी टाइम स्‍पेंड करना एक अनमोल अनुभव है, जो रिश्तों को मजबूत करता है। लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, परिवार के साथ खाने का आनंद लेना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। कभी पति-पत्‍नी के पास साथ खाने का समय नहीं होता तो कभी बच्‍चे के टेंट्रम परिवार को एक साथ खाने से रोकते हैं। इसलिए बच्‍चे में समय रहते सही टेबल मैनर्स विकसित करना जरूरी है। यह न केवल भोजन के समय को सुखद बनाता है, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व को भी निखारता है। तो चलिए जानते हैं कुछ ऐसे रूल्‍स के बारे में जो बच्‍चे के साथ पेरेंट्स को भी फॉलो करना चाहिए।

टेबल पर बहस न करें

Don’t argue at the table

जैसे-जैसे बच्‍चे बड़े होते जाते हैं वह पेरेंट्स के साथ समय कम बिताना पसंद करते हैं। खासकर डाइनिंग टेबल पर एक साथ खाना खाने से बच्‍चा बचता है। इसकी वजह है पेरेंट्स का बच्‍चों को बार-बार टोकना। बच्‍चा कैसे खाता है, क्‍या खाता है या कितना खाता है, ये अक्‍सर बहस का विषय बन जाता है। इसलिए बच्‍चे अलग खाना पसंद करते हैं। टेबल पर पेरेंट्स को इस बात का ध्‍यान रखना चाहिए कि खाते वक्त किसी प्रकार की बहस न हो। बच्‍चा जो खा रहा है उसे खाने दें। 

बच्‍चे को न दें लालच

कई बार बच्‍चे को हेल्‍दी व्‍यंजन खिलाने के चक्‍कर में पेरेंट्स बच्‍चे को मीठा या चॉकलेट देने की रिश्‍वत दे देते हैं। ये एक-दो बार तो ठीक है लेकिन हर बार ऐसा करने से बच्‍चा जिद्दी और लालची बन सकता है। इसलिए बच्‍चे को समझाएं कि जो बना है वही खाना पड़ेगा। इससे बच्‍चा हर साग-सब्‍जी खाना सीखेगा और वह जिद्द भी नहीं करेगा।

‘प्लीज’ और ‘थैंक यू’ का उपयोग

‘प्लीज’ और ‘थैंक यू’ जैसे शब्द जादुई हैं। ये न केवल विनम्रता दर्शाते हैं, बल्कि खाने के समय को और खास बना देते हैं। बच्चों को सिखाएं कि जब वे कुछ मांगे या कोई उन्हें खाना परोसे, तो इन शब्दों का इस्तेमाल करें। उदाहरण के लिए, अगर बच्चा कहता है, “प्लीज, मुझे और सब्जी दीजिए,” और खाना मिलने पर “थैंक यू” कहे, तो यह उनकी विनम्रता को दर्शाता है। ये छोटी-छोटी आदतें बच्चों को हर उम्र में पसंद किए जाने वाले व्यक्ति बनाती हैं।

खाने की बर्बादी न करें

खाने की बर्बादी से बचना एक महत्वपूर्ण लाइफ लैसन है। बच्चों को सिखाएं कि वे अपने भोजन के लिए आभार प्रकट करें और अपनी थाली में लिया हुआ खाना खत्म करें। अगर बच्चे को भूख कम है, तो कम मात्रा में खाना लें, बजाय इसके कि ज्यादा खाना लेकर बर्बाद करें। उन्हें बताएं कि भोजन की कीमत समझना और उसका सम्मान करना एक अच्छे इंसान की निशानी है। यह आदत न केवल टेबल मैनर्स को बेहतर बनाएगी, बल्कि बच्चे को भी जिम्मेदार बनाएगी।

चबाकर खाएं, फिर बात करें

Chew and eat, then talk
Chew and eat, then talk

परिवार के साथ खाने के समय बातचीत इसे और खास बनाती है, लेकिन मुंह में खाना होने पर बात करना अशिष्ट माना जाता है। बच्चों को सिखाएं कि पहले खाना अच्छे से चबाएं और फिर बात करें। यह न केवल समझने में आसान होता है, बल्कि सामने वाले को भी अच्छा लगता है। यह नियम बच्चों को अनुशासित और सभ्य बनाता है।

प्रशंसा करें, शिकायत नहीं

हर कोई प्रशंसा सुनना पसंद करता है। बच्चों को सिखाएं कि वे परोसे गए भोजन की तारीफ करें। अगर खाना उनके स्वाद के अनुसार नहीं है, तो कम मात्रा में लें, लेकिन शिकायत या आलोचना न करें। यह छोटा-सा प्रयास न केवल मेजबान को खुश करता है, बल्कि बच्चों में सकारात्मक दृष्टिकोण भी विकसित करता है।

मोबाइल को करें साइड

जिस घर में खाने की टेबल पर मोबाइल का यूज होता है वहां परिवारिक सुख-शांति कम हो जाती है। जी हां, खाने के समय पेरेंट्स या अन्‍य परिवारजनों पर ध्‍यान न देकर मोबाइल में लगे रहना बेड मैनर्स कहलाता है। आजकल बच्‍चे खाते समय स्‍क्रीन देखना पसंद करते हैं। इससे न केवल वह बेमन से खाना खाते हैं बल्कि पेरेंट्स की बातों को इग्‍नोर भी करते हैं। इसलिए डिनर टेबल पर मोबाइल का यूज पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए।