Etiquette for Boy
Etiquette for Boy Credit: Istock

Etiquette for Boy: हमारे समाज में आज भी बेटी और बेटे की परवरिश में अंतर देखा जा सकता है। हालांकि समय के साथ परंप‍रा और तौर-तरीकों में अंतर आया है लेकिन अभी भी बेटों को बेटियों की अपेक्षा अधिक आजादी दी जाती है। हर माता-पिता चाहते हैं कि उसका बेटा और बेटी दोनों समाज में नाम कमाएं और लोगों का आदर-सम्‍मान करें। यही वजह है कि अधिकांश घरों में बेटियों को बचपन से ही सही तरीके से उठने-बैठने, बोलने और अच्‍छा व्‍यवहार करने की तालीम दी जाती है लेकिन बेटों को नहीं। आपको बता दें कि अच्‍छे मैनर्स और एटिकेट्स की आवश्‍यकता बेटियों की अपेक्षा बेटों को अधिक होती है। यदि बेटों को बचपन से ही अच्‍छे एटिकेट्स सिखाए जाएं तो वह सामाज में उचित स्‍थान प्राप्‍त कर सकता है। तो चलिए जानते हैं बेटे को क्‍या महत्‍वपूर्ण सीख देनी चाहिए।

दूसरों को ग्रीट करना

Greeting others
Greeting others

हमारे समाज में नमस्‍ते करना महत्‍वपूर्ण माना जाता है। जब हम किसी बड़े-बुजुर्ग से मिलते हैं तो उन्‍हें नमस्‍ते करना हमारा कर्तव्‍य है। लेकिन बदलते समय और मॉर्डनाइजेशन ने नमस्‍ते की जगह हैलो या हाय ने ले ली है। बड़े और बच्‍चे अब किसी को ग्रीट करने के लिए अंग्रेजी शब्‍दों का इस्‍तेमाल करने लगे हैं। नमस्‍ते शब्‍द न केवल आपको विनम्र और संस्‍कारवान दर्शाता है बल्कि पुरानी पीढ़ी से भी जोड़ता है। इसलिए अपने बेटे को बुजुर्गों के पैर छूना और नमस्‍ते करना जरूर सिखाएं। इससे आपकी अच्‍छी परवरिश का पता लगता है।

माफी मांगना

किसी को माफ करना और माफी मांगना भारतीय शिष्‍टाचार का एक महत्‍वपूर्ण पहलू है। इसलिए बच्‍चों को बचपन से ही गलतियों को स्‍वीकार करना, पछतावा व्‍यक्‍त करना और गलती करने पर माफी मांगना जरूर सिखाएं। माफी मांगने से आपके पारिवारिक परिवेश और संस्‍कार का पता चलता है। साथ ही बच्‍चे को उसकी गलती का अहसास होता है।

महिलाओं का आदर

बेटे को यदि बचपन से ही महिलाओं का आदर करना सिखाएं तो वह बड़े होकर महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और र्दुव्‍यवहार जैसी हरकतें नहीं करेगा। पिता को घर का माहौल ऐसा बनाना चाहिए जिसमें महिलाओं का सम्‍मान और देखरेख शामिल हो। साथ ही बेटे को समझाएं कि महिलाओं के प्रति सम्‍मानजनक व्‍यवहार अपनाना कितना महत्‍वपूर्ण होता है।

घर का काम

Household chores

अधिकांश घरों में बेटियों को बचपन से घर के काम करने की ट्रेनिंग दी जाती है। हमारे समाज में माना जाता है कि घर का काम करना सिर्फ महिलाओं की जिम्‍मेदारी होती है। जो कि एक गलत सोच है। लड़कों और पुरुषों को भी बराबरी से घर का काम करना आना चाहिए। घरेलू काम करने से ईज्‍जत कम नहीं बल्कि बढ़ती है। साथ ही जरूरत पड़ने पर लड़के आसानी से सरवाईव कर लेते हैं। इसलिए बेटों को बचपन से घर का छोटा-मोटा काम करवाएं व सिखाएं।

सार्वजनिक स्‍थानों को साफ रखना

बच्‍चों को सिखाएं कि घर की तरह सार्वजनिक स्‍थानों को भी साफ रखना आवश्‍यक है। बच्‍चों को सड़कों पर कूड़ा न डालने और जिम्‍मेदारी से कचरा फेंकना सिखाएं। खासकर लड़कों को ये शिष्‍टाचार जरूर सिखाएं जाने चाहिए। साथ ही लड़कों को सार्वजनिक स्‍थानों पर बुजुर्गों का सम्‍मान करना सिखाएं। उनकी मदद करना सिखाएं।