Summary: बच्चों की परवरिश के 3 ज़रूरी स्टेप्स जो हर माता-पिता को जानने चाहिए
हर पेरेंट यही सोचता है कि वो अपने बच्चे की परवरिश सही कर रहा है, लेकिन असली जादू इन तीन स्टेप्स में छिपा है प्यार, अनुशासन और दोस्ती। जानिए किस उम्र में बच्चे को क्या देना सबसे ज़रूरी है ताकि वो खुश, आत्मविश्वासी और संतुलित इंसान बन सके।
Three Important Steps for Parenting: पेरेंट्स, क्या आपके दिमाग में भी अपने बच्चों के परवरिश को लेकर बहुत से सवाल हैं? क्या आप भी उलझन में हैं कि कब बच्चों को प्यार दे, कब अनुशासन सिखाएं, कब उनके दोस्त बने? किस उम्र में बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करें। अगर आपके भी इतने सारे सवाल हैं, तो पेरेंट्स, परेशान ना हो आज आपको इन सवालों के जवाब मिलने वाले हैं। बच्चों के परवरिश के तीन महत्वपूर्ण कदम है, प्यार, अनुशासन और दोस्ती। लेकिन सवाल यह है कि किस उम्र में बच्चों को क्या ज्यादा देना चाहिए। आइए आपके उलझन भरे सवालों का जवाब इस लेख में देते हैं।
पहले 5 वर्ष प्यार ज्यादा दें

न्यूरो विज्ञान कहता है कि बच्चों के दिमाग का विकास सबसे तेजी से 0 से 5 वर्ष की उम्र में होता है। हर रोज लाखों की संख्या में बच्चों के दिमाग में नए न्यूरॉन बना रहे होते हैं। इस दौरान बच्चा बेशक बोल ना पाए, वह अपनी भावनाओं को बता ना पाए, लेकिन वह सब देख सकता है, समझ सकता है। इस वर्ष की उम्र में ही बच्चों के अवचेतन मन का विकास होता है। ज्यादातर पेरेंट्स सोचते हैं इस उम्र में बच्चा क्या समझता है, पर हमारा यह सोचना गलत है। आप इस उम्र में बच्चों के अंदर जो भी अच्छी बुरी भावनाएं बनाते हैं वह उसके अवचेतन मन में इकट्ठे हो जाते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप अपने 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे के साथ जितना समय हो सके साथ बिताएं। उसे खूब प्यार दे, उसे प्रकृति से परिचित करवाएं। जितना ज्यादा हो सके इस उम्र में बच्चा अपने परिवार के प्यार के साथ समय बिताए। इस उम्र में बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए घर का माहौल शांत और खुशहाल बनाए रखें। बच्चों को इस उम्र में अनुशासित रहने के लिए दबाव न डालें, प्यार से उन्हें हैंडल करें।
5 से 13 वर्ष अनुशासन का
5 वर्ष के बाद बच्चा बोलना सीख जाता है। वह वाक्य के साथ अपनी बातों को का पाता है। 5 से 13 वर्ष बच्चों के मानसिक विकास का बहुत ही महत्वपूर्ण दौर होता है। इस समय बच्चा अपने सीखने की शुरुआत करता है। 5 वर्ष के उम्र में बच्चे का मन और दिमाग दोनों ही कच्चे घड़े के समान होता है और इसका आकार देने का कार्य माता-पिता और परिवार जनों का होता है। यह उम्र बच्चों को अनुशासित करने के लिए महत्वपूर्ण समय माना जाता है, क्योंकि बच्चा अपने सीखने समझने की शुरुआती दौर में होता है। वह पहले जो कुछ भी सीखता समझता या बोलता है अपने माता-पिता, परिवार या आसपास के लोगों से ही सिखाता है। बच्चों को अनुशासन सीखने के लिए जरूरी है माता-पिता अनुशासित रहे, क्योंकि बच्चा कहने से ज्यादा देखकर सीखता है। 5 से 13 वर्ष के बच्चों के अच्छे विकास के लिए अनुशासन पूर्ण माहौल दें।
13 वर्ष के बाद दोस्त बने
13 वर्ष अर्थात बच्चों की किशोरावस्था की शुरुआत। जिस समय बच्चा अपने शारीरिक और मानसिक बदलाव के साथ गुजर रहा होता है। बच्चों के शरीर में हार्मोनल बदलाव पिक पर होते हैं। इस उम्र में बच्चा यह समझने की स्थिति में नहीं होता कि हर वह चीज जो उसे करना अच्छा लगता है या उसे कूल दिखता है वह उसके लिए सही नहीं है। किशोरावस्था में बच्चों को डांटकर नहीं समझाया जा सकता। इस उम्र में आप अपने बच्चों के दोस्त बने। उनकी भावनाओं के बारे में बात करें। सावधानी पूर्वक उन पर नजर रखें। उनके अंदर बदलाव नजर आने की स्थिति में उनसे बात करें। उनके द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में जागरूक करें। उनकी भावनाओं को सुने तथा तर्क के साथ उसका समाधान दें।
