parenting tips
parenting tips

अभिभावक से बेहतर बच्चों को कोई नहीं जानता। ऐसे में एक मार्गदर्शक के तौर पर अगर माता-पिता दोनों बच्चे के करियर को चुनने में मदद करेंगे तो उससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता।

अभिभावक होने के नाते हम अपने बच्चे के लिए सबसे बेहतर सपना देखते हैं। हम चाहते हैं कि हमारा बच्चा अपनी जिंदगी में सबसे आगे रहे। वह सफल हो। बीते कुछ सालों में अगर देखा जाए तो मां-बाप अपने बच्चों पर अब किसी किस्म का दबाव नहीं डाल रहें। बस अब वे अपने बच्चों से इतना चाहते हैं कि बच्चे जो भी करना चाहें करें बस, वे सफल और खुश रहें।

विकल्प में कमी नहीं

डिजीटल युग आ गया है। जाहिर है अब करियर विकल्पों का भी दायरा बढ़ा है। अब सिर्फ डॉक्टर, इंजीनियर, अध्यापक, सीए, सीएस, डिजाइनर्स, होटल इंडस्ट्री के इतर बहुत-से क्षेत्र हैं। जहां आप खुद को स्थापित कर सकते हैं। बहुत से नए पद और क्षेत्र सृजित हुए हैं। इसमें ऐसा ही एक नया-नवेला पद वर्चुअल एसिस्टेंट, सलाद डेकोरेटर्स का भी है। एक वर्चुअल असिस्टेट घर बैठे पचास हजार तक आसानी से कमा सकता है। वहीं सलाद डेकोरेशन में भी संभावनाएं कुछ कम नहीं हैं।

बच्चे का दिशानिर्देश करें

हम और आप नई पीढ़ी के माता-पिता है। हम अपने बच्चों को खुश देखना चाहते हैं। बच्चे बेहतर कर पाएं इसकी जिम्मेदारी तो हमारी ही है। बच्चा कई बार खुद बहुत असमंजस में होता है कि वह क्या करे और क्या नहीं। ऐसे में आप उसका एप्टीट्यूट टेस्ट करवा सकते हैं। इससे आपको और उसे पता चल जाएगा कि उसका रूझान किस क्षेत्र में है और वह किसमें बेहतर कर सकता है। आप बच्चे के स्कूल में भी इस बारे में विचार-विमर्श कर सकते हैं।

जागरुकता की कमी

अगर पहले की पीढ़ी की बात करें तो पहले परिवार के लोग एक दूसरे के साथ जुड़े रहते थे। किसका बच्चा क्या कर रहा है हमें पता होता था। इस जुड़ाव की दोबारा से जरूरत है। बच्चे अपने बड़े भाई-बहन से भी उस करियर से संबधित सलाह ले सकते हैं। आप हैरान हो जाएंगे कि वे बच्चे जो कॉलेज में पढ़ रहे हैं उन्हें अपने क्षेत्र के साथ दूसरे की भी उतनी ही नॉलेज होगी। वे आपके बच्चों को बेहतर मार्गदर्शित कर पाएंगे। ऐसे में नए विकल्पों का भी उनके जीवन में आगमन होगा।

केस स्टडी पर हो चर्चा

दुनिया भर में एक मशविरा है कि हम सफल लोगों की कहानियां सुनते हैं। हम जानना चाहते हैं कि वे कैसे सफल हो पाए। ऐसे ही अपने बच्चों को अपने ही परिवार की सफल लोगों की कहानी भी सुनानी है। जैसे मानिए कि परिवार का कोई बच्चा आईएएस बन गया। बच्चों को खाने की टेबल पर उसकी आईएएस बनने की मेहनत के बारे में बताएं। उसे बताएं कि इस पद को पाने के लिए उसने कितनी मेहनत की है। बच्चे को ऐसी बातें प्रोत्साहित करती हैं।

प्लान बी की भी हो बात

आजकल अभिभावकों को इस बात का बड़ा डर रहता है कि बच्चे तनाव में आकर कुछ उलटा-सीधा कदम न उठा लें। ऐसे में हमें उन्हें बताना चाहिए कि प्लान बी का एक विकल्प हमेशा मौजूद रखो। जैसे यदि आप बड़े कॉम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं तो इस बात का विकल्प तैयार रखें कि यहां नहीं हुआ तो आगे क्या करना है। हमें बच्चों के अंदर यह बात डालनी चाहिए कि जीवन में विकल्प हैं। बस उनमें अपने लिए बेहतर हमें चुनना है। बच्चे अपने मां-बाप से बहुत कुछ सीखते हैं अगर आपने भी कुछ ऐसा कर रखा था तो बच्चों को उसकी जानकारी जरूर दें।

विदेश में पढ़ाई

बहुत बच्चों का सपना होता है कि वे विदेश जाकर पढ़ाई करना चाहते हैं। बहुत से मध्यम वर्गीय परिवारों सें संबंध रखने वाले अभिभावक अपने हालातों की दुहाई देते हैं। लेकिन वही है कि जानकारी के अभाव की वजह से हम ऐसा करते हैं। जबकि इटली और स्विजरलैंड जैसे देशों में 100 प्रतिशत स्कॉलरशिप मिलती है। आपका बच्चा भी बाहर पढ़ सकता है। सिर्फ अनुमान लगाकर निर्णय नहीं लेने चाहिए।

स्टार्टअप और युवा

आजकल युवाओं में उद्यमी के प्रति गजब ही उत्साह देखते ही बनता है। अमूमन बच्चे 12वीं के बाद अपने दोस्तों के साथ मिलकर कुछ स्टार्टअप करना चाहते हैं। अगर आपका बच्चा भी ऐसा करना चाहता है तो उसे रोके नहीं। उसे बस इतना कहें कि वह जिस भी क्षेत्र में काम करने का सोच रहा है उसकी किसी स्थापित कंपनी तीन से छ: महीने इंटर्नशिप कर ले।

इससे उसे उस क्षेत्र के बारे में जानकारी होगी। मान लीजिए कि उसका स्टार्टअप सफल नहीं भी हो पाता तो कम से कम उसे अनुभव तो होगा। उसे बताएं कि आप हैं एक छोटा-सा बच्चा जब इस दुनिया में आता है तो हमारी ही जिम्मेदारी बनता है।

उसे उसका नाम भी हम ही देते हैं। वह कौन-से स्कूल जाएगा यह भी हम ही तय करते हैं। ऐसे में अगर आप देखें कि वह खुद से कोई करियर विकल्प अपने लिए चुनता या चुनती है तो उसमें उसका साथ दें। ऐसा भी हो सकता है कि कोर्स करने के दौरान ही उसे वह पसंद न आए। ऐसे समय में बच्चे को कतई भी अकेला न महसूस होने दें। उसके कठिन समय में उसका साथ दे। उसे अहसास दिलाएं कि मां-पापा उसके साथ हमेशा हैं। असफलता सफलता की पहली सीढ़ी है।

उसे भी सराहें

बहुत बार ऐसा होता है कि हम प्रभाव में आकर दूसरों के बच्चों की बहुत तारीफ करने लगते हैं। उसे हमेशा डांटें-डपटे नहीं। उसकी तारीफ खुलकर करें। चाहे वह उसकी पेंटिंग हो, फोटोग्राफी हो या दूसरी कोई स्किल।

सबसे अहम बात

दसवीं के बाद बच्चों को करिअर के बारे में निर्णय लेना होता है। मान लीजिए बच्चा आपको कुछ अनोखे करिअर विकल्प के बारे में बताए तो उसे तत्काल खारिज न कर दें। उसके बारे में आप अपने दोस्तों या इंटरनेट सर्च इंजन से जानकारी निकाल सकते हैं। आप यह भी देखें कि बच्चा कहीं अपने पीयर प्रेशर की वजह से तो कोई निर्णय नहीं ले रहा। पीयर प्रेशर का अर्थ है ‘बराबरी’ । इस समय बच्चे पर ध्यान देना जरूरी है कि वह कहीं अपने साथियों के साथ प्रतिस्पर्धा को लेकर कुछ ज्यादा ही गंभीर तो नहीं है!

बच्चों के सामने अन्य विकल्प भी रखें, उन्हें समझाएं कि सबकी रुचि अलग-अलग
होती है।

Leave a comment