आप अपने बच्चों को कितना प्यार करती हैं? आपसे जब भी यह सवाल पूछा जाएगा तो क्या आप इसका जवाब दे सकती हैं? सच कहा जाए तो इस सवाल का कोई जवाब है ही नहीं, इसलिए यह सवाल अपने आपमें निरर्थक है। लेकिन बात जब काजोल की आती है, जो दो बच्चों की मां हैं तो इस सवाल का जवाब उनके पास है। कुछ महीनों पहले एक कमाल की फिल्म “त्रिभंग” में दिखने वाली काजोल एक हैंड-ऑन पेरेंट हैं, जो हमेशा अपने बच्चों के लिए उपस्थित रही हैं। त्रिभंग रेणुका शहाणे द्वारा निर्देशित एक भावनात्मक फिल्म है, जिसमें तीन पीढ़ियों को दिखाया गया है। यह फिल्म तीन पीढ़ी की औरतों पर आधारित है, जो अपने रिश्तों से दुखी हैं।
पेरेंटिंग के बारे में उनकी राय जानकर आपको आश्चर्य भी होगा और इससे उनकी ईमानदारी का भी पता चलेगा। उनकी मानें तो हर पेरेंट को अपने बच्चों को 60% ही प्यार करना चाहिए। काजोल के इस 60% प्यार वाली पेरेंटिंग के बारे में गहराई से जानते हैं।
अगर आप काजोल के पुराने इंटरव्यू और बातों को याद करेंगी तो आपको याद आएगा कि काजोल कभी खुद को एक ऑब्सेसिव मां कहती थीं। लेकिन अब वही काजोल कहती हैं कि अगर आप हर समय अपने बच्चों को नहीं प्यार करते हैं तो यह बिल्कुल नॉर्मल बात है। वह आगे अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहती हैं कि पेरेंटिंग का मतलब एक संतुलन बनाए रखना है, अपने बच्चों को अनकंडीशनली प्यार करना, उनके टैंट्रम्स हैंडल करना और जब वे गलत हों, तुरंत उसी समय उन्हें सच का आईना दिखाना भी उतना ही जरूरी है।
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काजोल के पेरेंटिंग टिप्स
18 साल की नाइसा और 11 साल के युग की मां काजोल ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि कर पेरेंट को अपने बच्चों को सिर्फ प्यार के अलावा, एक हेल्दी फ्रेंडली रिश्ते को भी बनाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जब आप एक पेरेंट से पूछेंगे तो आपको पता चलेगा कि हर समय बच्चे को सिर्फ प्यार ही नहीं किया जाता। यदि आप 60% प्यार भी मैनेज कर लेते हैं तो आपका आपके बच्चों के साथ बढ़िया रिश्ता है। बाकी बचा 40% तब के लिए है, जब वे टैंट्रम्स थ्रो करते हैं या आप। तो 60% प्यार सही है बिल्कुल! उन्होंने यह भी कहा कि एक पेरेंट के तौर पर उन्हें मस्ती और गंभीर पक्ष दोनों देखने और महसूस करने को मिलें।
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सेलेब मम्मी बनना आसान नहीं
किसी के लिए भी एक मां की आलोचना करना बहुत आसान है। और जब सेलेब्रिटी मम्मी की बात आती है ओ यह आलोचना और बढ़ जाती है। ऐसा काजोल का मानना और कहना है। स्टे एट होम पेरेंट्स के लिए मन में बहुत इज्जत रखने वाली काजोल का कहना है कि इंटरनेट पर भी अच्छी और बुरी मां के लिए कई चीजें कही गई हैं। उनका यह भी कहना है कि सेलेब्रिटी मम्मी के तौर पर भले ही उनके पास हेल्प हैं लेकिन शेड्यूल के बीच मैनेज करना, पेरेंटिंग से संबंधित काम, पब्लिक लाइफ, यह सब मिलकर उनके जीवन को कठिन बनाते हैं।
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ऐसे सीखा काजोल ने काम और मम्मी के रोल को मैनेज करना
बच्चों को मैनेज करने के लिए काम से छोटा ब्रेक लेने वाली काजोल के लिए काम और पेरेंटिंग दोनोंको एक साथ मैनेज करना मुश्किल काम लगता है। उनका कहना है कि बतौर एक महिला, एक्टिंग के साथ मां की जिम्मेदारी और अपने परिवार का ध्यान रखना, इन सबको बैलेंस करना उनको बहुत मुश्किल काम लगता है। बच्चों के उठने से पहले सुबह- सुबह उठकर वर्क आउट करना, उन्हें स्कूल के लिए तैयार करना, फिर शूटिंग के लिए निकलना, हर चीज को माइक्रो मैनेज करना आसान नहीं है। अब के समय में पेरेंटिंग को फिर से परिभाषित करने की जरूरत है, साथ ही दुनिया को मांओं की आलोचना करना छोड़ना होगा कि फलां मम्मी ने यह सही नहीं किया, वह नहीं किया!
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अपनी मां तनूजा से मिली पेरेंटिंग सलाह
फेमस एक्ट्रेस तनुजा की बेटी काजोल का यह भी कहना है कि उन्होंने अपनी मां से कई जरूरी पेरेंटिंग लेसन सीखे हैं, जिसे वह अभी भी मानती हैं। उसमें से एक सीख यह है कि बच्चों को अपना काम खुद करने देना चाहिए। उन्हें बार- बार सिखाते- समझाते नहीं रहना चाहिए। काजोल कहती हैं, मेरी मां ने मुझे कई बातें समझाई हैं, उनमें से सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चों को खुद अपने बारे में सोचने दो।
काजोल का कहना है कि उनकी अपनी मां की पेरेंटिंग के बारे में सोच ने उन्हें प्रेरणा दी। वह कहती हैं, मेरी मां बिल्जुल मेरे अपोजिट हैं। उन्होंने मुझे ‘रेबेल अपब्रिंगिंग” नाम दिया है। मुझे बहुत अलग तरीके से उन्होंने बड़ा किया है। काजोल का कहना है कि तनूजा की कठिन पेरेंटिंग की वजह से आज वह एक खुशमिजाज पेरेंट हैं। मेरा मेरी मां के साथ बहुत प्यारा रिश्ता है। उन्होंने मेरी लाइफ में जो कुछ भी किया है, मेरे लिए जो भी निर्णय लिए हैं, वह सब उन्होंने मुझे समझाया है, जिस तरह से मैं समझ सकती थी। फिर चाहे मेरे मां- पापा का अलगाव हो या उनका काम पर जाना।
वह कहती हैं, बच्चों को खुद अपने बारे में सोचना चाहिए, अपने निर्णय खुद लेने चाहिए और खुद ही यह सोचना चाहिए कि उनके निर्णय से सामने आए परिणामों के साथ वे जी सकते हैं या नहीं। इसी तरह से वे सीख सकते हैं कि उनका यह निर्णय उनके लिए सही था या नहीं।
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बच्चे भी देते हैं अच्छी सलाह
काजोल मानती हैं कि ना सिर्फ वह खुद बल्कि उनके बच्चे भी कई बार उन्हें सलाह देते हैं। जैसे उनकी बेटी नाइसा ने उन्हें सोशल मीडिया के बारे में टिप्स दिए और नई भाषा सीखने में उनकी मदद करती है। काजोल का कहना है कि इस तरह से पेरेंट और बच्चे के बीच बॉन्डिंग भी बेहतर होती जाती है। काजोल ने अपने बच्चों के म्यूजिक को भी सुनना शुरू किया है।
आपको काजोल का यह पेरेंटिंग स्टाइल कैसा लगा? आप काजोल की बातों से कितनी सहमत हैं? अपने कमेंट्स में हमें जरूर बताएं!
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