Summary: बच्चों में आत्मविश्वास कैसे बढ़ाएं: पेरेंट्स के लिए आसान और असरदार टिप्स
बच्चे जब सामाजिक दुनिया से डरने लगें, तो सही गाइडेंस और प्रैक्टिस से उनमें आत्मविश्वास लाना ज़रूरी है।
How to Build Confidence in Kids: सभी माता-पिता अपने बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं, लेकिन कई बार माता-पिता समझ ही नहीं पाते कि कब उनका बच्चा बाहरी दुनिया से डरने लगता है। और जब उन्हें यह बात समझ आती है तो वह बच्चे को समझने और समझाने की बजाय बच्चों पर आत्मविश्वास बनाने का अनावश्यक दबाव डालना शुरू कर देते हैं। क्या आपका बच्चा भी बाहरी दुनिया से डरता है, क्या वह भी भीड़ में जाने से, अनजान लोगों से बात करने में या अपने स्कूल में किसी प्रतियोगिता में भाग लेने से डरता है, अगर ऐसा है तो बच्चे पर अनावश्यक दबाव बनाने की बजाए समझदारी के साथ उसके आत्मविश्वास को बढ़ाएं। आइए जानते हैं इस लेख में आप किस तरह बाहरी दुनिया के प्रति अपने बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं।
बच्चों के डर के सामान्य कारण को समझे
वैसे तो अलग-अलग बच्चों में डरने के अलग-अलग कारण हो सकते हैं पर आज हम कुछ सामान्य कारणों को जानेंगे जिनकी वजह से बच्चा बाहरी दुनिया से डरता है। ये कारण है,
अनजान लोगों से भय: ज्यादातर बच्चों में देखा गया है कि बच्चा नई जगह, नए लोगों या नई स्थिति का पहली बार सामना करने से डरते हैं। यह डर बिल्कुल सामान्य है, ऐसा बहुत से बड़े लोगों के साथ भी होता है।
फेल होने का डर या पिछले अनुभव: बच्चे नई चीजों को करने में डरते हैं। उन्हें डर होता है कहीं वह इस कार्य को सही नहीं कर पाए तो उन्हें इस फेलियर की वजह से शर्मिंदा होना पड़े पड़ सकता है। बच्चों में इस तरह का डर अक्सर उनके पिछले अनुभव से पैदा होता है।
पेरेंट्स का व्यवहार: अगर पेरेंट्स बार-बार अपने बच्चों को नकारात्मक शब्द बोलते हैं, जैसे यह तुमसे नहीं होगा, तुम नहीं कर सकते, तुम सब गलत करते हो। इस तरह के वाक्य बच्चों के आत्मविश्वास को लगातार कम करते हैं।

कैसे पहचाने बच्चों में आत्मविश्वास की कमी को
अगर बच्चा छोटा है और उसकी उम्र के ज्यादातर बच्चे वैसा ही बर्ताव करते हैं जैसे अनजान लोगों से बात ना करना, अकेले बाहर ना जाना तो यह सामान्य है। लेकिन अगर बच्चा अपनी उम्र के बच्चों से ज्यादा डर दिखा रहा है तो हम कह सकते हैं, उसमें आत्मविश्वास की कमी है बच्चों में आत्मविश्वास की कमी के संकेत हैं:
किसी से आंख मिलाकर बात ना कर पाना।
अकेले बाहर जाने से डरना।
सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने से बचाना।
खुद को दूसरों से कमतर समझना।
‘मैं नहीं कर सकता’ की भावना से भरे रहना।
अपनी बात को खुलकर कहने से डरना।
यह कुछ संकेत है जो बताते हैं कि आपका बच्चा आत्मविश्वास की कमी से जूझ रहा है।
पेरेंट्स इस तरह बढ़ाएं बच्चों में आत्मविश्वास
उनकी भावनाओं को हां कहें: अगर आपका बच्चा आपसे कहता है उसे डर लगता है तो उससे कहें हां मैं समझता हूं कि तुम्हें डर लग रहा है चलो हम साथ में करते हैं फिर तुम्हें डर नहीं लगेगा।
सकारात्मक भाषा बोले: अपने बच्चों से नकारात्मक भाषा का प्रयोग ना करें। उन्हें कहें, तुम कर सकते हो, तुम अपने डर से आगे निकल सकते हो, डर सबको लगता है पर उस डर को अपनी ताकत बनाकर हम जीत सकते हैं।
उनके प्रयासों को छोटा ना कहें: अगर आपका बच्चा कोई प्रयास करता है तो उसमें कमी देखने की बजाय उनके छोटे प्रयास की भी सराहना करें। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह पहले से बेहतर करने की कोशिश करते हैं।
अपने बच्चों के आदर्श बनें: बच्चा अपने माता-पिता को देखकर सीखते हैं। अगर आप लोगों से बात करते हुए आत्मविश्वास से भरे रहते हैं, खुश रहते हैं तो बच्चा भी आपको देखकर यही सिखाता है।
बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ना एक निरंतर चलने वाला कार्य है, इसके लिए माता-पिता को हर रोज प्रयास करना चाहिए।
