पिता के संरक्षण को सिर्फ उस एक उदाहरण से जाना जा सकता है जिसे अमूमन हर व्यक्ति ने देखा होगा और स्वयं भी महसूस किया होगा ‘पापा की गाड़ी पर पीछे बैठे बच्चे को’। पापा को कसकर पकड़े उसके नन्हें हाथ बताते हैं कि पापा हैं तो कोई डर नहीं। सबसे बेफिक्र वह अपनी ही दुनिया में आसपास के नजारे बड़े आत्मविश्वास के साथ देखता चलता है क्योंकि उसे मालूम है कि वह पापा के साथ है, तो फिर कैसी चिंता! मंजिल पर तो पहुंचना ही है।

यही सुरक्षा का अहसास बच्चे को मजबूत विश्वास वाला बनाता है। पिता भले ही अपनी पदवी से मां की तुलना में कठोर माने जाते हैं, मगर इस कठोरता के भीतर भी वह ढेर सारा प्यार छिपाए हुए रहते हैं क्योंकि प्रकृति ने ही उन्हें संरक्षणवादी और अनुशासनात्मक प्रवृत्ति का बनाया है। इसके लिए उन्हें इसी भूमिका में ही पहचान मिली है। जहां मां बच्चे की पहली शिक्षक होती है वहीं पिता पथप्रदर्शक। बच्चे की नन्हीं अंगुलियों को थामे पिता का हाथ ही उसे रास्तों पर चलने का हौसला दिलाता है।

मंजिल तक पहुंचने के लिए तमाम मुसीबतों, मुश्किलों से लड़ने का साहस भी पिता ही दिलाते हैं। कुल मिलाकर वे अपने अनुभवों से बच्चों को दुनियादारी के वह पाठ पढ़ाते हैं, जो उन्हें उनके भविष्य की मंजिल तक पहुंचने में मदद करते हैं।

पिता का मौन प्यार भले ही दिखता ना हो, मगर अपने बच्चों के लिए हमेशा आदर्श होता है। अक्सर बच्चों को कहते सुना होगा?” पापा डांटते हैं! पापा टोकते हैं !पापा नाराज होते हैं !पापा किसी की नहीं सुनते हैं”!

बचपन में शिकायतों की जो पोटली होती है  वह धीरे-धीरे खुलती है और गायब होती चली जाती है। फिर   एक वक्त ऐसा आता है जब हम सब कहते हैं,” हां पापा सही कहते थे। “

बच्चों को बाहरी दुनिया में जीना, एक पिता ही सिखाता है। जितना जीवन में मां का महत्व है ,उतना ही पिता का भी ।परवरिश   देने का मतलब सिर्फ  अच्छी शिक्षा या सारी सुविधाएं देना ही नहीं है ,बल्कि उसके व्यक्तित्व को निखार कर ,उसे आत्मविश्वास से भरपूर एक ऐसा बच्चा बनाना है ,जो ना सिर्फ यह जानता है कि उसे जिंदगी में क्या करना चाहिए, बल्कि यह भी जानता हो कि उसे किस तरह पाना है। इस काम में एक पिता ही ज्यादा मदद कर सकता है ।एक शोध के मुताबिक पहले के मुकाबले  आज  के   पिता, बचपन में बच्चों का ज्यादा ध्यान रखते हैं ।उनकी जरूरतों के प्रति ज्यादा फिक्र  मंद रहते हैं ।इतना ही नहीं अपने बच्चे  के   सुख-दुख से लेकर,  उसकी सभी भावनाओं पर खुलकर बातें भी करते हैं ।
दोस्त  की तरह खेलते हैं तो बच्चों  की  तरह लड़ते हैं  ।

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