दिन भर उनके पीछे भागना, चाहे उनकी शैतानियों के लिए उन्हें पीटना हो या चाहे खाने की थाली ले कर उनके पीछे दौड़ना। दिन भर उनके पीछे दौड़ते रहना।

पहले समय में बच्चे जब स्कुल जाते थें। तब मां घर पर ही अपने बच्चों के आने की राह देखती थी। उनके आते ही जैसे घर में रौनक साथ आती थी और मां भी हंसते खिलखिलाते हुए उनके बैग उतारती थी और उनके लिए प्यार से खाना परोसती थी। पहले समय में यह बदलाव नहीं था, उस समय बच्चों के लिए जो भी कपड़े खरीद लीजिए। वो खुशी से फूले नहीं समाते थें लेकिन समय के साथ हर चीजों में बदलाव आ चुका है।

मां आज की ‘मोम से सुपर मोम’ बन चुकी हैं। इस समय न केवल वो घर को सम्भालती हैं, बल्कि वो बाहर के कामों को भी बखूबी सम्भालती है। ऑफ़िस से आते ही अपने बच्चों को समय देना उनके साथ खेलना और उनके पढ़ाई में ध्यान देना। जैसा कि आज के समय में पढ़ाई के क्षेत्र में कॉम्पटिशन बढ़ चुका है। सुबह जल्दी उठकर उनके लिए खाना बनाना।

यही नहीं आज कल के बच्चे भी पहले समय के बच्चों से हर क्षेत्र में आगे हैं। चाहे वो पढ़ाई हो या खेल का मैदान। जैसा की उपर हमने बताया कि पहले के बच्चों को कोई भी कपड़े दिला दो तो खुश हो जाते थें, लेकिन आज के बच्चे खुद के पसंद के कपड़े पहनना पसंद करते हैं क्योंकि बच्चे आज के फैशन को समझते हैं।

हम कह सकते हैं कि पहले समय की मां जरूर एक कृतज्ञता और ममता से भरी मूर्त थी, लेकिन आज की मां सुपर मोम है जो हर तरह से अपने आपको पर्फेक्ट रखती है। चाहे वो घर सँभालना हो या ऑफ़िस दोनों को बैंलेंस करके चलती है।

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