बच्चों को उनकी पसंद के अनुसार छोड़ दिया जाए तो आप पाएंगे कि स्कूल जाने के अलावा उनकी सारी एक्टिविटी टीवी और फोन के स्क्रीन के सामने ही होती है। उन्हें काउच पोटैटो बनने से बच्चे के पेरेन्ट ही रोक सकते है। कैसे? उनके साथ समय बिता कर, उन्हें किसी हेल्दी, क्रिएटिव एक्टिविटी में व्यस्त करके। पढिए- 

उन्हें पार्क लेकर जाएं- 

बच्चे के साथ पार्क जाएं। याद रहे पार्क में बच्चे को रोज़ जॉगिंग, रनिंग या एक्सरसाइज़ जैसा कोई एक्टिविटी कराने पर वो बोर होने लगते हैं और दो ही तीन दिन में पार्क जाने से नकारने लगते हैं। पार्क में वो जैसे चाहे वैसे खेलने दें। आप चाहे तो हर दिन अपनी एक्टिविटी बदल सकते हैं।

साथ में करें गार्डनिंग-
 
गार्डनिंग अपने आप में एक एक्सरसाइज है। बच्चे को अपने साथ गार्डनिंग करने के लिए एंकरेज करें। इससे उन्हें प्रकॉति को समझने का मौका मिलेगा औऱ फूल पौधों से लगाव भी होगा। 
 
साथ में बनाए कुछ क्रीएटिव-
 
आप किसी दिन चाहे तो बच्चे के साथ बैठकर कुछ क्रिएटिव क्राफ्ट वर्क कर सकती हैं। बच्चे के साथ हैंड पेंटिंग कर सकती हैं। किसी कैनवस पर अपना और बच्चे के हाथ का छाप लें और उशे सुन्दर से डेकोरट करेके यादगार मोमेंटो बना सकती हैं।  
 
योगा या डांस क्लास में एंरॉल हों-
 
ऐसे बहुत सारे डांस स्कूल्स हैं जहां एक साथ पेरेन्ट और चाइल्ड के लिए डांस सेशन होता है, आप बच्चे के साथ योगा, डांस, स्विमिंग सीख सकते हैं। ऐसे ना सिर्फ आपका बच्चा हर वक्त एक्टिव रहेगा , उसे आपके साथ क्वालिटू टाइम बिताने का समय भी मिलेगा। 
 
खुद बनें रोल मॉडल-
 
अगर पेरेन्ट खुद टीवी देखना एंजॉय करते हैं, तो बच्चे से ये कहना मुश्किल होगा कि कि तुम टीवी मत देखो। बच्चे को किसी भी तरह की एक्टिविटी में बिज़ी करने के पहले ये जरूरी है कि पेरेन्ट भी उस एक्टिविटी को लेकर उतना ही उत्साहित हो।