बच्चों के साथ ओवर फ्रैंडली न हो माता-पिता: Over Friendly Parenting
Over Friendly Parenting

Over Friendly Parenting: बात जब बच्चे की परवरिश की आती है तो हर मां-बाप इसे बेहतर से बेहतरीन करना चाहते हैं। अब वो जमाना नहीं बचा जब बच्चों को अपने मां-बाप से डर लगता था। मां हमेशा से बच्चों के लिए एक ढाल बनकर रही है जबकि पिता का स्वभाव एक समय पर थोड़ा सख्त हुआ करता था। लेकिन, जब से पिताजी-डैड और मां-मॉम बन गए हैं वो बच्चों के साथ थोड़ा कूल और फ्रेंडली हो गए हैं। लेकिन, इस कूल और फ्रेंडली नेचर के साथ आपको ध्यान रखा हैं कि आपको बच्चों के फ्रैंड्ली पेरेंट्स बनना न कि उनका दोस्त। आपको ये भी याद रखना हैं कि बच्चों को दोस्त तो दुनिया में कई मिलेंगे पर माता-पिता नहीं। हम इस आर्टीकल में आपके साथ कुछ ऐसे पॉइंट्स पर चर्चा करेंगे जिससे आपको फ्रैंड्ली पेरेंट तो बनना है लेकिन बच्चों का दोस्त नहीं।

बच्चे के सामने न फाइनेंशियल स्टेट्स की चर्चा

हम 90 के दशक की जेनरेशन है हमें याद है कि हमें कोई जेबखर्ची नहीं मिलती थी लेकिन, जब हमें जरुरत होती थी तो हमें पैसे मिलते थे। हमें अपने पेरेंट्स का फाइनेंशियल स्टेट्स नहीं पता था। आजकल बच्चों को पॉकेट मनी मिलना आम है और इसमें कोई बुराई भी नहीं। लेकिन, अगर आप एक फ्रैंडली पेरेंट हैं तो उन्हें पैसे देते वक्त पैसे की अहमियत बताएं लेकिन अपना फाइनेंशियल स्टेट्स बच्चे के साथ शेयर न करें। बहुत बार ऐसा होता है कि पेरेंट्स अपने बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करने के चक्कर में बिजनेस के अपडाउन बताने लगते हैं इससे बच्चों को स्ट्रेस हो जाता है। आप याद रखें कि उनकी उम्र स्ट्रेस को झेलने की नहीं है।

टीवी देखते हुए ध्यान रखें

अक्सर ही पैरंट्स अपने बच्चों के साथ मूवीज देखते हैं। अगर आप भी अपने बड़े होते बच्चों के साथ मूवीज या टीवी शो देखते हैं तो आपको याद रखना होगा कि आप या आपका बच्चा मूवी-टीवी में दिखाई दे रहे कलाकारों पर कोई भी ऐसा कमेंट न करें जो माहौल के अनुसार उचित न हो। अक्सर देखा जाता है कि जब आप फ्रेंड्स के साथ किसी मूवी में कलाकारों को बॉडी फ्लॉन्ट करते हुए देखते हैं तो कमेंट कर एक दूसरे से तालियां मारते हैं। इस चीज़ को आपको अपने बच्चों या बच्चों को पैरंट्स के साथ नहीं दोहराना हैं, क्योंकि ये फ्रेंडली नेचर नहीं बल्कि बदतमीजी होती है। अपने बच्चों के साथ घूमें-फिरें मूवी देखें शॉपिंग करें लेकिन तमीज का दायरा न भूलें। न आप और न ही बच्चे। आप बच्चों के साथ फिल्मों के सब्जेक्ट, किसी एक्टर की एक्टिंग कैलिबर के बारे में बात करें। अच्छी बात है लेकिन कौन कूल लग रहा था और कॉन सुपरहॉट यह बातें दोस्तों में अच्छी लगती हैं। इन्हें दोस्तों तक ही रहने दें।

शब्दों का सही इस्तेमाल

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पाकिस्तानी एक्टर माहिरा खान का इन दिनों एक विडियो वायरल हो रहा है जिसमें वो बताती हैं कि एक बार उन्हें यार बोलने की आदत पड़ गई थी। उन्होंने अपनी नानी से भी यार करके ही बात की। लेकिन उनकी नानी ने उन्हें आढे़ हाथों लिया और कहा कि बेटी तुम्हें यार का मतलब पता है। उन्होंने जब नहीं में सर हिलाया तो कहा एक बार पहले मतलब पता करके आओ फिर यार कहना। आप भी इस शब्द का मतलब तलाशें। यह वो शब्द नहीं है जिससे कि पेरेंट्स को संबोधित किया जाए। बच्चे अगर दूसरों की देखा-देखी आपको यार कह रहे हैं तो उन्हें उसी समय टोकें। यही वो छोटी चीजें होती हैं जिनका प्रभाव परवरिश में बहुत आगे तक जाता है।

अपने रिश्तों के बारे में न करें बात

हम लोग भले ही पेरेंट्स हैं लेकिन हमारे भी अपने बहन-भाई और दोस्त हैं। बहुत बार हमारी उनसे कुछ खट-पट भी हो जाती है लेकिन आपको पता है कि ओवर फ्रैंडली पेरेंट्स अपने बच्चों को अपने रिलेशंस के बारे में खुलकर बताते हैं यहां तक कि जो मां-बाप बच्चों के दोस्त बन जाते हैं वो अपने आपस के झगड़े भी बच्चों को बताने और उनसे सुलझवाने लगते हैं। एक मिनट ब्रेक लीजिए बच्चों के साथ अपने रिलेशन के कड़वे अनुभवों को न बताएं। वो इस बात को नहीं समझ पाएंगे हो सकता है कि उनके मन में किसी के लिए कोई गलत धारणा बन जाए। फ्रैंडली पेरेंट्स होने के नाते आपकी जिम्मेदारी इतनी है कि बच्चा आपसे अपनी बात खुलकर करे, न कि आप उनसे खुलकर कुछ भी बोलने लग जाएं। उसके साथ बातचीत के दरवाजे इस हद तक खोल लें कि उसे लगने लगे कि चाहे कोई दुनिया में मेरा साथ दे या न दें लेकिन मम्मा- पापा मेरे लिए हमेशा खड़े हैं। इसमें इस बात का भी ध्यान रखें कि बच्चे आपसे इतने भी न खुल जाएं कि वो आपके ऊपर कमेंट कर रहे हैं और आप हंसकर उन्हें टाल रहे हैं याद रखें कि बच्चों को वक्त पर रोकना-टोकना बहुत जरुरी है।

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