Sade Sati : शनि की साढ़े साती का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है। कहा जाता है कि जब शनि की साढ़े साती किसी व्यक्ति के जीवन में प्रवेश करती है, तो उसके लिए कठिनाइयों का दौर शुरू हो जाता है। जीवन में अचानक परेशानियां बढ़ने लगती हैं, मानसिक तनाव, आर्थिक संकट और रिश्तों में उतार-चढ़ाव महसूस होने लगता है। ज्योतिष शास्त्र में इसे एक महत्वपूर्ण ग्रह दशा माना गया है, जो कुल साढ़े सात वर्षों तक प्रभाव डालती है। हालांकि, सही समय पर किए गए उपायों से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।
शनि कृपा पाने का शुभ अवसर
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवरात्रि एक अत्यंत पावन और शक्तिशाली अवधि होती है, जब किए गए उपायों का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि ज्योतिषाचार्य नवरात्रि के दौरान शनि की साढ़े साती से राहत पाने के लिए विशेष उपाय करने की सलाह देते हैं। चाहे वह चैत्र नवरात्रि हो या शारदीय, इस समय किए गए उपायों से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।
शनि की साढ़े साती में दुर्गा सप्तशती का महत्व
दुर्गा सप्तशती को शक्ति साधना का सबसे प्रभावशाली ग्रंथ माना जाता है, जिसमें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की महिमा का वर्णन किया गया है। नवरात्रि के दौरान जब व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति भाव से दुर्गा सप्तशती का पाठ करता है, तो न केवल उसे मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि शनि की साढ़े साती के प्रभाव को भी कम किया जा सकता है।
सप्तशती के सात सौ श्लोकों में मां के शौर्य, करुणा और भक्तों की रक्षा के दिव्य प्रसंग बताए गए हैं, जो नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर जीवन में सुख-समृद्धि लाते हैं। शनि ग्रह से उत्पन्न कष्टों से मुक्ति के लिए नवरात्रि में इस ग्रंथ का पाठ करना अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है।
दुर्गा सप्तशती का पाठ
नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करना शनि की साढ़े साती से राहत पाने के लिए अत्यंत प्रभावशाली उपाय माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, साढ़े सात साल की इस अवधि में हर वर्ष के लिए सौ श्लोकों का पाठ किया जाता है, जिससे कुल सात सौ श्लोक पूरे होते हैं।
इसके अलावा, अंतिम छह महीनों के लिए दुर्गा कवच का छह बार अखंड पाठ करना लाभकारी होता है। नवरात्रि के नौ दिनों तक नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ करने और दशमी के दिन विशेष रूप से दुर्गा कवच का पाठ करने से शनि के प्रभाव को शांत किया जा सकता है।
‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करें
शनि देव की कृपा पाने और साढ़े साती के कष्टों को कम करने के लिए नवरात्रि के दौरान उनकी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। इस अवधि में शनि मंदिर जाकर ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करने से शनि देव शांत होते हैं और उनके दुष्प्रभाव में कमी आती है।
साथ ही, शनि की कृपा प्राप्त करने के लिए तेल का दीपक जलाना, काले तिल अर्पित करना और जरूरतमंदों को काले वस्त्र, लोहे का सामान या उड़द दाल का दान करना शुभ माना जाता है।
हनुमान चालीसा का नियमित पाठ
नवरात्रि के दौरान हनुमान जी की पूजा करना शनि की साढ़े साती के प्रभाव को कम करने के लिए अत्यंत प्रभावी उपाय माना जाता है। हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से शनि के प्रतिकूल प्रभाव शांत होते हैं और व्यक्ति को शनि देव की कृपा प्राप्त होती है।
हनुमान जी को संकटमोचक कहा जाता है, उनकी उपासना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सफलता एवं समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इसके अलावा, नवरात्रि में शमी के पौधे में काले तिल अर्पित करने से भी शनि की पीड़ा में राहत मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
