Mysore Dussehra Festival Trip: कुछ ही दिनों में वह ऐतिहासिक त्योहार आने वाला है जिसे हम अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में मनाते है। जैसा की हम सभी जानते हैं की इस दिन भगवान श्री राम ने रावण के अहम का नाश करते हुए लंका पर विजय प्राप्त की थी। शक्ति की उपासना के नौ दिनों के बाद यह त्यौहार आता है। कर्नाटक के मैसूर शहर में इसे बड़े ही हर्षोल्लास और उमंग के साथ मनाया जाता है। मैसूर, कर्नाटक का वह शहर है जो आज भी अपनी परंपरा और रीतियों को साथ लेकर चल रहा है। मैसूर में मनाए जाने वाले इस दशहरा की ख्याति देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक फैली है और यही कारण है की हज़ारों विदेशी हर साल दशहरा के इस त्योहार को मनाने के लिए भारत आते हैं और यहां के रंग में रंग जाते हैं। तो आप भी दशहरा की इन छुट्टियों में मैसूर जाने का प्लान कर सकते हैं और इस वर्ल्ड फेमस दशहरा का लुत्फ उठा सकते हैं।
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दशहरा पर्व को खास और यादगार बनाने के लिए मैसूर की ट्रिप करें प्लान : Mysore Dussehra Festival Trip

ऐसे जाएं
हवाई यात्रा की बात करें तो देश के मुख्य एयरपोेट्स से काफी कम ही फ्लाइट्स मैसूर जाती हैं, लेकिन आप बेंगलुरु के लिए उड़ान भर सकते हैं और वहां से मैसूर शहर तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग अपना सकते हैं। मैसूर का रेलवे स्टेशन दक्षिण भारत के सभी प्रमुख शहरों और उत्तर के कुछ शहरों से भी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। मैसूर तक सड़क मार्ग से भी आसानी से पहुंचा जा सकता है क्योंकि यहां राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों का एक बेहतरीन नेटवर्क है और बसें भी आसानी से उपलब्ध हैं।
यहां करें स्टे
अगर स्टे की बात करें तो वैसे तो मैसूर में अनेकों होटेल्स और पैलेस आदि मौजूद हैं लेकिन दशहरा के समय वहाँ के दशहरा एक्सीबिशन ग्राउंड के पास स्टे करना ज़्यादा बेहतर होगा, तो आप निम्न होटेल्स में स्टे करने का प्लान कर सकते हैं, यह सभी मैसूर के टॉप रेट्ड होटल्स हैं,
•रेडिसन ब्लू प्लाजा होटल
•होटल एमबी इंटरनेशनल
•होटल सेपोय ग्रैंड बाय युवराज ग्रुप ऑफ होटेल्स
•लेक्सस इनन
•सफारी क्वेस्ट
खास है नादहब्बा
क्या पहले कभी आपने यह नाम सुना है? अगर नहीं तो आज जान लीजिये की मैसूर में दशहरा को नादहब्बा के नाम से जाना जाता है। इस दिन मैसूर का शाही परिवार इस कार्यक्रम में शिरकत कर वैदिक रीति-रिवाज़ से पूजन करता है। इसी के साथ दशहरा के दिन शाही परिवार का दरबार भी लगता है जिसकी खूबसूरती देखते ही बनती है। इस परम्परा की शुरुवात वाडिया राजा वोडेयार ने 15 वीं शताब्दी में की थी जो आज तक चली आ रही है।
निकलती है शाही सवारी
यहां ठीक उसी प्रकार शाही सवारी निकाली जाती है जैसी पुराने समय में राजघरानों से निकलती थी। पहले दिन की सवारी में सभी अस्त्र-शस्त्रों की विशेष पूजा होती है और उसके बाद ऊंट, घोड़े, हाथी, नृतक आदि से लेस बहुत ही भव्य सवारी निकाली जाती है। दूसरे दिन की सवारी जम्बो कहलाती है जिसमें देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा एक बेहद ही सुंदर और विशालकाय हाथी वर विराजमान होकर सम्पूर्ण शहर के भ्रमण के लिए निकलती हैं। सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए इन सभी हथियों को वेल ट्रेन्ड किया जाता है।
पांडवों से है नाता
यह जो सवारियां निकाली जाती हैं ये सभी मैसूर पैलेस से निकलकर समस्त शहर में घूमने के बाद बन्नीमंडप मैदान में जाकर विश्राम लेती हैं। पौराणिक मान्यताओं और दंत कथाओं के अनुसार बन्नीमंडप मैदान में वह पेड़ आज भी स्थित है जहाँ पांडवों के अज्ञातवास में जाने से पहले अपने सभी अस्त्र-शस्त्र छुपाए थे।
होती हैं प्रतियोगिताएं
मैसूर के दशहरे में ही कई तरह की प्रतियोगिताओं जैसे पेट शो, कुश्ती, फ़ूड फेस्टिवल, ट्रेजर हंट व हेरिटेज टूर का भी आयोजन होता है जिनमें करोड़ों रुपये खर्च किये जाते हैं। इसके अलावा यहां होने वाली रामलीला भी बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण होती है जिसमें व्यक्ति को मंत्रमुग्ध कर देनी की शक्ति होती है।
मैसूर के दशहरे की खूबसूरती का वर्णन शब्दों में करना बहुत ही कठिन है, उसे महसूस करने के लिए आपको वहां जाना ही होगा। इसके अलावा शहर के शीर्ष आकर्षणों में मैसूर पैलेस, मैसूर चिड़ियाघर, श्री चामुंडेश्वरी देवी मंदिर, कर्णजी झील, रंगनाथिटु पक्षी अभयारण्य, श्री नंदी मंदिर, दरिया दौलत बाग और सेंट फिलोमेना कैथेड्रल शामिल हैं।
