Summary: बजट 2026: इनकम टैक्स में छोटे लेकिन अहम बदलाव
इस बजट में टैक्स स्लैब या रेट में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया। मुख्य सुधार टैक्स रिटर्न फाइलिंग आसान बनाने और कुछ खर्चों पर टैक्स कम करने पर केंद्रित हैं।
Incom Tax in Budget 2026: हाल ही में पेश बजट 2026 में इनकम टैक्स को लेकर कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। लेकिन कुछ छोटे, मगर महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं, जो आम लोगों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकते हैं। खासकर रिवाइज्ड रिटर्न, विदेश पैसे भेजने पर टैक्स, और फ्यूचर ट्रेडिंग पर किए गए बदलाव ध्यान देने लायक हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं इन 6 बड़े बदलावों को:
नया इनकम टैक्स कानून लागू होगा
सरकार पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 को बदलकर इनकम टैक्स एक्ट 2025 ला रही है। यह नया कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इस बदलाव का उद्देश्य केवल टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। टैक्स स्लैब या रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
- नया कानून: इनकम टैक्स एक्ट 2025
- लागू तारीख: 1 अप्रैल 2026
- टैक्स स्लैब/रेट में कोई बदलाव नहीं
- उद्देश्य: रिटर्न फाइलिंग को आसान बनाना
विदेश पैसे भेजने पर टैक्स कम
विदेश में पढ़ाई या इलाज के लिए पैसे भेजने पर अब TCS (Tax Collection at Source) टैक्स घटकर 2% कर दिया गया है। विदेशी टूर पैकेज पर भी पहले जो 5% और 20% TCS लगता था, अब इसे 2% कर दिया गया है। इससे विदेश में पैसे भेजना अब थोड़ा सस्ता और आसान होगा।
पढ़ाई/इलाज के लिए TCS: 5% → 2%
विदेशी टूर पैकेज TCS: 5%-20% → 2%
फायदा: विदेश ट्रांजैक्शन सस्ता और आसान

TDS कटने से बचने के लिए एप्लिकेशन की जरूरत नहीं
अब अगर आपकी इनकम पर टैक्स नहीं बनता है, तो TDS स्वतः नहीं कटेगा। पहले इसके लिए फॉर्म 15G (60 साल से कम वाले) या 15H (वरिष्ठ नागरिक) जमा करना जरूरी था।
TDS अपने आप नहीं कटेगा यदि टैक्स योग्य नहीं है
फॉर्म 15G/15H की जरूरत खत्म
टैक्सपेयर को झंझट कम
रिवाइज्ड रिटर्न की आखिरी तारीख बढ़ी
पहले इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में सुधार करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर थी। अब यह बढ़कर 31 मार्च कर दी गई है। इसके अलावा मामूली फीस देकर आप ज्यादा समय तक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर सकते हैं।
रिवाइज्ड रिटर्न की आखिरी तारीख: 31 दिसंबर → 31 मार्च
मामूली फीस देकर सुधार संभव
फायदा: गलती सुधारना आसान
फ्यूचर-ऑप्शंस ट्रेडिंग महंगी होगी
फ्यूचर ट्रेडिंग पर लगने वाला Securities Transaction Tax (STT) बढ़ाकर 0.02% → 0.05% कर दिया गया है। ऑप्शंस पर STT बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है।
फ्यूचर STT: 0.02% → 0.05%
ऑप्शंस STT: नया 0.15%
ट्रेडिंग महंगी होगी, खासकर छोटे निवेशकों के लिए
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर टैक्स लगेगा

अब सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए Sovereign Gold Bonds (SGB) पर कैपिटल गेन टैक्स की छूट नहीं मिलेगी। पहले यह छूट सभी निवेशकों को मिलती थी। अब केवल वही निवेशक टैक्स‑फ्री रहेंगे जिन्होंने बॉन्ड RBI से खरीदे और पूरी अवधि तक रखा (8 साल)।
सेकेंडरी मार्केट SGB पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा
केवल RBI से खरीदे गए बॉन्ड पर टैक्स‑फ्री फायदा
अवधि: 8 साल
पुरानी और नई टैक्स रिजीम का अंतर
भारत में इनकम टैक्स भरते समय आप पुरानी या नई टैक्स रिजीम में से चुन सकते हैं। दोनों के अपने फायदे और नियम हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इन दोनों में क्या अंतर है और कौन सी आपकी स्थिति के लिए बेहतर हो सकती है।
नई टैक्स रिजीम
- 4 लाख रुपए तक की कमाई टैक्स फ्री
- टैक्स डिडक्शन (जैसे PPF, EPF) का कोई फायदा नहीं
- टैक्स भरना आसान, लेकिन निवेश पर कोई छूट नहीं
क्या है खासीयत
- सरल और आसान
- टैक्स बचाने के लिए डिडक्शन नहीं
पुरानी टैक्स रिजीम
- टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स
- कई तरह के टैक्स डिडक्शन और छूट मिलते हैं, जैसे: EPF, PPF और ELSS में निवेश, मेडिकल पॉलिसी पर खर्च
क्या है खासीयत
- निवेश और टैक्स बचत के लिए बेहतर
- थोड़ा जटिल, लेकिन छूट ज्यादा
कौन सी टैक्स रिजीम आपके लिए बेहतर?
पुरानी टैक्स रिजीम: यदि आप निवेश और टैक्स बचत का पूरा फायदा लेना चाहते हैं।
- नई टैक्स रिजीम: यदि आप कम टैक्स रेट और टैक्स डिडक्शन के झंझटों से बचना चाहते हैं।
इस बजट में टैक्स स्लैब या रेट में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। मुख्य बदलाव टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रक्रियाओं को आसान बनाने और कुछ खास खर्चों पर टैक्स कम करने पर केंद्रित रहे हैं यदि आप निवेश और टैक्स बचत का पूरा फायदा लेना चाहते हैं तो पुरानी टैक्स रिजीम आपके लिए बेहतर होगी। वहीं, अगर आप सरलता और कम झंझट पसंद करते हैं तो नई टैक्स रिजीम आपके लिए सही विकल्प रहेगी
