स्वभाव का विनम्र होना भी जरूरी है: Humble Nature
Humble Nature

Humble Nature: अपने जीवन में दूसरों के लिए वास्तव में आभारी होने की क्षमता के लिए विनम्रता की आवश्यकता होती है। विनम्रता से ही कृतज्ञता बढ़ती है। विनम्रता के बिना, मेरा मानना ​​है कि कृतज्ञता हमेशा सतही होगी। असल में विनम्रता वास्तव में शक्ति देती है। लेकिन दुर्भाग्य से बहुत कम लोग जानते हैं।इस भावना से हमें कई शारीरिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं l

कैसे जाने कि आपके अंदर कृतज्ञता की भावना जागृत हो रही है

Humble Nature
Gratitude turns what we have into enough

आपके पास जो कुछ भी है उसके लिए हर पल अगर आप भगवान को अंदर ही अंदर धन्यवाद देते हैं और कुछ बुरा होने पर भी “ इस बात में जरूर कुछ ना कुछ भलाई छिपी हुई है “ इस बात पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं तो निश्चित ही आपके अंदर कृतज्ञता का गुण जागृत हो रहा है l ऐसा व्यक्ति अपने जीवन की हर छोटी से छोटी बात पर ध्यान देता है जो उसको खुशी और शांति देती है l

कृतज्ञता से विनम्रता का गुण विकसित होता है

Actual Gratitude is the symptom of Humility
Humility is the solid foundation of all virtues

जब हम अपने अंदर कृतज्ञता का गुण विकसित करते हैं तो विनम्रता का गुण स्वाभाविक रूप से हमारे अंदर आने लगता है l जब हम अपने जीवन में हर बात के लिए ईश्वर के प्रति कृतज्ञ होते हैं तो हमें अपने आप ही यह अहसास होता है कि जीवन में हमें जो कुछ भी मिला है चाहे वह हमारी सफलता के रूप में हो या हमारा कोई गुण, सब कुछ हमें ईश्वर के हुकुम से ही मिला है l उदाहरण के लिए अगर कोई अच्छा गा सकता है तो यह आवाज उसे गॉड गिफ्टेड है l

अगर किसी के अंदर कोई कला है जो आज उसे सफलता दिला रही है तो जरा सोचे वो कला उसके अंदर किसने डाली, उस परम पिता परमात्मा ने l ऐसा विचार करने से अपने आप ही हमारा अहंकार खत्म होने लगता है और सब के प्रति विनम्रता की भावना पैदा होती है l

अहंकार क्या है

अहंकार मनुष्य के भीतर छिपा एक ऐसा अज्ञान है जिसमें वह अपने को ही करने वाला समझता है l उसे ऐसा महसूस होता है कि जो भी उसे जीवन में मिला है अपने ही प्रयासों से मिला है l एक अहंकारी व्यक्ति इसी अहंकार से दूसरों को अपने से नीचा आंकता है , उन पर शासन करने की कोशिश करता है और इस तरह वे विनम्रता के गुणों से कोसों दूर हो जाता है l

कृतज्ञता और विनम्रता मानव जीवन के मूल्य हैँ

'Thank you God' is the best prayer that anyone could say
Gratitude and Humility are the two characteristics of happiness

कृतज्ञता और विनम्रता के गुणों को अपनाकर एक इंसान अपने सबसे प्रबल शत्रु अपने अहंकार पर विजय प्राप्त कर सकता है l आज हम सब अपने अंदर झांक कर देखें कि सारा दिन में कितनी बार हम ईश्वर को याद करते हैं l जब हमारे सामने कोई दुख आता है तभी हम ईश्वर की पुकार करते हैं पर क्या हम सोते, जागते,उठते,बैठते, खाते, पीते,काम करते उस शक्ति को महसूस करते हैं या उसका धन्यवाद करते हैं?

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लेकिन जो उस शक्ति के अस्तित्व को महसूस कर लेता है वह हर पल आनंद में रहता है और जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता I हर पल ईश्वर के प्रति कृतज्ञ रहते हुए जीवन जीने का अर्थ है कि ईश्वर को हम कभी भी नहीं भूले lहर परिस्थिति और हर कार्य को करते वक्त यह महसूस करें कि ईश्वर हमारे अंदर ही शक्ति के रूप में विधमान हैँ और हमारे हर कार्य में हमारा मार्गदर्शन कर रहें हैँ l इस तरह हम सभी से प्यार और नम्रता के साथ व्यवहार कर पाएंगे l

मेरा नाम वामिका है, और मैं पिछले पाँच वर्षों से हिंदी डिजिटल मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर सक्रिय हूं। विशेष रूप से महिला स्वास्थ्य, रिश्तों की जटिलताएं, बच्चों की परवरिश, और सामाजिक बदलाव जैसे विषयों पर लेखन का अनुभव है। मेरी लेखनी...