Home Temple Vastu Tips: धार्मिक शास्त्रों में पूजा पाठ, पौराणिक परंपराओं का विशेष महत्व है। शास्त्रों में चाहे कोई भी धार्मिक अनुष्ठान, हवन या पूजा पाठ हो सबके लिए विशेष नियम बताए गए हैं। घर की सबसे प्रमुख व पवित्र जगह पूजा घर को माना जाता है, इसलिए पूजा घर में वास्तु नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। घर के मंदिर में नारियल, कुमकुम, रोली, अक्षत समेत कुछ चीजों को रखना शुभ माना जाता है। इसी तरह मंदिर में जल का पात्र भी रखना महत्वपूर्ण होता है। मंदिर घर में जल रखने के पीछे शास्त्रों में कई कारण बताए गए हैं। पंडित इंद्रमणि घनस्याल बताते हैं कि मंदिर में सुबह पूजा से पहले ताजा जल भरकर रखना चाहिए। इससे घर में सुख—समृद्धि रहने के साथ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आइये जानते हैं आखिर मंदिर में जल का पात्र क्यों जरूरी होता है।
पूजा घर में जल रखने का कारण

ज्योतिष शास्त्र में उल्लेख मिलता है कि पूजा घर में जल का पात्र रखने से घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और सुख—समृद्धि का वास होता है। मान्यता है कि पूजा घर में रखा जल नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित कर लेता है, जिसके कारण घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। पूजा घर में प्रतिदिन नियमित रूप से ताजा जल रखना चाहिए। जल रखने के लिए हमेशा तांबे के लोटे या कलश का प्रयोग करना चाहिए। तांबे के पात्र में रखा जल बहुत ही पवित्र माना जाता है। पूजा पाठ करने के बाद पूजा घर में रखे तांबे के लोटे के पानी से अपने पूरे घर में छिड़काव करना चाहिए। ऐसा करने से घर में सुख शांति बनी रहती है तथा सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित होती है।
आचमन करने का महत्व

पूजा घर में रखे जल से आचमन करना शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार जल की पूजा वरुण देव के रूप में होती है, इसलिए आरती करने के बाद जल से आचमन जरूर करना चाहिए। धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि बिना आचमन किए पूजा अधूरी मानी जाती है। माना जाता है कि वरुण देव सब की रक्षा करते हैं इसलिए पूजा घर में हमेशा जल रखना चाहिए। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार पूजा घर में रखे चल के पात्र में तुलसी के कुछ पत्ते जरूर डालने चाहिए, जिससे पूजा घर में रखा जल और भी पवित्र हो जाता है। इसलिए पूजा घर में तांबे के लोटे में हमेशा तुलसी के पत्ते जरूर डालने चाहिए।
शुभता का प्रतीक है जल

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूजा घर में जल का विशेष महत्व है। पूजा पाठ करते समय प्रतिदिन इस जल से भगवान को स्नान कराना उत्तम माना जाता है। ज्योतिष नियमों के साथ-साथ पूजा घर में जल रखना हमारी भगवान के प्रति श्रद्धा को भी दर्शाता है। जिस प्रकार मनुष्य भोजन ग्रहण करने के बाद पानी पीता है, वैसे ही भोग लगाने के बाद भगवान भी जल को ग्रहण करते हैं।
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