बीच में रियलिटी शोज बढ़ने के बाद एक डिबेट सी उठी थी, की बच्चों को कम उम्र में टीवी में डालना चाहिए या नहीं, कई लोग पक्ष में थे और कई लोगों का मानना था कि इससे बच्चों का बचपन खराब हो जाता है। वे बचपन को एन्जॉय नहीं कर पाते और छोटी ही उम्र में पैसे कमाने की होड़ में लग जाते हैं। कई बार बच्चे छोटी उम्र में सक्सेस तो पा लेते है लेकिन फिर उन्हें मिलने वाली शोहरत से उनका दम-सा घुटने लगता है। कुछ ऐसा ही हुआ रिया शुक्ला के साथ, जी हाँ, वही रिया शुक्ला जिसे आप सबने निल बट्टे सन्नाटा में अप्पू के किरदार में देखा था। गृहलक्ष्मी से एक्सक्लूसिव बातचीत में रिया ने अपनी जिन्दगी के कई पहलुओं पर बातचीत की-
हमारी तरक्की और कामयाबी इस बात पर बिल्कुल भी निर्भर नहीं करती कि हम कहां और किस परिवेश से आ रहे हैं। इस बात की उदाहरण हैं लखनऊ की रिया शुक्ला जिन्होंने अपनी पहली ही फिल्म में सारे मार्क्स हासिल कर लिए। यूं तो फिल्म में मैथ्स में उनका डिब्बा गोल था लेकिन असल में वे हर पायदान पर फिट और हिट रहीं। हाल ही में रिलीज हुई हिचकी में भी रिया अहम भूमिका निभा रही हैं, जो खास तौर पर उन्हीं के लिए बना था। हालांकि इस फिल्म में रिया के डायलॉग्स कुछ कम थे लेकिन रानी मुखर्जी के साथ स्क्रीन शेयर करना ही उनके लिए बहुत बड़ी बात है।
संकरी गलियों से सपनों के शहर का सफर
रिया लखनऊ के अलीगंज में सरकारी क्वार्टर में रहती हैं, जो सरकारी क्वार्टर उनके पापा को सरकार की तरफ से मिला हुआ है। स्वरा भास्कर की फिल्म ‘निल बटे सन्नाटा’ से बॉलीवुड में एंट्री करने वाली रिया शुक्ला के पिता PWD में बाबू हैं और मां हाऊस वाइफ। रिया अपने परिवार के साथ संकरी गलियों और फिर पतली सीढ़ियों से मिलने वाले छोटे से घर में रहती हैं, जहां उनके साथ 3 भाई बहन और रहते हैं। घर भले छोटा हो लेकिन उसके सपने बड़े हैं। पहली ही फिल्म में रिया ने खूब सुर्खियां बटोरीं।
ऐसे मिला पहला रोल
रिया बताती हैं कि वे क्लासिकल डांसर भी हैं और उनके मास्टर ने उन्हें इस ऑडिशन के बारे में बताया। जिसके बाद फिल्म की डायरेक्टर ने मुझे लीड रोल में रख लिया। पहला ब्रेक मिलने के बारे में वो कहती हैं कि क्लासिकल डांस सीखने के दौरान ही मुझे निल बट्टे सन्नटा के ऑडिशन का पता लगा, मेरे एक्सप्रेशंस डायरेक्टर को बहुत पसंद आए और उनका कहना था कि अप्पू का रोल मेरे लिए ही बना है। लेकिन ये सब इतना भी आसान नहीं था क्योंकि रिया उस वक्त छोटी थी और उसने कभी एक्टिंग नहीं की थी और उसके पिता बॉलीवुड भेजने को तैयार नहीं थे, काफी समझाने के बाद वे तैयार हुए और आज रिया की बढ़ती तरक्की देखकर वे सभी बहुत खुश हैं।
स्पेशल ट्रीटमेंट कभी-कभी घुटन बन जाता है
रिया ने बताया कि अब मुझे अचानक से इतनी इज्जत मिलने लगी है कि मुझे हजम ही नहीं होती। वे कहती हैं हम मिडिल क्लास वाले सोने का चम्मच लेकर नहीं पैदा होते और ना ही हम परियों की तरह पले बढ़े होते हैं लेकिन अचानक से मुझे ऐसा ट्रीटमेंट मिलने लगा जो मुझे कई बार घुटन देने लगता है। बचपन से छोटे से घर में रहने वाली रिया ने अपने परिवार को सुंदर सा आशियाना दिया, जिसमें वे जल्द ही शिफ्ट होने वाली हैं। रिया कहती हैं हम 4 भाई बहन एक छोटे से कमरे वाले घर में रहते थे और अब हमने दो घर लिए हैं, जो मेरे औऱ परिवार के लिए बहुत बड़ी बात है।
भाई बहनों के कारण कभी घर में भाव नहीं मिला
पहली फिल्म के बाद रिया को कई विज्ञापन मिलने लगे, रिया को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड भी मिला, इसी जगह से रिया को दूसरी फिल्म का ऑफर मिला, ये दूसरी फिल्म थी हिचकी। यशराज फिल्म्स की कास्टिंग डायरेक्टर उसी अवॉर्ड शो में थी, जहां रिया को अवॉर्ड मिला। कास्टिंग डायरेक्टर को रिया इतनी पसंद आई कि उन्होंने फिल्म में उसके लिए रोल ही लिख डाला। रिया कहती हैं मेरे लिए शोहरत एक के बाद एक आते गई, मुझे घर में कोई भाव नहीं मिलता था क्योंकि मैं भाई बहनें में बीच की थी लेकिन आज सब मेरे आगे पीछे लगे रहते हैं।
स्वरा भास्कर की फिल्म ‘निल बटे सन्नाटा’ आकांझाओं, सपनों और उन सपनों को साकार करने के लिए की जाने वाली मेहनत को दिखाती है। और रिया ने इसमें कोई कसर नहीं छोड़ी। फिल्म के लिए रिया ने महीनों ट्रेनिंग ली, वर्कशॉप किए क्योंकि रिया ने इससे पहले कभी एक्टिंग नहीं की थी।
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